scriptConspiracy to destroy Betwa in crores of rupees | करोड़ों के गोरखधंधे में बेतवा को बर्बाद करने की साजिश | Patrika News

करोड़ों के गोरखधंधे में बेतवा को बर्बाद करने की साजिश

बेतवा तट के 5 KM का LIVE ...

विदिशा

Published: May 14, 2022 05:02:34 pm

विदिशा. खेती, ईंटों के करोड़ों रुपए के गोरखधंधे में बेतवा को बर्बाद करने की साजिश परवान चढ़ी हुई है। बेतवा के किनारे से पेड़ों को खत्म कर खेतों में तब्दील किया जा रहा है। हलाली से नगर के पेयजल के लिए आए पानी से ईंट भट्टों का कारोबार चल रहा है। ईंट भट्टों के लिए पेड़ों को काटकर 10-12 फीट की गहरी खंतियों में तब्दील कर दिया गया है। कई जगह नरवाई के साथ ही पेड़ों में भी आग लगा दी गई है। नदी किनारे खत्म कर वहां खेती के लालच में पेड़ों को आरे से काट दिया गया है। जहां आम आदमी का पहुंचना भी संभव नहीं, वहां ट्रेक्टर ट्रालियों के लिए रास्ते बनाकर कटे पेड़ों की लकडिय़ां ढोई जा रही हैं, सदियों पुराने किनारों की जुताई कर उन्हें खेती के लिए तैयार किया जा रहा है। बेतवा को बर्बाद करने की साजिश पर प्रशासन मौन है। शहर से ही मात्र 5 किमी के दायरे में जब बेतवा के किनारे-किनारे घूमकर गौर करते हैं तो पता चलता है कि नदी का कटाव आने वाले शहरों में तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि यहां हर कदम पर नदी को खत्म करने का गोरखधंधा चल रहा है।
करोड़ों के गोरखधंधे में बेतवा को बर्बाद करने की साजिश
ईंट भट्टों ने 12 फीट गहरे खोद डाले नदी तट
ताजे कटे हुए पेड़ों के ठूंठ और खेत बनाने की तैयारी
रंगई के पास मुखर्जी उद्यान के पीछे से खेतों में होते हुए बेतवा किनारे पर पहुंची पत्रिका टीम जब नदी तट से होते हुए आगे बढऩे लगी तो पहुंचविहीन मार्ग पर भी ट्रेक्टर ट्रालियों की पहुंच के निशान मिले और यहां जगह-जगह पेड़ों को काटकर खत्म करने का दृश्य सामने आया। अधिकांश लकड़ी दो दिन पहले ढोई जा चुकी है। अब यहां बचे हैं ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ, छोटी-छोटी काटी हुई झाडिय़ां और खेती के लिए समतल करने की तैयारी में साफ किया जाता नदी का किनारा।
दूर तक नजर आता है नदी का बढ़ता कटाव
यहां से बंगला घाट की ओर बढ़ते हुए कई जगह नदी किनारे के पेड़ गायब दिखते हैं। पेड़ों और झाडिय़ों को खत्म करने का काम अभी चंद रोज पहले का ही प्रतीत होता है। इसके साथ ही नदी के दूसरे तट पर भी कई जगह पेड़ों के खत्म होने से नदी का बढ़ता कटाव साफ दिखाई देता है। कई जगह पेड़ों के जलने के भी अवशेष साफ दिखते हैं।
पुतली घाट के आगे पुरानी पिचिंग
पुतली घाट पर एक पिलर पर भगवान विष्णु की चारों ओर प्रतिमाएं आज भी मौजदू हैं। यहां हर बार की बाढ़ भी इस प्रतिमा को नहीं डिगा पाई। यहां पत्थरों का प्राकृतिक रूप से जमा होना एक घाट की मानिंद नजर आता है। यहीं से खेतों में होकर आगे बढ़ते समय खेत की पार से लगकर पुराने समय की पत्थरों की पिचिंग और एक स्टॉप डेम जैसी बनावट दिखाई देती है, लेकिन अब बनाने नहीं खत्म करने का काम हो रहा है।
नरवाई के साथ जल रहे पेड़
नरवाई पर प्रतिबंध के बावजूद नदी किनारे तक बढ़ आए खेतों की नरवाई में आग से नरवाई ही नहीं बल्कि नदी किनारे लगे सैंकड़ों पेड़ भी बुरी तरह जलकर खत्म हो गए हैं। पुतली घाट से कालिदास बांध की ओर उदयगिरी की ओर यह दृश्य आम हैं। बड़े बड़े पेेड़ अब आग में जल जाने के कारण राख और कालिख पुते से देर से ही दिखाई देते हैं।
खेतों को बढ़ाने की भूख से खत्म हो रहा नदी तट
बेतवा किनारे खेतों को और ज्यादा बढ़ाने की भूख के कारण नदी तटों को खत्म किया जा रहा है। बेतवा के किनारे दूर तक पेड़ों के काटे जाने के बाद ख्ेातों में तब्दील हो रहे हैं। कहीं पर यह अभी प्रारंभिक तैयारी है तो कहीं पर फसल भी ली जा चुकी है। यह दौर अभी भी जारी है। नदी किनारे मात्र 10 फीट छोडकऱ खेत तैयार किए जा रहे हैं। खेती के जरिए अधिक कमाने का यह लालच नदी को खत्म करने पर उतारू है।
ईंट भट्टों ने 12 फीट गहरे खोद डाले नदी तट
पुतली घाट से कालिदास बांध की ओर सर्वाधिक ईंट भट्टे हैं। भट्टे भी छोटे नहीं, काफी बड़े कारखाने जैसे हैं। यहां नदी को बर्बाद करने का सबसे ज्यादा काम हो रहा है। कदम-कदम पर नदी में डीजल पंप लगे हैं जो बेतवा का ही पानी ईंट बनाने के लिए लेते हैं, बेतवा के किनारों को 10-12 फीट तक खोदकर उसी की मिट्टी उपयोग करते हैं और फिर खुदाई की राह में आने वाले पेड़ों को काटकर भट्टे की आग में झोंक देते हैं। ये ईंट भट्टे नदी के दोनों तटों पर खूब हैं।
ईंट भट्टों पर पहुंचते ही आने लगे फोन
सुनपुरा की ओर पत्रिका टीम और फोटों खींचे देखते ही भट्टों पर काम करने वालों का समूह खड़ा हो जाता है। तेजी से आ रही डीजल पंप को बंद कर दिया जाता है। लेकिन जिस किनारे से हम गुजरे वहां पूरा गोरखधंधा बेखौफ जारी रहता है। हां, बीच में कुछ भट्टों से मजदूरों द्वारा भट्टा मालिकों को पत्रिका टीम की सूचना दे दी जाती है, जिससे भट्टा मालिकों और कुछ नेताओं के फोन घनघनाने लगते हैं। एक भट्टा मालिक नेता कहते हैं-देख लेना, अपना ही काम है। जब उन्हें बताया गया कि किस तरह बेतवा का पानी लेकर, बेतवा के किनारों को ही खंतियों में तब्दील कर, वहां के पेड़ों को काटकर यहां करोड़ों का व्यापार किया जा रहा है तो उनका बेशर्मी सा जवाब आता है कि-गलत क्या है?


यह खतरनाक खेल...
पत्रिका के साथ बेतवा के किनारों का दौरा किया है। जगह-जगह पेड़ों को काटने और खेत बनाने का काम हो रहा है। नदी तटों का खत्म किया जा रहा है, यह खतरनाक खेल है। इससे आने वाले दिनों में बेतवा अपनी राह बदलकर परेशानी पैदा कर सकती है। नरवाई के कारण नदी तट के पेड़ों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। प्रशासन को ध्यान देना होगा।
-अतुल शाह, अध्यक्ष, बेतवा उत्थान समिति

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बेतवा के लिए दुखदाई...
पत्रिका के साथ इस पदयात्रा में देखा है कि नदी किनारे पेड़ों को बड़े स्तर पर काटा जा रहा है। ईंट भट्टों के लिए नदी तटों को 8-10 फीट तक खोद डाला गया है। कई पेड़ों को टापू की तरह छोड़ा गया है जो कभी भी गिर जाएंगे। खेतों को नदी किनारे तक बढ़ाया जा रहा है। यह सब नदी के लिए बहुत दुखदाई है।
-हितेंद्र सिंह रघुवंशी, डायरेक्टर बेतवा उत्थान समिति

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