अपने पूर्वजों द्वारा निभाए किरदारों की विरासत आगे बढ़ा रहे कलाकार

ऐतिहासिक रामलीला का 119 वां वर्ष

विदिशा. नगर की ऐतिहासिक रामलीला ऐसी ही है। यहां कोई भी कलाकार प्रोफेशनल नहीं है, बल्कि नगर के कुछ प्रतिष्ठित और रामलीला में समर्पित परिवारों के सदस्य ही पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों के किरदारों की विरासत हो आगे बढ़ा रहे हैं। बुधवार को नारद मोह और गुरूवार को होने वाली राजा प्रतापभानु की लीला के मुख्य किरदार ऐसे ही कलाकारों द्वारा निभाए जा रहे हैं।


बुधवार को नारद मोह की लीला का दर्शन हुआ। इसमें नारद की मुख्य भूमिका एसएटीआई में पदस्थ रवि चतुर्वेदी ने निभाई। माया में जकड़े नारद के किरदार को उन्होंने बड़ी चपलता से निभाया। यूं भी पूरे 27 दिन चलने वाली इस रामलीला में रवि चतुर्वेदी नारद का वेष धारण कर हाथ में वीणा और खरताल लेकर दर्शकों के बीच जब निकलते हैं तो दर्शकों का आनंद दोगुना हो जाता है। लोग उनके चरण स्पर्श करते हैं और उनके साथ सेल्फी लेने का मौका नहीं छोड़ते। रवि बताते हैं कि पहले नारद का अभिनय उनके पिता जगन्नाथ चतुर्वेदी निभाते थे, लेकिन उनके बाद से यह अभिनय मैं कर रहा हूं।

पहले छुट्टू मम्मा और अब मनोज बनते हैं राजा प्रतापभानु
गुरूवार को राजा प्रतापभानु द्वारा वन में शिकार के लिए निकलना, कपट मुनि से उनकी मुलाकात और फिर प्रतापभानु को राक्षस बनने का श्राप मिलने के साथ ही मनु की तपस्या और उन्हें वरदान की लीला प्रदर्शित की जाएगी। इस लीला में राजा प्रतापभानु का मुख्य किरदार भी पहले छुट्टूलाल शर्मा निभाते थे, जिन्हें छुट्टू मम्मा कहा जाता था। उनके बाद से यह भूमिका उन्हीं के पुत्र मनोज शर्मा निभाते हैं। मनोज मूलत: शिक्षक हैं, लेकिन रामलीला में पूरी तरह समर्पित रहते हैं और वे लीला दर्शन मंत्री के रूप में रामलीला परिसर में रोजाना सक्रिय दिखाई देते हैं।

एक माह तक माता-पिता के पैर भी नहीं छू सकते मुख्य पात्र
श्री रामलीला समिति के सह संचालक डॉ सुधांशु मिश्र बताते हैं कि रामलीला की मर्यादा ही ऐसी है कि इसमें मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले पात्रों को भी नियम कायदों का पालन करना होता है। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता का अभिनय करने वाले पांचों पात्र एक माह के लिए भगवान के स्वरूप ही माने जाते हैें, ऐसे में वे अपने माता-पिता या अन्य किसी रिश्तेदार के चरण स्पर्श नहीं कर सकते। उल्टे उनके चरणों का स्पर्श इस एक माह में पात्रों के माता-पिता तथा अन्य लोग कर सकते हैं।

गंगा दर्शन को पहुंचे भगवान
परम्परा अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को गंगा दर्शन कराने बेतवा तट स्थित चरणतीर्थ लाया जाता है। बुधवार को भी तीनों स्वरूपों को पालकी में विराजित कर रामलीला परिसर से चरणतीर्थ मंदिरों के पास घाट पर लाया गया। यहां भगवान ने गंगा दर्शन किया। भगवान की आरती भी श्रद्धालुओं ने उतारी और फिर वे गाजे बाजे के साथ वापस रामलीला परिसर आए।

govind saxena
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