scriptDeforestation in VIDISHA | माफियाराज: VIDISHA के 19 हजार हेक्टेयर FOREST पर अवैध कब्जा | Patrika News

माफियाराज: VIDISHA के 19 हजार हेक्टेयर FOREST पर अवैध कब्जा

गोलीकांड के बाद बिना हथियार लाचार देखते रहते हैं वनकर्मी

विदिशा

Published: September 23, 2022 11:50:52 am

विदिशा. वनकर्मियों की गोली से लटेरी के जंगल में आदिवासी की मौत के बाद से सुर्खियों में आए विदिशा जिले के जंगल में अब वन माफिया और बेखौफ हो गया है। अब अंदर ही नहीं बल्कि सड़क किनारे के बेशकीमती सागौन के पेड़ वन माफिया के निशाने पर हैं। यह बात खुद वन विभाग ने स्वीकारी है कि जिले के करीब 19 हजार हेक्टेयर पर वन माफिया का कब्जा है। दस हजार से ज्यादा लोगों ने जंगल पर अवैध कब्जा कर रखा है। लटेरी के जंगल में मुख्य मार्गों की बेशकीमती सागौन भी धड़ल्ले से काटकर सुठालिया तथा मक्सूदनगढ़ की ओर जा रही है। गोलीकांड के बाद से वन अमला भी भयभीत है, उसने अपने हथियार जमा कर दिए हैं। यही कारण है कि लटेरी-शमशाबाद रोड पर सैंकड़ों सागौन पेड़ काटे जा रहे हैं। शमशाबाद-लटेरी मार्ग पर जटपुरा, कोलुआ, मुस्करा, खेलनी, नरसिंहपुर, झूकरजोगी सहित आसपास के जंगलों में अंदर के अधिकांश पेड़ों को काटा जा चुका है।
माफियाराज: VIDISHA के 19 हजार हेक्टेयर FOREST पर अवैध कब्जा
माफियाराज: VIDISHA के 19 हजार हेक्टेयर FOREST पर अवैध कब्जा
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माफिया के हौंसले बुलंद, वन अमले के पस्त

रायपुरा की घटना के बाद जंगल माफिया के हौंसले बुलंद और वन विभाग के पस्त हैं। इसका लाभ उठाते हुए माफिया अब सडक़ों के किनारे बेधडक़ पेड़ों को दिन में ही काटने पर उतारू है। पेड़ काटकर रात में ले जाने का किस्सा अब खत्म हो चुका है। अब तो दिन में ही कटाई और काटकर छोड़ देने के बाद जब सुविधा हो तब सागौन की बड़ी बड़ी बल्लियों और तनों को ढोया जा रहा है। इन दिनों मुख्य मार्ग के दोनों ओर सैंकड़ों पेड़ कटे पड़े हैं और उनके तने ले जाने की तैयारी है। वन विभाग की गाडिय़ां यहां से खूब गुजरती हैं, लेकिन गोलीकांड के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के रवैये को देखते हुए उन्होंने भी टोकाटाकी तक खत्म कर दी है। पेड़ों के तने कटे पड़े हैं, लेकिन उन्हें जप्त कर ले जाने का काम भी वन अमला नहीं कर रहा है। यह सब देखकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में और तेजी से जंगल कटेगा और सागौन के पेड़ों का यहां से पूरी तरह सफाया हो जाएगा।
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वन चौकी के ही पेड़ काट ले गए माफिया

इसी मार्ग पर अगरा पठार वन चौकी है। वन माफिया के हौंसलों का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि माफिया ने इस चौकी परिसर की फेसिंग तोडकऱ यहां के पेड़ो ंको ही काट डाला है और यहां रखी पानी की टंकी को भी उठा ले गए हैं। चौकी परिसर के सौ मीटर के दायरे में ही दर्जनों बड़े बड़े सागौन पेड़ काट दिए गए हैं।
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वनकर्मी बोले-परिवार वाले हैं, क्यों लगाएं खुद को दांव पर

दक्षिण लटेरी के एक वनकर्मी ने पेडा़ें की इस कटाई पर बेपरवाह होकर कहा, क्या करें और क्यों करें? हमारे भी परिवार हैं, नौकरी के लिए खुद को दाव पर लगाने से भी क्या मिलता है? जंगल बचाने के लिए कोई सख्ती करो तो सरकार से क्या मिलता है, एफआइआर, प्रताडऩा, निलंबन और अपराधी का तमगा। सरकार खुद ही नहीं चाहती कि जंगल बचे तो यही सही। काटने दो, हो जाने दो साफ।
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दो साल में हटाया 555 हेक्टेयर अतिक्रमण

विदिशा जिले में जंगल पर अवैध कब्जे और जंगल की कटाई के हालात भयावह हैं। लटेरी के मुरवास में संतराम वाल्मिकी की हत्या वनों पर कब्जे को लेकर ही हुई। हालांकि इसके बाद वन विभाग ने जिले में टीम बनाकर करीब 555 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर कई जगह पौधरोपण कराया, लेकिन वह अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की तुलना में नाकाफी है।
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कहां कितनी वन भूमि पर अवैध कब्जे

रेंज अतिक्रमण प्रतिशत अतिक्रमणकारी

सिरोंज 8028.826 35.67 3583

उ.लटेरी 2956.925 19.7 1765

द.लटेरी 1695.248 13.94 1096

शमशाबाद 2979.180 18.95 1892
गंजबासौदा1941.226 27.73 1005

ग्यारसपुर 1174.267 11.86 780

विदिशा 1073.721 08.75 1182

(स्त्रोत: विदिशा सामान्य वन मंडल की प्रचलित कार्ययोजना, अतिक्रमण के आंकड़े हेक्टेयर में)

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डीएफओ ने माना चुनौती तो बड़ी है...
विपरीत हालात और चुनौतियों के बीच विदिशा में पदस्थ किए गए नए डीएफओ ओएस मर्सकोले भी अभी पूरी तरह यहां के माहौल और जिले को समझ नहीं पाए हैं। वे कहते हैं कि वनकर्मियों के मनोबल को बनाए रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं। फीडबैक भी ले रहे हैं। यकीनन काम चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इससे कैसे उबरना है यह सबसे मिलकर और हालात समझने के बाद ही कहा जा सकेगा।

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