शहर की बेटी की पहली मूवी दि विंडो 17 नवंबर को होगी रिलीज

प्रोड्यूशर बनी शहर की बेटी, क्राइम पेट्रोल, शनिदेव सहित कई सीरियल में कर चुकी हैं काम

By: दीपेश तिवारी

Published: 12 Nov 2017, 08:32 PM IST

विदिशा। जी हां, 17 नवंबर को रिलीज होने वाली दि विंडो मूवी की प्रोड्यूशर शहर बेटी नूपुर श्रीवास्तव करीब छह साल पूर्व मुंबई की फिल्मी दुनिया में भाग्य आजमाने गई। शहर की बेटी ने कई सीरियल में काम करने के बाद स्वयं की कंपनी माइलस्टोन क्रिएशन बनाई और पहली मूवी ,दि विंडो, तैयार की, जो 17 नवम्बर को रिलीज होगी। जिसे देशभर के सिनेमाघरों में देखा जा सकेगा।

 

पत्रिका से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे अपनी अगली मूवी में शहरवासियों को किरदार निभाने का मौका देंगीं। शहर की बक्सरिया हाल मुकाम बिट्ठलनगर निवासी नूपुर श्रीवास्तव रविवार को शहर में आईं और डिवाइन होटल में पत्रिका से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे छह वर्ष पूर्व एक्टिंग और इंटीनियर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद मुंबई में एक्टिंग की दुनिया में भविष्य बनाने पहुंचीं, जहां उन्हें कदम-कदम पर सफलता मिली और उन्होंने क्राइम पेट्रोल, चंद्रगुप्त मौर्य, शनिदेव और माता की चोटी जैसे कई सीरियल में काम किया।

 

इसके बाद उनका मन एक्टिंग की दुनिया से भर गया और कुछ नया करने की चाहत में उन्होंने स्वयं की प्रोडक्शन कंपनी बनाई और पहली मूवी ,दि विंडो, तैयार की। जिसमें एक लेखक के जीवन में आने वाली परेशानियों की ओर ध्यान आकृषित किया गया है। उनकी यह मूवी 1 घंटा ५० मिनिट की है, जिसे 17 नवम्बर को रिलीज होने के बाद देशभर के लोग परदे पर देख सकेंगे।

शहरवासियों को भी मिलेगा मौका

श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी अगली मूवी थैलेसिमिया से पीडि़त मरीजों को ब्लड डोनेट करने के लिए लोगों को प्रेरित करने संबंधित रहेगी। जिसमें किरदार निभाने के लिए वे अपने शहरवासियों को भी मौका देंगी। परिवार से नहीं कोई गया परदे की दुनिया में नूपुर ने बताया कि उनके परिवार में किसी का भी फिल्मी दुनिया या परदे का कोई बेग्राउंड नहीं है। उनके पिता नरेंद्र श्रीवास्तव सरकारी स्कूल में शिक्षक और और मां सुमन श्रीवास्तव हाउसवाइफ हैं। वहीं उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और छोटा भाई उनके ही साथ मुंबई में रहकर पढ़ाई कर रहा है। उन्हें बचपन से ही फिल्मी दुनिया में काम करने का शौक था। जिसके चलते उन्होंने इस क्षेत्र को चुना और अपना भविष्य बनाने के बारे में सोचा और आज वे एक मुकाम पर हैं। जिसमें उनके माता-पिता और परिजनों का पूरा सहयोग रहा।

दीपेश तिवारी
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