केसीसी की तर्ज पर मवेशी पालने के लिए मिलेगा पशु पालक कार्ड

तीन लाख तक की लिमिट, दो मवेशियों के दाना-चारा के लिए 18 हजार मिलेंगे

By: govind saxena

Published: 01 Jul 2020, 09:53 PM IST

विदिशा. गांव और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही जैविक खेती को भी बढ़ावा देने के लिए अब पशु पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिस तरह अब तक किसानों को खेती के लिए केसीसी जारी होते थे, उसी तर्ज पर पशु पालकों को पशुओं के खान-पान और उनके दाना-चारा के लिए पशु पालक कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने बैंकर्स को भी ताकीद किया है।


जिले में पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए अभियान चलाकर पशु वालकों को केसीसी कार्ड देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा जिनकी लिमिट तीन लाख तक की होगी। इसी तरह ऐसे पशु पालकों को पशु पालक कार्ड जारी किया जाएगा जिनके पास जमीन नहीं हैं, खेती नहीं है, लेकिन उन्होंने मवेशी पाल रखे हैं। ऐसे पशु पालकों को दो दुधारू मवेशियों के लिए 18 हजार रूपए तक प्रदान किए जाएंगे। यह राशि नए मवेशी खरीदने के लिए नहीं बल्कि अपने मवेशियों की अच्छी खुराक के लिए दिए जाएंगे, जिससे वे मवेशियों को अच्छा दाना-चारा खिला सकें ताकि उनसे दूध का उत्पादन भी अच्छा हो सके। पशु पालक के पास जितने मवेशी होंगे, उनके भरण पोषण के लिए यह राशि प्रति मवेशी के मान से दी जाएगी। इस पशु पालक कार्ड की लिमिट भी तीन लाख रूपए तक की होगी। पशु पालन विभाग ने ऐसे पशु पालकों के कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रवासियों और महिलाओं को जोड़ेंगे पशु पालन से
दुग्ध उत्पादन में अभी विदिशा जिला काफी पिछड़ा है। यहां अच्छी नस्ल के मवेशियों की भी कमी है। लेकिन अब आत्मनिर्भरता के प्रयास तेज हो गए हैं। जिला पंचायत के माध्यम से इस बात की कोशिश की जा रही है कि स्व सहायता समूहों की तरह महिलाओं को जोडकऱ उनके समूह बनाए जाएं जो डेयरी उद्योग का काम कर सकें। इसके लिए 300-350 महिलाओं की एक समिति बनेगी जो दुधारू पशुओं को पालेगी औरे उनका दूध समितियों को बेचा जाएगा। इस प्रक्रिया में लॉक डाउन के दौरान बाहरी राज्यों और जिलों से आए श्रमिकों को भी जोडऩे की तैयारी है, ताकि वे इसी जिले में रहकर अपना व्यवसाय कर सकें और खुद काम करके आत्मनिर्भर हो सकें।

बैंको की हर शाखा को तीन-तीन केस का लक्ष्य
कृषि प्रधान जिला होने के कारण विदिशा में पशु पालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में काम की काफी गुंजाइश है। लेकिन डेयरी उद्योग अथवा पशु पालने के लिए ऋण मिलना बैंकों से बहुत कठिन है। डेयरी उद्योग के नाम से ही बैंकर्स अपने हाथ सिकोड़ लेते हैं। ऐसे में यह काम अंजाम तक नहीं पहुंच पा रहा है। कलेक्टर डॉ पंकज जैन ने हाल ही में बैंकर्स की बैठक लेकर डेयरी उद्योग के लिए उन्हें ऋण प्रक्रिया आसान बनाने की हिदायत दी है। कलेक्टर डॉ जैन ने बैंकर्स को डेयरी उद्योग के लिए बैंक की हर शाखा को तीन-तीन केस का लक्ष्य दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि लोन देने के लिए बैंक डेयरी उद्योग पर फोकस करें।

अभी जिले में करीब ढाई लाख मवेशी
पशु पालन विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में अभी करीब ढाई लाख मवेशी हैं। इनमें से 1 लाख 65 हजार के करीब गो वंश तथा 80 हजार के करीब भैंसें शामिल हैं। हालांकि इनमें दुधारू मवेशियों की संख्या कम ही है। जो पशु हैं भी उनमें से अधिकांश कमजोर और देशी सामान्य नस्लों के होने के कारण दुग्ध उत्पादन में ज्यादा उपयोगी नहीं है। अधिक दुग्ध उत्पादन वाले मवेशियों की संख्या जिले में बहुत कम है।


पशु पालकों को भी अब किसान के्रडिट कार्ड की तरह पशु पालक कार्ड दिए जा रहे हैं। इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है। मवेशियों के खान-पान के लिए तीन लाख रूपए तक की लिमिट का कार्ड बनेगा। दो मवेशियों के लिए 18 हजार रूपए तक मिल सकेंगे।
-डॉ एससी वर्मा, उपसंचालक पशु


महिलाओं और प्रवासियों को आत्म निर्भर बनाने के लिए उन्हें डेयरी उद्योग से जोड़ा जा रहा है। स्व सहायता समूह की तरह महिलाओं के समूह बनाकर डेयरी उद्योग स्थापित कराएंगे, जिनसे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। बैंकर्स को भी कलेक्टर ने डेयरी उद्योग पर फोकस करने को कहा है।
-डॉ पीके मिश्रा, परियोजना अधिकारी जिला पंचायत

जिले में अगर जैविक खेती को बढ़ावा देना है तो पशु पालन को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। जैविक खेती और पशु पालन दोनों एक दूसरे पर निर्भर हैं। खेती से मवेशियों को चारे का इंतजाम आसानी से होगा, वहीं जैविक खेती के लिए जरूरी कंपोस्ट खाद के लिए गोबर मवेशियों से ही मिल सकता है। पशु पालन को बढ़ावा देने के प्रयास हो रहे हैं तो अच्छे संकेत हैं। लेकिन इन योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाना जरूरी है।
-संजय राठी, प्रगतिशील कृषक भैंरोखेड़ी

govind saxena Bureau Incharge
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