वन भूमि की अवैध खदानों को बंद कराने प्रशासन मौन

उदयपुर क्षेत्र में सैंकड़ों बीघा वन भूमि की जमीन पर करीब बीस वर्षों से अवैध खदानों का कारोबार चल रहा है

By: govind saxena

Published: 07 Sep 2021, 08:47 PM IST

विदिशा. उदयपुर क्षेत्र में सैंकड़ों बीघा वन भूमि की जमीन पर करीब बीस वर्षों से अवैध खदानों का कारोबार चल रहा है। यहां से रोजाना लाखों रूपए का पत्थर बिना वैध प्रक्रिया के बाजार में आ रहा है। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी वन विभाग और प्रशासन इस मामले में खामोशी साधे हुए है। गंजबासौदा क्षेत्र में इन अवैध पत्थर खदानों के दृश्य भयावह हैं। चौतरफा वन क्षेत्र को खोदकर गहरी खंतियों में तब्दील कर दिया गया है। सदियों पुराने प्राकृतिक पहाड़ी को भी ब्लास्टिंग के जरिए मिटाकर फर्सी पत्थर निकाला जा रहा है। प्राकृतिक पहाड़ों जगह अब गहरी खंतियां और पत्थरों की ब्लास्टिंग से निकली टुकड़ी के ढेर चौतरफा दिखाई देते हैं। मीलों दूर यही नजारा दिखाई देता है। लेकिन पत्थर माफिया ने इस पूरे कारोबार में जंगल में ही ऐसे रास्ते बना रखे हैं जहां जाना मुश्किल होता है। इन्हीं रास्तों से जेसीबी, पोकलेन और डम्परों के जरिए सैंकड़ों मजदूरों से बिना किसी सतर्कता के साधनों के ये खतरों का खेल खेला जा रहा है। यहां से निकलने वाला सैंकड़ों ट्रक पत्थर रोजाना वन विभाग, खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे से निकलकर बाजार में आ रहा है, करोड़ों का व्यापार हो रहा है, लेकिन मजाल है कि कोई हाथ लगा दे। कार्रवाई के नाम पर इस क्षेत्र को मिला है सिर्फ अभयदान। सबको पता है कि यहां के कई प्रभावशाली लोग पत्थर के इस अवैध कारोबार में वर्षों से लगे हैं। कुछ बहुत प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी पत्थर माफिया को है। कुछ लोगों के कमीशन बंधे हैं कि जब तक तुम चढौत्री चढ़ाओगे तब तक तुम्हें कोई हाथ नहीं लगाएगा, जिस दिन चढौत्री बंद की उसी दिन या तो पकड़वा दिए जाओगे या फिर काम बंद करना होगा। इसलिए विधानसभा में भी उठने के बावजूद इस क्षेत्र की अवैध पत्थर खदानों पर कोई बंदिश नहीं लग पाई। दरअसल इस धंधे में केवल पत्थर के अवैध कारोबारी ही नहीं बल्कि कई नेता और अधिकारी भी पूरी तरह लिप्त हैं। ऐसे में आने वाले कुछ ही वर्षों में उदयपुर का यह सैेंकड़ों बीघा का वन क्षेत्र पूरी तरह खोखला होकर पत्थर माफिया पुरास्मारकों के मुहाने आ पहुंचेगा और हमारी सदियों पुरानी विरासत को भी मिटाने की साजिश शुरू हो जाएगी।

govind saxena Bureau Incharge
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