मौसम की बेरूखी से सूखने लगी फसल, तो कहीं चल रही बोवनी

मौसम की बेरूखी से सूखने लगी फसल, तो कहीं चल रही बोवनी

Krishna singh | Updated: 14 Jul 2019, 07:13:13 AM (IST) Vidisha, Vidisha, Madhya Pradesh, India

मौसम की मार किसानों को बारिश का इंतजार

विदिशा. जिले में फसल की बोवनी के शुरूआती दौर में ही किसान आफत में आ गए हैं। पूर्वमें लगातार बारिश के कारण बोवनी नहीं कर पा रहे थे। अब बोवनी कर चुके तो बारिश रुकी हुई। ऐसे में पूर्वमें बोवनी कर चुके किसानों की फसलों पर संकट मंडराने लगा है। वहीं पानी की कमी से धान की फसल भी सूखने लगी है। वहीं कई गांव में किसान अभी भी बोवनी कार्य में लगे हुए हैं।

मालूम हो कि जिले में कुछ क्षेत्रों में पहले बारिश हो जाने से किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर ली थी, लेकिन पांच दिन से बारिश नहीं हो रही। वहीं गर्मी अधिक पडऩे से फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है और किसान बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ग्राम सोजना के किसान प्रहलाद रघुवंशी ने बताया कि ग्राम सोजना सहित धनोरा, धनियाखेड़ी, सुमेर आदि में 29-30 जून को सोयाबीन बोवनी हो गई थी। इन गांव में फसल करीब 15 दिन की हो चुकी हैं, लेकिन अब कई दिनों से बारिश न होने के कारण जमीन सख्त हो रही और फसल मुरझाने लगी है। ट्यूबवेल भी पानी देने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि दो-चार दिन और बारिश नहीं हुईतो फसल सूख जाएगाी। इसी तरह ग्राम आमखेड़ा कालू निवासी लाखनसिंह कुशवाह ने बताया कि उनके गांव सहित वर्धा, पुआरिया, सेऊ आदि गांव में भी सोयाबीन फसल संकट में आ रही है।

 

यहां चल रही बोवनी, रौपी जा रही धान
वहीं जिले में कई गांव में अभी भी बोवनी कार्य चल रहा है। ग्राम परसपरसौरा के किसान बलवीरसिंह रघुवंशी ने बताया कि परसपरसौरा सहित मूंडरा, सुरई व अन्य गांव में जहां पानी के निजी जल स्रोत हैं वहां किसान धान के रौपे लगा रहे हैं। वहीं ग्राम अंडिया, कोलिंजा, देवखजूरी, दीताखेड़ी, अमऊखेड़ी, कोठीचार आदि गांव में सोयाबीन व उड़द की बोवनी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस समय बारिश होना बहुत जरूरी है नहीं तो किसानों की यह फसल संकट में आ जाएगी।

 

कुछ क्षेत्रों में धान के भी बुरे हाल
वहीं कुछ क्षेत्रों में धान की फसल भी आफत में हैं। ग्राम अहमदपुर क्षेत्र के किसान मोहरसिंह रघुवंशी के अनुसार अहमदपुर सहित डंगरबाड़ा, बेरखेड़ी, भाटनी, परसूखेड़ी, मंूडरा, सोंथर, सतपाड़ा, करारिया, बरखेड़ा, रोड़ा झिरनिया आदि गांव में किसानों ने बहुतायत में धान के गढ़े बनाए। इनमें धान लगाई। यह फसल करीब दस दिन की हो चुकी। हर गढ़े में करीब 6 इंच पानी होना चाहिए लेकिन बारिश नहीं होने से धान की फसल सूखने लगी है।

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