काशी के इन युवाओं को सलाम, मिर्जापुर के नक्सली गांवों की बदलेंगे तकदीर

मिर्जापुर के नक्सली गांव धनसीरिया गांव( राजगढ़ ब्लाक मड़िहान थाना मिर्जापुर) में किया ग्रीन ब्रिगेड का गठन।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 04 Feb 2018, 08:38 PM IST

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. काशी के युवा जिन्होंने ज्यादा नहीं तीन साल पहले गांवों की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया था। बनारस में आधा दर्जन गांवों में वो काम कर के दिखाया जो आजादी के बाद से स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं कर सके। बुनियादी सुविधाओं से बेखबर गांवों में वो सब कुछ मुहैया कराया जो एक आम नागरिक को मिलनी ही चाहिए। जो एक लोक कल्याणकारी सरकार का दायित्व है। इन युवाओं ने यह सब किया अपने दम पर अपनी पॉकेट मनी से। इसी के तहत उन्होंने गांवों में महिलाओं की टीम ''ग्रीन ब्रिगेड'' का गठन किया। उन्हें आत्म रक्षा का गुर सिखाया। अब ये ग्रीन ब्रिगेड वाराणसी पुलिस व प्रशासन का सहयोग कर रही है। चाहे वह गांवों में लोगों को जुआ और नशे की लत छुड़ाने का मामला हो या लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना हो या पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाना हो। गांव के लघु एवं कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना हो। अब इन्होंने नया सपना देखा है। एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, यह सपना है पूर्वांचल के नक्सल प्रभावित गांवों को मुख्य धारा में लाने का। इसका आगाज रविवार को हुआ, पड़ोसी जिले मिर्जापुर के राजगढ़ ब्लाक मड़िहान थाना अंतर्गत धनसीरिया में। युवाओं की टीम होप ने इस गांव की महिलाओं को प्रेरित कर वहां भी ग्रीन ब्रिगेड का गठन कर दिया। अब ये महिलाएं गांव-गांव जा कर न केवल महिलाओं को प्रेरित करेंगी बल्कि बच्चों को शिक्षित करेंगी, नक्सलवाद से मुक्त कराने में शासन-प्रशासन का सहयोग करेंगी।

काशी की युवा टीम होप की पहल मिर्जापुर के नक्सल प्रभावित गांव में ग्रीन ग्रुप का गठन

काशी के इन युवाओं पर भला किसे न होगा न नाज। क्या कुछ नहीं किया इन युवाओं ने तीन साल में। वह भी 21वीं सदी में पिछड़े भारत के गांवों में। जहां के लोग अब भी लालटेन युग में जी रहे थे। शौचालय तक नहीं था, लोग खुले में शौच को जाते रहे। बच्चों के लिए एक आंगनबाड़ी केंद्र नहीं था। प्राइमरी स्कूल नहीं था। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं था। लेकिन देखते ही देखते इन युवाओं ने एक के बाद एक करके जिन छह गांवों को गोद लिया वो सारे के सारे अगर शहरी सुविधाओं से लैश नहीं तो अब कम से कम बुनियादी सुविधाएं मुहैया हैं जो जीवन जीने के लिए अनिवार्य है। इन गांवों के बच्चे स्कूल जाते हैं। गांव में स्वास्थ्य केंद्र हो गया है। एलईडी नहीं तो कम से कम बल्ब तो जल ही रहा है हर घर में। सबसे बड़ी चीज कि इन गांवों को इन युवाओं ने नशामुक्त, जुआ का फड़ नहीं लगता। महिलाओं की एक ऐसी फौज खड़ी हो गई है जो हर कुरीतियों के खिलाफ लड़ने को तैयार है। अब तो ये ग्रामीण महिलाएं शहरियों को पर्यावरण का पाठ पढ़ाने लगी हैं। पॉश रिहाइशी इलाकों में ही नहीं बल्कि मॉल तक में जा कर हाई प्रोफाइल लोगों को धरती को बचाने, शुद्ध हवा, शुद्द पानी की रक्षा के लिए जागरूक करती हैं। लोगों को बताती हैं कि कैसे प्रकृति संग जुड़ कर हम अपने अतीत को वर्तमान में बदल कर सुखद जीवन जी सकते हैं और भावी पीढ़ी के लिए सुनहरा शहर, सुनहरा वातावरण दे सकते हैं जिन्हें लेकर उन्हें भी अपनों पर गर्व होगा। ये काम किया है बीएचयू, जेएनयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों ने। ये सभी काशी से जुड़े हैं। हालांकि इस मुहिम की शुरूआत तीन साल पहले सिर्फ दो युवाओं रवि मिश्र और दिव्यांशु उपाध्याय ने की थी। अब इनके साथ 300 युवक-युवतियां जुड़ चुके हैं। ये है इन युवाओं का स्टार्ट-अप, लेकिन इसके लिए इन्हें एक पैसे की सरकारी मदद नहीं मिलती, ये अपने पॉकेट मनी से सारा काम कर रहे हैं। इन्होंने जिन गांवों को गोद लिया है वहां बाकायदा कक्षाएं भी संचालित करते हैं। बुजुर्गों, प्रौढ़ों, महिलाओं, युवतियों और बच्चों को साक्षर नहीं शिक्षित बना रहे हैं।

 

 

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ग्रीन ग्रुप की महिला सदस्यों को परिचन पत्र वितरण

इस युवा टीम ने बनारस के छह गांव में 25-25 महिलाओं का ग्रीन ग्रुप गठित किया है जो नशे और जुआ के खिलाफ कार्य लड़ रही है। इसी ग्रीन ग्रुप में 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदान को बढाने के लिए अलग-अलग विधानसभा में जागरूकता अभियान चलाया था। फिर निकाय चुनाव के दौरान भी गंगापुर नगर पंचायत में भी जागरूकता अभियान चलाया। इसका बढ़िया नतीजा भी निकला। मत प्रतिशत बढा। खास तौर पर शहरी क्षेत्र में जहां लोग मतदान के लिए निकलते नहीं थे वहां के बूथों का मत प्रतिशत बढा। इसी ग्रीन ग्रुप ने दीपावली के पहले पर्यावरण को बचाने के लिए शहर में जागरूकता अभियान चलाया। पॉश कॉलोनियों में गए, मॉल में गए और गांव में बने दीये वितरित कर लोगों से चाइनीज झालर न जलाने और आतिशबाजी से दूर रहने का संदेश दिया।

 

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ग्रीन ग्रुप को संबोधित करते एसपी मिर्जापुर

लाल सलाम का नारा देकर केंद्र व राज्य सरकारों की चूलें हिलाने वाले नक्सलियों के गढ़ मिर्जापुर में ग्रीन ब्रिगेड का गठन आसान काम नहीं था, लेकिन होप के युवाओं ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। संस्था से जुड़े दिव्यांशु ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि जब हम लोग इन गांवों में पहुंचे तो लोग हमें ही शक की निगाह से देखते थे। पुलिस व प्रशासन से सहयोग और उनकी मदद से विकास की बात करने पर वो ऐसे घूरते थे मानों हम उनके दुश्मन हैं। वो हमें पुलिस प्रशासन का जासूस समझने लगे थे। लेकिन उन्हीं ग्रामीणों में कुछ ऐसे लोग मिले जिन्होंने हमें यह बताया कि इनके सामने पुलिस व प्रशासन, शासन का नाम नहीं लेना चाहिए। इनके अंतर मन में शासन प्रशासन को लेकर अच्छा अनुभव नहीं है। फिर धीरे-धीरे हम लोगों ने अपने दम पर नक्सल प्रभावित गांवों में काम करना शुरू किया। डर भी लगता था, वहां कौन कैसा है, किस मुद्दे पर कौन कब भड़क जाएगा, इसका अंदाजा तक नहीं लगता। लेकिन करीब महीने भर की मेहनत के बाद इन्होने वह कर दिखाया जिसके बारे में शासन प्रशासन के नुमाइंदे भी कल्पना तक नहीं कर सकते।

ग्रीन ग्रुप के साथ एसपी मिर्जापुर व विधायक

होप टीम ने रविवार को राजगढ़ ब्लाक मड़िहान थाना अंतर्गत धनसीरिया गांव में ग्रीन ब्रिगेड के गठन का कारनाम कर दिखाया। बता दें कि मिर्जापुर के 10 नक्सल प्रभावित गांव जो विकास की रोशनी से काफी पीछे है वहां इन महिलाओं का समूह तैयार किया गया हैl इस कार्यक्रम मैं मुख्य अतिथि वाराणसी के पूर्व एसपी ग्रामीण और अब मिर्जापुर के एसपी आशीष तिवारी और मड़िहान के विधायक रमाशंकर सिंह पटेल ने ग्रीन ग्रुप की महिलाओं को हरी झंडी दिखाकर उनके गांव में रवाना किया। ग्रीन ग्रुप की सभी सदस्यों को पुलिस मित्र का आई कार्ड भी वितरित किया गया। इस मौके पर एसपी तिवारी ने बनारस व्यतीत किए गए कार्यकाल के दौरान ग्रीन ग्रुप कि सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बनारस में नशा, जुआ, गांव के विकास के लिए ग्रीन- ग्रुप का काम काफी सफल और उत्साहवर्धक रहा है इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं ने प्रशासन का हर कदम पर साथ दिया। एसपी ने नक्सल प्रभावित 10 गांव की महिलाओं से उनके प्रशिक्षण और क्रियाकलाप के बारे में पूछा और उत्साहजनक उत्तर मिलनेपर उन्होंने होप के युवाओं की तारीफ की। उन्होंने महिलाओं सदस्यों को पुलिस की हर संभव मदद दिलवाने का भरोसा भी दिया। साथ ही संबंधित गांव के पुलिस अधिकारियों से ग्रीन ग्रुप की हर सदस्य का परिचय करवाया साथ ही पुलिस हेल्पलाइन नंबर वितरित किया। विधायक रमाशंकर सिंह पटेल भी युवाओं के इस प्रयास के मुरीद बने। कहा कि हम भी काम के लिए प्रयासरत थे जिन्हें होप के युवाओं ने साकार किया। ग्रीन ग्रुप जो नशा जुआ एवं गांव के विकास के लिए कार्य कर रही है वह समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

ये थे मौजूद

इस मौके पर होप संस्था के नेतृत्वकर्ता रवि मिश्रा के साथ दिव्यांशु उपाध्याय, धर्मेंद्र यादव, विकास दीक्षित, श्यामाकांत सुमन, सौरभ राठौर, संदीप गुप्ता, अक्षय, मंजू चौधरी, कैरवी पांडे, शिवानी जयसवाल, अनुभूति आदि मौजूद थे

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