कर्ज ने बेमौत मारा, प्रशासन बोला पारिवारिक विवाद

कर्ज ने बेमौत मारा, प्रशासन बोला पारिवारिक विवाद

मृतक के पुत्र राजा शर्मा ने रोते हुए बताया कि अब भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको और पंजाब नेशनल बैंक का कर्जा बकाया है। साहूकारों का कर्ज मिलाकर करीब 20 लाख रुपए चुकाने हैं।


विदिशा।पीपलखेड़ा के पास करीब 20 लाख के कर्जे का बोझ, बैंकों द्वारा वसूली के लिए चौराहों पर मुनादी से धूल में मिलती प्रतिष्ठा, एक-दो नहीं तीसरी साल भी फसल चौपट। इस बार तो 25 बीघा में तीन बोरा सोयाबीन निकला। कौन बदनामी कराए, यही उलझन 27 सितम्बर 2015 को बागौद के नारायण प्रसाद शर्मा की मौत का कारण बन गई। उन्होंने सल्फास खाकर जान दे दी। लेकिन प्रशासन ने अपना दामन बचाने के लिए सरकार को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें नारायण की मौत को पारिवारिक विवाद करार दिया।

कलेक्टर ने ये लिखा

मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजी रिपोर्ट में कलेक्टर ने लिखा है कि नारायण प्रसाद ग्राम बागौद की पारिवारिक विवाद के चलते सल्फास खाने से 29 सितम्बर को मृत्यु हो गई थी। उन्होंने पत्र के साथ में एसडीएम और तहसीलदार की रिपोर्ट भी भेजी है।

यह आ गई नौबत

मृतक के पुत्र राजा शर्मा ने रोते हुए बताया कि अब भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको और पंजाब नेशनल बैंक का कर्जा बकाया है। साहूकारों का कर्ज मिलाकर करीब 20 लाख रुपए चुकाने हैं। पैसा कहां से लाएं। अब अपनी जमीन बेचकर कर्जा चुकाने की नौबत है।

पंचनामा बदल दिया

मृतक के दामाद डॉ. आशीष दुबे का कहना है कि परिवार में कोई विवाद नहीं था। पटवारी ने घटना के दिन खुद पंचनामा बनाकर लिखा था कि फसल खराबी के कारण नारायण प्रसाद ने आत्महत्या कर ली, लेकिन प्रशासन ने यह रिपोर्ट भी बदल दी।

प्रतिष्ठा भी दांव पर

राजा कहते हैं कि इस कर्ज और प्रतिष्ठा के कारण पिता ने जान दे दी। अब रही सही प्रतिष्ठा भी कर्ज चुकाने, बदनामी होने और पिता की मौत पारिवारिक विवाद के चलते निरुपित करने से दांव पर लगी है। बैंकों द्वारा अभी भी तकाजे किए जा रहे हैं। परिवार अब भी सदमे में है। किसी को समझ नहीं आ रहा कि कर्ज चुकाने के लिए राशि कहां से लाएं। मुख्यमंत्री केे खामखेड़ा आगमन पर भी राजा शर्मा ने उन्हें पूरी व्यथा सुनाते हुए मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ और पूरा परिवार अब भी संकट से जूझ रहा है।

यहां भी उल्टा पड़ गया पांसा

अपनी मौत से पहले नारायण प्रसाद ने बैंकों का कर्जा चुकाने भोपाल का प्लॉट बेचना चाहा। उन्होंने भोपाल के मनोज यादव से सौदा किया और 9 लाख रुपए एडवांस लेकर एग्रीमेंट किया। वह 9 लाख उन्होंने कर्जा चुकाने में दे दिया। लेकिन पांसे यहां भी पलट गए। प्लॉट के खरीददार ने ऐनवक्त पर प्लॉट खरीदने से मनाकर पैसा वापस मांग लिया। पैसा तो उधारी चुकाने में दे दिया था, वे इतनी रकम कहां से लाते।

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