मुख्यमंत्री ने चार बार की स्टेडियमों की घोषणा हुई, पूरी न हुई

मुख्यमंत्री ने चार बार की स्टेडियमों की घोषणा हुई, पूरी न हुई

Veerendra Shilpi | Updated: 25 Jun 2018, 02:38:23 PM (IST) Vidisha, Madhya Pradesh, India

मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता में होता है, लेकिन यह सरकारी मशीनरी का ही खेल कहें कि अफसरों की कार्यशैली ने २००६ से लेकर २०१४ के बीच सीएम की चार घोषणाओं को पूरी तरह पलीता लगा दिया।

विदिशा. मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता में होता है, लेकिन यह सरकारी मशीनरी का ही खेल कहें कि अफसरों की कार्यशैली ने 2006 से लेकर 2014 के बीच सीएम की चार घोषणाओं को पूरी तरह पलीता लगा दिया। साल दर साल बीते लेकिन सीएम के जिले में ही सीएम की घोषणाएं पूरी नहीं की जा सकीं।

सीएम की घोषणाओं के बीच खेल जगत और खिलाड़ी सरकारी मशीनरी के हाथों छले जा रहे हैं। विदिशा, नटेरन और कुरवाई में घोषणाओं के अमल में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है। नटेरन में तो प्रशासकीय स्वीकृति और राशि आबंटन के बाद खेल संचालनालय ने 10 लाख रुपए वापस मांग लिए। उधर शमशाबाद के एक स्टेडियम में फसल उगाई जा रही है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जिले में खेल सुविधाएं बढ़ाने और खिलाडिय़ों की प्रतिभा को तराशने की मंशा से चार बड़ी घोषणाएं की, लेकिन सरकारी मशीनरी और लालफीताशाही ने सीएम की घोषणाओं को भी परवान नहीं चढऩे दिया। कई मामलों में प्रशासकीय स्वीकृति के बाद भी काम नहीं हो सका। कहीं तो जमीन का आबंटन भी नहीं कराया जा सका। और इसे क्या कहें कि कुछ जगह लाखों रुपए खर्च कर निर्माण एजेंसी ने अपने ढंग से काम करा दिया और अब खेल विभाग कह रहा है कि ये परिसर किसी भी खेल और खिलाडिय़ों के काम का नहीं।

केस-1. सीएम की नटेरन घोषणा- 2006
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2006 में नटेरन में मिनी स्टेडियम की घोषणा की थी, इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति और 10 लाख रुपए का आबंटन भी कर दिया गया। करीब 5 लाख रुपए का काम भी करा दिया बताया, लेकिन इसके बाद काम रोक दिया गया और खेल संचालनालय ने अपनी दी राशि वापस मंगा ली।

केस-2. सीएम की शमशाबाद घोषणा- 2007
मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह ने 2007 में शमशाबाद में स्टेडियम निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत हुए और निर्माण एजेंसी ने अपना काम भी कर उसे खेल विभाग को हैंडओवर करने की तैयारी कर ली। लेकिन मनमाने ढंग और बेतरतीबी से किए गए काम को खेल विभाग ने स्वीकार नहीं किया। खेल विभाग का कहना है कि ये स्टेडियम खिलाडिय़ों के किसी खेल के लायक नहीं है। तब से ये स्टेडियम अवैध अतिक्रमण के साथ ही खेत और खंडहर में तब्दील है। 25 लाख .पए खर्च होने के बावजूद इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा।

केस-3. सीएम की कुरवाई घोषणा- 2011
कुरवाई में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2011 में खेल परिसर बनाने की घोषणा की थी। यह खेल परिसर 62 लाख रुपए से बनाया जाना था। लेकिन सरकारी मशीनरी का खेल देखिए कि मुख्यमंत्री की घोषणा को अधिकारी 7 वर्ष में भी प्रशासकीय स्वीकृति नहीं दे सके। नतीजा, घोषणा कागजी बनकर रह गई।

केस-4. सीएम की घोषणा-2014
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा जिला मुख्यालय को खेल के नक्शे पर उभारने के लिए यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की थी, ताकि राष्ट्रीय के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धाएं भी यहां हो सकें। लेकिन चार वर्ष बाद भी विदिशा या उसके आसपास के इलाके में इस स्टेडियम के लिए प्रशासन जमीन तक नहीं तलाश पाया। नतीजा सरकार का यह कार्यकाल भी पूरा होने को है और मुख्यमंत्री की घोषणा ठंडे बस्ते में जा चुकी है।

-मैंने अभी कुछ माह पूर्व पही ज्वाइन किया है। ज्यादा नहीं मालूम, फिर भी नसरतगढ़ के स्टेडियम में खेती की जा रही है। वहां का खेल मैदान खिलाडिय़ों के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। हमने उसे लेने से इंकार कर दिया है। नटेरन मिनी स्टेडियम की राशि खेल संचालनालय ने वापस मांग ली है। कुरवाई के खेल परिसर को प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली। विदिशा के अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के लिए जगह आबंटित होना है। -पूजा कुरील, जिला खेल अधिकारी, विदिशा

 

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