जैन साधुओं के प्रवेश से चौतरफा धर्म बयार, 18 मुनियों सहित आए वर्धमान सागर

भव्य अगवानी, आचार्यश्री वर्धमान सागर के संघ का मुनि समतासागर से मिलन

By: govind saxena

Published: 21 Feb 2021, 07:15 PM IST

विदिशा. रविवार की सुबह विदिशा नगर जैन आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज के 18 मुनियों के संघ और यहां पहले से विराजे मुनियों के कारण धर्ममय हो गया। चौतरफा अहिंसा परमोधर्म: के स्वर गूंजे, साधुओं को आहार देने नगर में जगह-जगह चौके लगाए गए और अरिहंत विहार में गूंजी आचार्य वर्धमान सागर सहित नगर के गौरव मुनि निर्भय सागर की वाणी।


सुबह बंटीनगर तिराहे पर आचार्यश्री वर्धमान सागर की ससंघ मंगल अगवानी के लिए जैसे जैन समाज उमड़ पड़ा। मुनिश्री समतासागर और आर्यिका लक्ष्मीभूषण तथा आर्षमति ने आचार्यश्री के संघ की अगवानी की। धर्म ध्वजा लहराते, नवयुवक मंडल के जयघोष और जय गुरुदेव की गूंज के बीच जैन धर्मावलंबी संघ को अरिहंत विहार लेकर आए। जैन समाज प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि अरिहंत विाहर में धर्मसभा हुई और फिर पांच स्थानों से आहारचर्या हुई। सामायिक के बाद दोपहर दो बजे स्टेशन जैन मंदिर में धर्मसभा हुई, जिसके बाद आचार्यसंघ शीतलधाम पहुंचा। आचार्यश्री के संघ का विहार नेमावन की ओर चल रहा है और उनके साथ नगर कश्े गौरव मुनि निर्भयसागर महाराज भी हैं।


आचार्यश्री वर्धमान सागर ने कहा कि जैसा मार्ग आपके नगर गौरव (मुनि निर्भयसागर) ने अपनाया है वैसा मार्ग आप सभी अपनाएं तभी आपका कल्याण संभव है। इसको अपनाए बिना न तो कल्याण हुआ है और न कभी होगा। भले ही पंचमकाल में मोक्ष नहीं है, लेकिन मोक्ष माार्ग तो है। जब भी मोक्ष मिलेगा, इसी मार्ग से मिलेगा। मानवजीवन संयम पथ की साधना के लिए ही मिला है, इसे खोना नहीं चाहिए। विदिशा के मुनिश्री निर्भय सागर ने कहा कि आप सभी के समक्ष मैं उपदेश दूं, यह मेंरे सामथ्र्य से बाहर है। मुनि निर्भय सागर की आहारचर्या का सौभाग्य उनके गृहस्थ जीवन के पुत्र निखिल जैन को शेरपुरा में मिला। 22 फरवरी की सुबह प्रवचन और पूरे संघ की आहारचर्या शीतलधाम पर ही होगी।

govind saxena Bureau Incharge
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