मंडी अध्यक्ष, सुनो.. इस बार मंडी चुनाव में धज्जियां उड़ा देंगेे किसान

धान के कम रेट पर बवाल, नीलामी बंद कर व्यापारी भागे, किसानों ने किया चक्काजाम

By: दीपेश तिवारी

Published: 11 Dec 2017, 05:55 PM IST

विदिशा। नई मंडी परिसर में सोमवार से जब धान खरीदी शुरू हुई तो कुछ ही देर में धान के कम दाम लगाने पर व्यापारी और किसान उलझ पड़े। व्यापारी नीलामी बंद कर चले गए, गुस्साए किसानों ने चक्काजाम कर दिया। अधिकारियों की समझाइश के बाद बमुश्किल किसानों ने चक्काजाम खत्म किया। इस दौरान किसानों ने जोर से चिल्लाकर चेतावनी दी कि मंडी अध्यक्ष कहां हो, सुन लो,तुम किसानों के नहीं व्यापारियों के अध्यक्ष हो। मंडी चुनाव भी आने वाले हैं, धज्जियां उड़ा देंगे किसान।

मंडी में सोमवार को धान की भारी आवक थी। पहली बार नई मंडी में नीलामी का फैसला हुआ था, नीलामी शुरू भी हो गईथी। लेकिन दोपहर करीब १२ बजे धान के दामों पर किसानों और व्यापारियों का विवाद हो गया। व्यापारी नीलामी बंद कर चले गए। इससे नाराज किसानों ने हंगामा कर दिया।

दोपहर बाद उन्होंने अपने ट्रेक्टर-ट्रालियों को नेशनल हाईवे पर लगाया और खुद सड़क पर बैठकर नारे लगाने लगे। दोनों ओर से वाहनों की कतारें लगना शुरू हो गईं। तहसीलदार मौके पर पहुंचे और किसानों को बहुत समझाया, लेकिन किसान व्यापारियों को बुलाने की जिद पर अड़े रहे। तहसीलदार और मंडी सचिव व्यापारियों को फोन लगाते रहे, लेकिन व्यापारियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए थे। बाद में सीएसपी भारतभूषण शर्मा ने व्यापारियों को बुलवाने के भरोसे और किसानों को समझाइश देकर जाम खत्म कराया।

एक ही माल के तीन सौ रुपए कम कैसे...

खमतला के किसान धनवीर सिंह राजपूत ने बताया कि उसकी 60 बोरा धान की कीमत 2600 रूपए लगाई गई थी, दाम कम लगने से उसने बोली कैंसिंल करा ली। एक घंटे बाद जब फिर नीलामी हुई तो व्यापारियों ने उसके दाम तीन सौ रूपए कर 2300 रूपए लगाए। ये किसानों के साथ व्यापारियों की ज्यादती है। किसानों ने आरोप लगाया कि सुबह 3100 रुपए तक धान बिकी और कुछ ही देर में व्यापारियों ने उसके दाम 1500 रूपए तक गिरा दिए। व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।

अध्यक्ष जहां भी हो, सुन लो...

तहसीलदार राजीव कहार किसी तरह कुछ किसानों को चक्काजाम से उठाकर मंडी परिसर में व्यापारियों से बात करेंगे, यह कहकर ले गए। लेकिन वहां व्यापारी थे ही नहीं। इस दौरान सीएसपी भी आ गए। किसानों ने खूब भड़ास निकाली। किसान बोले-हमें शर्म आने लगी साहब, जब व्यापारी तुम्हारी नहीं सुनते तो किसान की क्या सुनेंगे।

उन्होंने यहां तक कह दिया कि- मंडी अध्यक्ष कहां हैं? किसानों की सुनने वाला कोई नहीं। अध्यक्ष जहां भी हो, सुन लो, तुम व्यापारियों के अध्यक्ष हो, किसानों के नहीं। कुछ ही दिनों में चुनाव आने वाले हैं, देखना कैसे धज्जियां उड़ाएंगे किसान। तब दूसरे किसानों ने कहा कि मंडी अध्यक्ष यहां नहीं हैं, ये लोग तो अधिकारी हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि इतने व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन हैं, लेकिन मात्र तीन व्यापारी नीलामी में भाग लेते हैं। मंडी कमेटी नीलामी में न आने वाले व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन रद्द क्यों नहीं करती।

दीपेश तिवारी
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