कोरोना संक्रमित पुत्र को रखा था घर में, पिता की हो गई मौत, बिना सैंपल लिए करा दिया अंतिम संस्कार

लटेरी में प्रशासन की गंभीर लापरवाही, गुस्साए लोगों ने की नारेबाजी

By: govind saxena

Published: 02 Aug 2020, 09:19 PM IST

लटेरी. कोरोना संक्रमण काल में स्वास्थ्य विभाग और अब प्रशासन की भी लापरवाहियां बढ़ती जा रही हैं। लटेरी में पहले से संक्रमित एक युवक को कोविड केयर सेंटर न भेजकर उसके ही घर में रखा हुआ है। वह होम आइसोलेशन में रखा गया, लेकिन दूसरे ही दिन उसके पिता की मौत हो गई। तबियत बिगडऩे पर दो घंटे तक न एंबूलेंस पहुंची और न डॉक्टर आए। ऐसे में कोरोना पॉजिटिव युवक के पिता ने दम तोड़ दिया। गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लापरवाही यहीं नहीं रुकी, एसडीएम तन्मय वर्मा ने बुजुर्ग की मौत कोरोना से न होकर किसी और बीमारी से बता दी, जबकि बुजुर्ग का सैंपल ही नहीं लिया गया था। घर में कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी उनका सैंपल नहीं लिया गया, मौत के बाद भी सैंपल लेना जरूरी नहीं समझा, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए गए 15 लोगों को पीपीई किट में भेजा गया। अब सबको क् वारंटीन करने की बात कही जा रही है।


शनिवार को लटेरी के दो लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संबंधित क्षेत्रों को सील कर दिया गया था। इन पॉजिटिव दो लोगों में लटेरी के किराना व्यापारी तथा किराना व्यापार संघ के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल भी शामिल थे, जिन्हें रिपोर्ट आने के बाद भी कोविड केयर सेंटर भेजने की बजाय होम आइसोलेशन में रखा गया। लेकिन रविवार को ही उनके पिता रमेश चंद्र अग्रवाल की तबियत बिगड़ी और दोपहर में उनकी मौत हो गई। कंटेंनमेंट क्षेत्र में न तो बार-बार कॉल करने के बाद भी एंबूलेंस पहुंच पाई और न ही डॉक्टर पहुंचे। इससे मृतक के परिजनों, समाज और क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी रही। लोगों ने रोहित अग्रवाल को कोविड केयर सेंटर में भेजने की मांग की लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। इससे नाराज लोगों ने जमकर नारेबाजी की। एसडीएम, पुलिस और बीएमओ के खिलाफ नारेबाजी की गई। रोहित के पिता की मौत और हंगामे की खबर मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंंचा, उस समय तक लोगो ंका गुस्सा बढ़ चुका था। उन्होंने अधिकारियों को खूब खरी खोटी सुनाईं। रात करीब 8 बजे मृतक को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इस दौरान करीब 15 लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए, सभी को पीपीई किट पहनाई गई।

नहीं लिया गया मृतक का सैंपल
रोहित अग्रवाल खुद कोरोना पॉजिटिव हैं, वे उसी घर में आइसोलेशन में हैं, जिसमें उनके पिता रहते थे। पिता की मौत हो जाती है, लेकिन उनका सैंपल नहीं लिया जाता। तहसीलदार अजय शर्मा कहते हैं कि परिजन सैंपल के लिए तैयार नहीं हुए। एसडीएम कहते हैं कि मौत किसी और बीमारी से हुई है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और नियम लोगों के कहने से चलेंगे? क्या बिना सैंपल लिए और जांच के ही एसडीएम तय करेंगे कि किसी की मौत कोरोना से हुई है या किसी और बीमारी से। फिर यह भी महत्वपूर्ण बात है कि कोविड केयर सेंटर बनाने के बावजूद क्यों लटेरी के संक्रमितों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है, कें नहीं उन्हें कोविड केयर सेंटर में उपचार मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

अधिकारियों का बचकाना जवाब...
एसडीएम तन्मय वर्मा ने इस बारे में कहा कि रोहित अग्रवाल के पिता की मौत किसी अन्य बीमारी के चलते हुई है, एंबूलेंस न आने के कारण परिजनों में गुस्सा था। लटेरी की एंबूलेंस शमशाबाद गई थी, इसलिए उसे पहुंचने में देरी हो गई। यही कारण रहा होगा।


फोन लगाते रहे किसी ने नहीं की मदद
मृतक के परिजन रूपेश अग्रवाल का आरोप है कि सुबह 11 बजे से लटेरी बीएमओ डॉ नरेश बघेल और एसडीएम तन्मय वर्मा को फोन लगा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने किसी तरह की मदद उपलब्ध नहीं कराई। कोविड मरीज के पिता की मौत का जिम्मेदार लटेरी प्रशासन है।


कोरोना पीडि़त को कोविड केयर सेंटर नहीं भेजा गया था। वे होम आइसोलेशन में हैं। उनके पिता के शव का कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लेने से परिजनों ने इंकार कर दिया। अंतिम संस्कार में 15 लोग शामिल हुए हैं। सभी को होम क्वारंटीन किया जा रहा है।
-अजय शर्मा, तहसीलदार लटेरी

govind saxena Bureau Incharge
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