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देह व्यापार की कोठरी में ज्ञान की रोशनी से आता बदलाव

बेडिय़ा समाज की महिलाएं बोलीं- अपने जैसी बर्बाद नहीं होने देंगे बेटियों की जिंदगी

विदिशा

Published: November 19, 2021 01:06:53 pm

विदिशा. समाज की मुख्य धारा से कटे बेडिय़ा समाज में बदलाव की बयार आ रही है। शिक्षा की रोशनी अब समाज के अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर रही है। पीढिय़ों केे नृत् और देह व्यापार के बजाय दुलई गांव की गई बेटियां अब दूृसरे गांव में आठवीं, दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई के लिए जाने लगी हैं। यह संभव हो पा रहा है, वहां की महिलाओं की इच्छाशक्ति के कारण। दरअसल, देह व्यापार में फंसी महिलाओं ने ठान लिया है कि वे अपनी बेटियों को पढ़ाएंगी, उनकी जिंदगी बर्बाद नहीं होने देंगी।
देह व्यापार की कोठरी में ज्ञान की रोशनी से आता बदलाव
देह व्यापार की कोठरी में ज्ञान की रोशनी से आता बदलाव

जिला मुख्यालय से मात्र 25 किमी दूर दुलई गांव करीब पांच दशक से बदनामी का दाग लिए जिले के नक्शे पर दर्ज है। यह गांव बेडिय़ा समाज की करीब 300 लोगों की आबादी सहित करीब 500 लोगों का है। लेकिन यहां के अधिकांश घरों की बेटियां वर्र्षों से नृत्य और देह व्यापार के जरिए ही अपने घर-परिवार का पोषण करती आ रही हैं। छोटे से गांव में अब पक्के और अच्छे भवन, गाडिय़ां और तमाम सुविधाएं लोगों के पास हैं, लेकिन वह सब इस गांव की बेटियों की ही कमाई है, जो उन्होंने अनैतिक धंधे के दलदल में धंसकर अर्जित की है। लेकिन अब इनमें से कई परिवारों को समझ आ रहा है कि नई पीढ़ी की बेटियों को इससे बचाया जाए। अब गांव की बेटियां इस धंधे में उतारने की बजाय उनका विवाह कर ससम्मान विदाई की जा रही है। गांव में कई बेटियां हैं जो अब स्कूल जा रही हैं और कई मांए खुद इस बात का झंडा उठाए हैं कि अब बेटियों को कॉलेज भेजकर उनकी नौकरी और आत्मनिर्भरता की राह आसान करेंगी। काफी बदला है, लेकिन फिर भी अभी दुलई में काफी बदलाव होना बाकी है।
अब मेरी सम्मान की जिन्दगी- पूजा
गांव की सरपंच पूजा को जब जनप्रतिनिधि के रूप में मान-सम्मान मिला तो उनके मन में गंदगी को छोडऩे का विश्वास पैदा हुआ। वे कहती हैं कि अब समाज के लिए काम करने की दिशा मिली है। गांव की बेटियां भी पढऩे जाने लगी हैं, शादियां भी होने लगी हैं। हालांकि मुझे इसका पछतावा है कि समय पर सही निर्णय लेती तो आज और बेहतर होता।
पहले पढ़ाई, फिर शादी की बात
वर्षो से नृत्य के पेशे में उम्र गुजारने वालीं संगीता की बेटी पढऩे में बहुत होनहार है, वह देवखजूरी के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में 12 वीं कक्षा की छात्रा है। उसकी प्रतिभा से शिक्षक भी मुरीद हैं। दसवीं बोर्ड में उसने 91 प्रतिशत अंक अर्जित किए थे। अब वह 12 वीं के बाद कॉलेज पढऩे जाने का सपना संजोए है। संगीता कहती हैं कि शादी की बात चल रही है, लेकिन हमने साफ कह दिया है कि पहले बेटी की पढ़ाई पूरी होगी, इसके बाद ही शादी होगी। हर हाल में बेटी की शिक्षा पूरी कर उसे आत्मनिर्भर बनाना है। मैंने अपनी जिंदगी इस दलदल में गुजार दी, अब बेटी को इस गंदगी में नहीं जाने दंूगी। उसकी जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूंगी। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी पढ़ लिखकर कोई नौकरी करे।
पढ़ाई के लिए घर से भी लड़ लूंगी
देवखजूरी के शासकीय हायरसेकंडरी स्कूल में ग्यारहवीं की छात्रा का आत्मविश्वास भी गजब का है। वह कहती है कि परिवार में किसी तरह का दबाव नहीं है। मैंने तय किया है कि पढ़ाई तो पूरी करूंगी। 12 वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी करूंगी। इसमें कोई बाधा आई तो घर के लोगों से भी लड़ लूंगी, लेकिन पढकऱ एक अच्छे प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना तो जरूर पूरा करूंगी।
आत्मनिर्भरता के लिए गांव में यह चाहती हैं सरपंच
सरपंच पूजा कहती हैं कि गांव और इस समाज की बेटियों को अगर इस व्यवसाय से बचाना है, उन्हें पढ़ा लिखाकर आत्मनिर्भर बनाना है तो प्रशासन का सहयोग भी अपेक्षित है। गांव में स्व सहायता समूहों के जरिए बेटियोंं और महिलाओं को काम दिया जाए जिससे वे घर पर ही सम्मानपूर्वक काम कर कुछ आमदनी प्राप्त कर सकें। इनके द्वारा बनाए सामान की अगर प्रशासन के जरिए ही बिक्री कराई जाए तो और सुविधा हो सकती है। चाक बनाना, अगरबत्ती बनाना, टाटफट्टी बनाना, सिलाई करना और दोने पत्तल आदि बनाने का काम भी किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए प्रशासन की मदद बहुत जरूरी है। इसके साथ ही गांव में प्राथमिक शाला है, मिडिल तक स्कूल होना भी आवश्यक है।
वर्जन...
दुलई में बेडिय़ा समाज के उत्थान के लिए प्रशासन से बात कर पहले गांव में एक शिविर लगवाएंगे और फिर सबसे चर्चा कर वहां स्व सहायता समूह गठित कर बेटियों और महिलाओं को रोजगार से जोडऩे की पहल होगी। उन्हें मुख्य धारा में जोडऩे का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
-राजश्री सिंह, विधायक शमशाबाद

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