कोटा से घर लौटे ३2 विद्यार्थी अब होम क्वारंटाइन में

विद्यार्थी बोले खाने का 4 हजार रूपए देना पड़ रहा था अतिरिक्त

By: Anil kumar soni

Published: 23 Apr 2020, 07:23 PM IST

विदिशा। जनता कफ्र्यू के बाद लॉकडाउन लगने से सभी कोचिंग संस्थान अचानक बंद कर दिए गए। ऐसे में नीट, आईआईटी आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने राजस्थान के कोटा पहुंचे सभी विद्यार्थी अपने-अपने हॉस्टल में ही कैद होकर रह गए थे। कई हॉस्टल में तो मैस भी बंद हो गई थी और टिफिन सेंटर और होटेल भी बंद हो जाने से खाने की दिक्कत कई विद्यार्थियों को होने लगी थी। जिसका फायदा कई हॉस्टल संचालकों ने उठाया और हॉस्टल किराया के अतिरिक्त खाने के ४ हजार हजार रुपए तक लेना शुरु कर दिया, जो मजबूरी में हमे देना पड़ रहे थे। वहीं जो खाना मिल रहा था उसे भी खाने में डर रहता था, कि कहीं किसी संक्रमित व्यक्ति के हाथ तो इसमें नहीं लग गए होंगे। हॉस्टल में ही कैद रहने के कारण घर की याद भी बहुत सताने लगी थी, लेकिन वापस आने की परमीशन भी सभी को नहीं मिल पा रही थी। पत्रिका के साथ कुछ ऐसे ही अनुभव साझा किए राजस्थान के कोटा से वापस आए विद्यार्थियों ने।

मालूम हो कि जिले के ३२ विद्यार्थी लॉकडाउन में कोटा में ही फंसकर रह गए थे। इसी प्रकार प्रदेशभर से करीब २८०० विद्यार्थी वहां विभिन्न प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी रह रहे थे। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इन सभी बच्चों को वापस अपने प्रदेश में बुलवाने के लिए १४० बस अधिगृहित कर राजस्थान के कोटा भेजीं थीं। जिनसे लगातार अपने-अपने गृह जिले बच्चों के आने का क्रम जारी है। इसी क्रम में गुरुवार को जिले में एक बस से जिले के ३२ छात्र-छात्राएं अपने-अपने घर वापस आए। कुछ बच्चे सिरोंज में उतर गए थे, कुछ गंजबासौदा और नयागोला आदि पर उतर गए थे। इस प्रकार विदिशा और ग्यारसपुर के शेष रह गए १३ बच्चों को बस दोपहर को डीटीओ ऑफिस लेकर पहुंची।

तालियां बजाकर किया स्वागत
विद्यार्थियों की बस दोपहर करीब एक बजे विदिशा में डीटीओ ऑफिस पहुंची, तो यहां पहले से ही नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन, एसडीएम संजय जैन, नायब तहसीलदार प्रमोद उईके, बीएमओ एके उपाध्याय, डीटीओ गिरजेश वर्मा, सामाजिक न्याय विभाग के पीके शर्मा सहित स्वाथ्य, राजस्व अमला और नगरपालिका अमला वहां पहुंच गया था। जैसे ही विद्यार्थियों की बस आई और बच्चों ने उतरना शुरु किया, तो सभी ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए उनका जोरदार स्वागत किया।

सभी की हुई स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य अमला द्वारा सभी विद्यार्थियों का एक डॉक्टर द्वारा थर्मल स्केनर से शरीर के तापमान की जांच करने के साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। प्रत्येक विद्यार्थी का फार्म भरवाया गया, जिसमें उसकी पूरी जानकारी भरी गई। वहीं स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ की गई।

सभी सामान और बस किया सेनेटाइजर
बस में आए प्रत्येक विद्यार्थी के एक-एक सामान को नपाकर्मियों द्वारा सैनिटाइज किया गया। वहीं विद्यार्थियों के हाथों को भी सेनेटाइज करवाया गया। इसके अतिरिक्त बस को भी सेनेटाइज किया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी विद्यार्थियों को १४ दिन के लिए होम क्वारंटाइन किया गया है।

सरकारी वाहनों से भेजा घर
सभी विद्यार्थियों को सरकारी वाहन से ही उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि कई विद्यार्थियों के अभिभावक भी वहां पहुंच गए थे और वे अपने निजी वाहन से ही बच्चों को घर लेकर आए।

बेटे को लेने गए और स्वंय एक माह फंसे रहे लॉकडाउन में
कोटा से वापस आए बैजनाथ सिंह लोधी ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने कोटा में विगत कुछ माह से रह रहे थे। उनको घर लाने के लिए उन्हें लेने उनके पिता पर्वतसिंह २१ मार्च को पहुंचे थे। लेकिन दूसरे दिन जनता कफ्र्यू के बाद ही लगातार लॉकडाउन बढ़ता गया। ट्रेनें भी बंद होने जाने से रिजर्वेशन कैंसिल करवाना पड़ा। ऐसे में उनके साथ ही उनके पिता भी वहीं फंस गए थे और उनके साथ हॉस्टल में ही रह रहे थे। लोधी ने बताया कि ऐसे में घर पर एक माह से उनकी मां अकेलीं थीं।

बजरंगगढ़ में एक ही बस में बैठे विदिशा के सभी विद्यार्थी
कोटा में सभी विद्यार्थियों को लेने गए एसआई योगेंद्र सिंह परमार ने बताया कि वह कोटा के लिए २१ अप्रेल को सरकारी वाहन से रात १२ बजे निकले थे। २२ की सुबह ग्वालियर पहुंचे। जहां से उन्हें एक बस मिली जिससे वे अपने एक आरक्षक के साथ कोटा के लिए रवाना हुए और रात नौ बजे कोटा पहुंचे। वहां रूट के हिसाब से अलग-अलग जिलों के बच्चे उनकी बस में बैठे। इसके बाद वहां से रवाना हुए और २२ की रात गुना पहुंचे जहां बजरंगगढ़ में रात रुके और २३ की सुबह करीब सात बजे एक बस में विदिशा जिले के सभी ३२ विद्यार्थियों को बिठाया गया और वहां से रवाना हुए। फिर जिले की सीमा पर प्रशासनिक अधिकारियों ने बस को रिसीव किया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में बस सिरोंज, कुरवाई मेहलुआ चौराहा पहुंची। जहां सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इसके बाद बस अंबानगर चौराहा, नया गोला होते हुए उस क्षेत्र के विद्यार्थियों को उनके घर पहुंचाते हुए दोपहर को जिला मुख्यालय पर डीटीओ कार्यालय परिसर पहुंचीं।

विदिशा के 13 विद्यार्थी
जिलेभर के ३२ विद्यार्थी इस बस से आए। इनमें दो सिरोंज के, सात कुरवाई के, गंजबासौदा के छह, नटेरन के चार और विदिशा तहसील के १३ विद्यार्थी शामिल हैं।

इनका कहना है
लॉकडाउन बढ़ा तो बढ़ी चिंता
एक साल से आईआईटी की तैयारी करने के लिए कोटा में थी। मार्च माह में लॉकडाउन शुरु हो जाने पर कोचिंग तो बंद हो ही गईं थीं, हॉस्टल की मैस भी बंद हो गई थी। लॉकडाउन तीसरी बार बढ़ जाने से चिंता सताने लगी थी और घर की भी याद आने लगी थी।
- निकिता राय, छात्रा
देना पड़ रहे थी खाना की अतिरिक्त राशि
लॉकडाउन लगते ही हॉस्टल की मैस भी बंद हो गई थी। पहले हॉस्टल किराया महीने का ७ हजार ५०० रुपए ले रहे थे। उसमें खाना भी शामिल था। लेकिन लॉकडाउन में खाने का ४ हजार रुपए अतिरिक्त लिया जा रहा था।
- गुलशन अहिरवार, विद्यार्थी
खाना खाने में लगता था डर
मैं नीट की तैयारी करने कोटा गई थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते खाने की दिक्कत वहां शुरु हो गई थी, लेकिन जो खाना आता था उसे खाने में भी डर लगता था कि कहीं किसी संक्रमित व्यक्ति के हाथ नहीं लग गए हों। ऐसे माहौल में वापस अपने घर वापस आने पर काफी खुशी हो रही है।
- दिशा विश्वकर्मा, छात्रा
जिले में आए सभी विद्यार्थियों की दो बार तो जिले में ही स्वास्थ्य जांच की गई। किसी भी विद्यार्थी को सर्दी-खांसी की कोई शिकायत नहीं थी। यह सभी विद्यार्थी २८ दिन के होम क्वारंटाइन पर रहेंगे।
- संजय जैन, एसडीएम, विदिशा

Anil kumar soni Desk
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