पत्रिका साक्षात्कार...बासौदा सीट जटिल थी, सीएम ने भरोसा किया और ईश्वर ने लाज रखी- जादौन

भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. राकेश जादौन ने चतुराई से दिए सवालों के जवाब-

By: govind saxena

Published: 20 Sep 2021, 10:55 PM IST

विदिशा. गंजबासौदा से करीब चार साल पहले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले जिला भाजपा की बागडोर संभालने वाले राकेश सिंह जादौन को खुद पता नहीं था कि उन्हें यह दायित्व मिलने वाला है। लेकिन जिले में बासौदा सीट पर भाजपा की डांवाडोल स्थिति को देखते हुए बासौदा के ही इस अपेक्षाकृत कम उम्र के नेता को जिम्मेदारी सौंपी गई। पत्रिका से साक्षात्कार में भाजपा जिलाध्यक्ष ने बड़ी चतुराई से सवालों के जवाब दिए। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में सबसे ज्यादा जटिल सीट बासौदा की थी, लेकिन सीएम ने भरोसा किया और कार्यकर्ताओं की मेहनत से ईश्वर ने मेरी लाज रखी, हम बासौदा विधानसभा जीते। प्रस्तुत हैं डॉ. जादौन से साक्षात्कार के कुछ अंश-


सवाल- बचपन कैसा बीता और सियासत में कैसे आए?
जवाब- शुरू से ही गंजबासौदा के पाठशाला परिसर में रहते थे। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सब बासौदा में ही हुई। पूरी मित्रता का घेरा भी बासौदा में ही फैला था। बचपन से ही पाठशाला परिसर में आरएसएस की शाखा लगते देखी थी, उसमें ही बाल स्वयंसेवक से सफर शुरू हुआ, जीवन भी संघ में ही
खत्म होगा।

सवाल-सक्रिय राजनीति में कब-कैसे आना हुआï?
जवाब- पहले अभाविप और विहिप में रहा। रामजन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहा। इसके बाद 1990 में जब शिवराज सिंह चौहान पहली बार सांसद का चुनाव लडऩे विदिशा आए तब उनके साथ सक्रिय राजनीति में काम करने का मौका मिला। इसके बाद युवा मोर्चा सहित संगठन के अनेक पदों पर दायित्व मिले। इससे पहले जिला भाजपा में किसी पद पर नहीं रहा, लेकिन संगठन ने जिलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है, जिसे निभा रहा हूं।

सवाल- अचानक बासौदा से आपको जिलाध्यक्ष चुना गया? कैसे संभव हुआ?
जवाब- दरअसल विधानसभा चुनाव होने को थे। भाजपा के पास तीन विधानसभा सीटें थीं, बासौदा और सिरोंज कांग्रेस के पास थी। आने वाले चुनाव में सिरोंज नाजुक नहीं थी, लेकिन बासौदा की स्थिति नाजुक थी। सर्वे में बासौदा को जटिल बताया गया था। सीएम भी चिंतित थे, मेराी गृह विधानसभा के नाते मुझे दायित्व सौंपा गया। मैं पद स्वीकार करने की स्थिति में नहीं था, लेकिन संगठन के निर्णय को स्वीकार किया। लीना जैन का टिकट होने के बाद भी सर्वे में भाजपा की स्थिति कमजोर बताई जा रही थी, सीएम ने कहा था-बासौदा हार रहे हैं, कैसे संभालोगे? इस पर हमने पूरी ताकत झौंकी, रणनीति बनाई, सीएम के भरोसे, कार्यकर्ताओं की मेहनत और ईश्वर कृपा से हम जीत गए। लेकिन दुख इस बात का है कि किन्हीं कारणों से विदिशा की अपनी परंपरागत सीट हार गए।

सवाल- जिले में कई बड़े नेता हैं, उनको निर्देशित करने में परेशानी नहीं आई?
जवाब- शुरुआत में दिक्कत आती थी। लेकिन मैंने बड़ों को कभी निर्देश दिए ही नहीं, कोई भी बात होती है, तो उनको बताता हूं और उनसे आग्रह कर लेता हूं। सभी सहयोग करते हैं। उम्र में कई लोगों से छोटा हूं, लेकिन संगठन की गाइडलाइन को समझते हुए सब सहयोग करते हैं।

सवाल-भाजपा के कई नेताओं में जमकर मारामारी है। एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते?
जवाब- हां, कुछ लोगों में तल्खियां हैं। परिवार बड़ा होता है तो ऐसी नौबत भी कभी कभी बनती है। लेकिन जब परिवार की बात आती है तो सब साथ होते हैं। जहां तक मैं समझ पाया हूं इन तल्खियों का मुख्य कारण संवाद हीनता है। मन में शंका या भड़ास हो तो आपसी चर्चा से ही हल निकलता है। हल निकलेगा। जल्दी ही ये तल्खियां भी मिट जाएंगी।

सवाल-कुछ विधायकों से आपकी भी दूरियां हैं? बात तक नहीं होती?ï
जवाब- नहीं बिल्कुल नहीं, विधायकों से दूरी का सवाल ही नहीं उठता। किसी से न दूरी है और न तल्खी। उन्हेें जरूरत होती है तो वे तत्काल बात करते हैं, मैं भी बात करता हूं। ये मनगढंत बातें हैं।

सवाल- कई नेताओं, विधायकों के कारण पार्टी की छबि खराब हुई है। आपने कितनों पर अनुशासन हीनता की कार्रवाई की?
जवाब- मुझे किसी ने इस संबंध में शिकायत नहीं की। चार साल में अनुशासनहीनता की कोई कार्रवाई करने की नौबत नहीं आई। जहां लगा, वहां समझाइश दी गई तो संबंधितों ने अपनी गलती मानकर सुधार किया है।
सवाल- लगातार कार्यक्रमों-अभियानों से भाजपा कार्यकर्ता त्रस्त हो गए हैं?
्रजवाब- भाजपा कार्यकर्ता संगठन के हर आव्हान पर 24 घंटे तैयार रहते हैं। यह सही है कि कई बार बहुत ज्यादा कार्यक्रमों और अभियानों के कारण वे अपने घर परिवार को भी समय नहीं दे पाते, थकान भी हो जाती है, लेकिन वे राष्ट्र हित पहले मानते हुए जुटे रहते हैं पूरी शिद्दत से। यही भाजपा कार्यकर्ताओं की खासियत है।

सवाल- कोई ख्वाइश, अगला चुनाव लडऩा चाहेंगेï?
जवाब- कोई ख्वाइश नहीं, भाजपा ने जिले का सर्वोच्च पद दिया है। इसकी भी न तो ख्वाइश थी और न उम्मीद। एक शिक्षक के बेटे को इतना बड़ा दायित्व दिया है ये क्या कम है? फिर पार्टी जिस मोर्चे पर तैनात करेगी उस पर पूरी शिद्दत से काम करेंगे। पहली प्राथमिकता तो अगले चुनाव में जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा को जिताना है।

govind saxena Bureau Incharge
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