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Nagaur patrika…सीवरेज का पानी सीधा प्रतापसागर तालाब में डाल रही नगरपरिषद…VIDEO

नागौर. शहर के परंपरागत जलस्रोतों में शामिल प्रतापसागर तालाब को गंदे नाले के तालाब के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया है। नगरपरिषद के एसटीपी प्लांट में सीवरेज का पानी जाने की जगह सीधा प्रतापसागर तालाब में जा रहा है। इसकी वजह से पूरा तालाब प्राकृतिक जल की जगह गंदे पानी से भर गया है। […]

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नागौर. शहर के परंपरागत जलस्रोतों में शामिल प्रतापसागर तालाब को गंदे नाले के तालाब के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया है। नगरपरिषद के एसटीपी प्लांट में सीवरेज का पानी जाने की जगह सीधा प्रतापसागर तालाब में जा रहा है। इसकी वजह से पूरा तालाब प्राकृतिक जल की जगह गंदे पानी से भर गया है। इसकी वजह से पूरे तालाब का पानी काला हो चुका है। सीवरेज के गंदे पानी के चलते इस तालाब की दुर्गन्ध के कारण आसपास के क्षेत्रों में लोगों का रहना ही मुश्किल हो गया है।
बदलने लगी तालाब की जैविक प्रकृति
प्रतापसागर तालाब की सार-संभाल करने की जगह उनको गंदे पानी के नालों में बदल दिया गया है। शहर के प्रतापसागर तालाब में गंदा पानी डाले जाने की वजह से इसकी जैविक प्रकृति बदलने लगी है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला गंदा पानी भी डाला जा रहा है। इसकी वजह से यह पूरा तालाब ही गंदे नाले ही बदल गया है। यही स्थिति शहर के समस तालाब, एवं गिनाणी तालाब की भी है। स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि गंदे पानी की वजह से तालाब पूरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं। तालाब को जल्द ही प्रदूषण मुक्त नहीं कराया गया तो फिर जैविक प्रदूषण के साथ ही अन्य पर्यावरणीय खतरनाक प्रभाव भी तेजी से पड़ेंगे।
इस तरह से जा रहा गंदा पानी
प्रतापसागर तालाब में सीवरेज के गंदे पानी डाले जाने की पड़ता की गई तो सामने अया कि प्रतापसागर तालाब के पास तक सीवरेज की लाइन बिछाई गई है। इसी लाइन के माध्यम से गंदा पानी डाला रहा है। बताते हंै कि यह सिलसिला काफी समय से लगातार चल रहा है। गंदे पानी के डाले जाने कारण इसके तालाब के भूजल की जैविक स्थिति प्रभावित होने के साथ ही इसमें सड़ांध मारते कचरे के कारण आसपास का पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है।
पानी के लिए गंदगी व कचरा होता है खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य स्रोत गारबेज यानि की जो पानी में कूड़ा-करकट, गन्दगी मिला दी जाती है। इस गंदगी में भारी धातुएँ जैसे निकिल, क्रोमियम, कोबाल्ट, कैडमियम, लेड भी पाये जाते हैं। यह काफी हानिकारक हैं। इन धातुओं के कारण फाइटो टॉक्सीसिटी लेवल अधिक हो जाता है। इससे यह पेड़ों और मनुष्यों में रोग उत्पन्न करते हैं। गारबेज के सडऩे पर विखण्डन होने पर गैसें निकलती हैं। वातावरण में खतरनाक प्रभाव छोडऩे के साथ ही जो दुर्गन्ध उत्पन्न कर, पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं्र। गारबेज के जल में मिलने से जल पूरी तरह से प्रदूषित हो जाता है।
इनका कहना है…
प्रतापसागर तालाब में सीवरेज का पानी जाने की जानकारी तो नहीं है। इसे नगरपरिषद की ओर से देखवा लिया जाएगा। इसके बाद इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
रामरतन चौधरी, आयुक्त, नगरपरिषद नागौर