योगी सरकार का वादा आधा, 2.15 करोड़ में से 86 लाख किसानों की  कर्जमाफी 

योगी सरकार का वादा आधा, 2.15 करोड़ में से 86 लाख किसानों की  कर्जमाफी 
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योगी सरकार का वादा आधा, 2.15 करोड़ में से 86 लाख किसानों की कर्जमाफी 

-आवेश तिवारी 
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा  मंगलवार की कैबिनेट बैठक में किसानों को एक लाख तक की कर्जमाफी किये जाने का फैसला प्रदेश के छोटी जोत के किसानों के लिए राहत की बात हैं। हांलाकि इससे न सिर्फ मझोले और बड़े बल्कि सीमान्त कृषकों  का एक बड़ा वर्ग लाभ से वंचित रहेगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के किसानों पर औसत कर्जदारी 1 लाख 34 हजार रुपयों की थी ।स्टेट बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 के अंत तक यूपी के किसानों पर बैंकों के 86 हजार 421 करोड़ रूपए बकाये थे। कृषि विशेषज्ञों की माने तो योगी सरकार ने ऋण माफ़ी के इस फार्मूले से दोहरे लाभ में रहेगी। पहला तो यह लाभ होगा कि सरकार पर वित्तीय बोझ कम पड़ेगा दूसरा गरीब और वंचित तबके के किसानों को तात्कालिक राह मिल सकेगी। हांलाकि मौजूदा कर्जमाफी से भी उत्तर प्रदेश सरकार के कुल वित्तीय बजट पर तीन से चार फीसदी का असर पड़ेगा। 
यूपी में 44 फीसदी किसान कर्जदार 
केंद्र सरकार द्वारा किसानों की कर्जमाफी में किसी किस्म का मदद न दिए जाने के बाद यूपी सरकार ने कर्जमाफी का ऐलान तो किया है लेकिन उसकी सीमा निर्धारित कर दी है। ।उत्तर प्रदेश में लगभग 44 फीसदी किसान परिवार कर्जदार हैं इनमे से ज्यादातर किसान पूर्वी यूपी से हैं ।सूत्रों के अनुसार सरकार ने फिलहाल 31 मार्च 2016 तक लघु व सीमांत किसानों द्वारा लिये गए फसली ऋण में से उनके द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान भुगतान की गई राशि को घटाते हुए अधिकतम एक लाख रुपये की सीमा तक के कर्ज माफ करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा सरकार लघु व सीमांत किसानों के गैर निष्पादक ऋणों का भी भुगतान करेगी। 
86 लाख किसानों को मिलेगा लाभ 
सरकार के आज के फैसले को देखे तो पता चलता है कि इससे लगभग 86 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा लेकिन फिर भी छोटी जोत के किसानों की एक बड़ी तादात कर्जमाफी से वंचित रह जायेगी। गौरतलब है कि त्तर प्रदेश में 2.33 करोड़ किसान हैं। इनमें 1.85 करोड़ सीमांत और लगभग तीस लाख लघु किसान हैं। इस हिसाब से सूबे में लघु व सीमांत किसानों की संख्या तक़रीबन 2.15 करोड़ है सरकार के आज के फैसले से लगभग 86 लाख किसानों को कर्जमाफी मिल जायेगी फिर भी एक करोड़ से ज्यादा किसान कर्ज में ही रहेंगे। 
कर्जदारी के मामले में टॉप फाइव में यूपी 
उत्तर प्रदेश किसानों की कर्जदारी के मामले में देश के पांच राज्यों में शामिल हैं टॉप फाइव में शामिल अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़, मिजोरम और अरुणांचल प्रदेश है। कर्जदारी पर पिछले दिनों आई केंद्र सरकार की सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आंकड़े न सिर्फ चौकांते हैं बल्कि बताते भी हैं कि यूपी के गाँवों में कर्ज की वजह से स्थितियां कितनी गंभीर होती जा रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि यूपी में प्रति एक हजार ग्रामीण परिवारों में से 296 परिवार कर्ज में हैं,यानि कि ग्रामीण इलाकों में एक तिहाई परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में कर्जदारी का आलम यह है कि बड़े पैमाने पर किसान कर्ज न चुका पाने की वजह से दूसरे धंधों में उतर रहे हैं। यूपी में कर्ज लेने के मामले में दूसरे नंबर पर गैर कृषि क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर है। स्टेट बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्जमाफी से जुडी समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार को पारम्परिक तौर तरीकों को छोड़ राजस्व इकठ्ठा करने के नए तरीके अपनाने होंगे ,दिलचस्प यह है कि उत्तर प्रदेश में जनधन खाते तो लगभग सभी परिवारों के खुल गए लेकिन बैंकों के कर्ज की वापसी बेहद कम है।
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