ओला-पानी से हुए नुकसान जांचने के लिए फसल सूखने का इंतजार

brajesh tiwari

Publish: Feb, 15 2018 09:36:04 (IST)

Vidisha, Madhya Pradesh, India
ओला-पानी से हुए नुकसान जांचने के लिए फसल सूखने का इंतजार

दो गांव में 75 फीसदी से ज्यादा और 75 गांव में छिटपुट बर्बादी का नजरी आंकलन

विदिशा। खेतों में खड़ी फसल पर ओलों की मार के बाद अब उसके नुकसानी के आंकलन का समय है, लेकिन नजरी आंकलन के बाद सर्वे का काम जल्दी ही शुरू होने वाला है। अधिकारियों की मानें तो किसानों के कहने पर यह काम फसल के सूखने के बाद किया जाना है, ताकि नुकसान सही दिख सके। जिले में 11 फरवरी को करीब 73 ग्रामों और 13 फरवरी को लटेरी के २ ग्रामों में ओलावृष्टि से फसल प्रभावित हुई है।

 

सबसे ज्यादा नुकसान झिरनियां, रोड़ा में हुआ है, जबकि उससे थोड़ा कम करैया और सतपाड़ा में नुकसानी नजर आती है। प्रशासन की मानें तो नजरी आंकलन में शेष 71 ग्रामों में से कहीं भी 20 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान नहीं है। फिर भी किसानों के कहने पर सर्वे का काम फसल सूखने के बाद किए जाने की तैयारी है। विदिशा तहसीलदार राजीव कहार मानते हैं कि तहसील के चार गांव छोड़कर शेष में नुकसान कम है। यहां 15 फरवरी से सर्वे शुरू होगा।

कुरवाई एसडीएम संदीप अष्ठाना कहते हैं कि नजरी आंकलन में 15-20 प्रतिशत नुकसान है, लेकिन किसानों के कहने पर फसल सूखने पर सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे टीम बना दी गई हैं। गुलाबगंज नायब तहसीलदार धीरेन्द्र गुप्ता की मानें तो सर्वे का काम 15-16 फरवरी के बाद करेंगे। यहां किसानों ने कहा है कि ओलों का असर 3-4 दिन में फसल सूखने के बाद दिखेगा। नटेरन एसडीएम मकसूद अहमद का कहना है कि तहसील के पांच ग्रामों में ओलों का असर है, इसमें से एक में १५ प्रतिशत तक जबकि शेष में १० प्रतिशत तक नुकसान है।

सर्वे सूची गांव में पढ़कर सुनाएं

ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के सर्वे हेतु कलेक्टर अनिल सुचारी ने दल गठित किए है। उन्होंने प्रभावित कृषकों के सर्वे के बाद ग्राम में सूची पढ़कर सुनाई जाए और फिर उसे पंचायत भवन के सूचना पटल पर चस्पा भी करें। अपर कलेक्टर एचपी वर्मा ने सर्वेक्षण दल में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों को कहा है कि ग्राम में सर्वे के समय एवं ग्रामवासियों को सूचीवाचन के समय पंचनामा बनाया जाए। साथ ही ग्राम में कुल कितना रकवा प्रभावित हुआ है एवं फसल क्षति का प्रतिशत कितना है कि जानकारी संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार तीन दिवस में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें।

कहां कितने ग्रामों में ओलों की मार

विदिशा के प्रभावित गांव
झिरनिया, रोड़ा में सर्वाधित नुकसान हुआ है। जबकि करैया, सतपाड़ा, भी ज्यादा प्रभावित हुए हैं। शेष जाफरखेड़ी, टोरी, टिगरा, छीरखेड़ा, जम्बार, बागरी, इमलिया, नागपिपरिया, बामनखेड़ा, हिरनोदा, पैरवारा, जमाल्दी और खैरूआहाट ।
गंजबासौदा के प्रभावित गांव
ग्राम ककरावदा, देरखी, सनावल, परसौरा, पबई, मडिय़ा सेमरा, फरीदपुर, माधौपुर कलां, मढिय़ा दाखनि, सेमरा, बालरा कलां, बालरा खुर्द।
गुलाबगंज के प्रभावित गांव
ग्राम अंडियाकलां, संतापुर, ऐरन, उत्तमाखेड़ी, चित्रायन, दीघोरा, करैया, करारिया चौबीसा, रकौली, बर्रीघाट, खजूरीबर्री और मानपुर।

कुरवाई के प्रभावित गांव
ग्राम सिरावली, जौनाखेड़ी, बोथीघाट, बंडोरा, भटौली, लचायरा, पाड़ौछा, कछैआ, जलहा, घोंसुआ चक्क ।
पठारी के प्रभावित गांव
श्यामपुर, गुदावल, सहरवासा, पदेरा, जरतौली।

नटेरन के प्रभावित गांव
ग्राम आमखेड़ा कालू, पमारिया, सतीशी, मरखेड़ा और रिनियां में ओले गिरे थे।
शमशाबाद के प्रभावित गांव
बरखेड़ाजागीर, मोतीपुर, बरखेड़ा माखू, बींझ, साढ़ेर, बाड़ेर, कोलुआ, जटपुरा।
लटेरी के प्रभावित गांव
दनवास और हिनौतिया में 13 फरवरी को ओले गिरे हैं।

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