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सरकारी अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने और प्रसव की भी सुविधा नहीं

स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल... मोहम्मदगढ़ में कभी कभार ही आते हैं डॉक्टर, एक साल से नहीं हुई डिलेवरी

विदिशा

Updated: February 20, 2022 12:54:01 am

विदिशा। मुख्यमंत्री के नाम का तमगा लगे होने के बावजूद विदिशा जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। जिला अस्पताल का भगवान ही मालिक है, वहीं जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में से कुछ नाम के हैं। कहीं डिलवेरी की सुविधा नहीं तो कहीं मरीजों की नब्ज टटोलने के लिए डॉक्टर का मिलना भी मुश्किल है, कहीं नर्स तक नहीं है तो कहीं खुले में पोस्टमार्टम किया जाता है।

सरकारी अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने और प्रसव की भी सुविधा नहीं
सरकारी अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने और प्रसव की भी सुविधा नहीं

ग्यारसपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदगढ़ के हाल बहुत बुरे हैं। यहां भवन अच्छा है, लेकिन सुविधाएं नाम मात्र की भी नहीं हैं। कहने को यहां डॉ. टीएस मीणा, ड्रेसर शरीफ मोहम्मद और नर्स यास्मीन खान पदस्थ हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉक्टर तो महीने में कभी कभार ही आते हैं। ड्रेसर और नर्स ही यहां लोगोंं को दवाएं दे देती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नर्स भी 6 माह के अवकाश पर चली गईं हैं ऐसे में अब सिर्फ एक ड्रेसर बचा है।

एक वर्ष से नहीं हुई डिलेवरी
मोहम्मदगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स यास्मीन बताती हैं कि मार्च 2021 में यहां आखरी डिलेवरी हुई थी। इसके बाद यहां कोई डिलेवरी नहीं हुई। महिलाएं प्रसव के लिए हैदरगढ़ या ग्यारसपुर जाती हैं। यहां बेबी वार्मर भी नहीं हैं। लेबर रूम और लेबर टेबल का साल भर से उपयोग ही नहीं हुआ। ड्रेसर शरीफ बताते हैं कि जो लोग यहां आते हैं, उन्हें लक्षण के आधार पर दवाएं दे देते हैं। दोनों कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टर की ग्यारसपुर में भी ड्यूृटी है इसलिए वे हफ्ते में दो दिन ही यहां आते हैं।

सरकारी अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने और प्रसव की भी सुविधा नहीं

अस्पताल में अब नर्स भी नहीं
मोहम्मदगढ़ के इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स भी नहीं है। ये नर्स अस्पताल परिसर में ही रहती थीं। लेकिन वे खुद प्रसूति अवकाश पर 6 माह के लिए चली गई हैं, जिससे रही सही सुविधाभी नहीं मिल पाएगी। केवल ड्रेसर ही अस्पताल में बचते हैं, हालांकि रिकार्ड में यहां डॉ. टीएस मीणा भी पदस्थ हैं, लेकिन ग्यारसपुर में एक दिन की ड्यूटी के बावजूद उनका मोहम्मदगढ़ में कभी कभार ही आना होता है। ऐसे में ग्रामीणों को अस्पताल होते हुए भी कोई उपचार नहीं मिल पाता।

सरकारी अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने और प्रसव की भी सुविधा नहीं

श्मशान के पास खुले में पोस्टमार्टम
ग्यारसपुर ब्लॉक का ही हैदरगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। यहां डॉ नत्थी अहिरवार काफी समय से पदस्थ हैं, वे पोस्टमार्टम भी करती हैं, लेकिन वर्षों से मांग करने के बावजूद यहां पोस्टमार्टम कक्ष नहीं बन सका। डॉ अहिरवार ऐसे में श्मशान के पास खुले में कभी चादरों की तो कभी टीनों की आडक़र पोस्टमार्टम करती हैं। डॉ अहिरवार कहती हैं कि जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, थाना और डॉक्टर तीनों हैं वहां तो पोस्टमार्टम करना ही है। ये अलग बात है कि हमारे यहां पोस्टमार्टम कक्ष नहीं है, इसलिए चादरों की आड़ कर पीएम करते हैं। हैदर$गढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो साल से स्टॉफ नर्स नहीं है। यहां ड्रेसर, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय भी नहीं है। खुद डॉ अहिरवार की ड्यूटी हफ्ते में दो दिन ग्यारसपुर लगती है, इसके बावजूद यहां लोगों को उपचार मिल रहा है।


यहीं हैं अजीब बीमारी के मरीज
यह वहीं मोहम्मदगढ़ है, जहां अजीब बीमारी जेनेटिक डिसऑर्डर से पीडि़त तीन लोग और उनका परिवार है। कुछ अन्य बच्चे भी निशक्तता से जूझ रहे हैं। यहां लोग बीमार होते हैं, लेकिन उपचार नहीं मिलता। ऐसे पिछड़े, निरक्षरता वाले और गरीबी से जूझते गांव में स्वास्थ्य सेवाएं और पुख्ता होना चाहिए।

मोहम्मदगढ़ में डॉ. टीएस मीणा पदस्थ हैं। उनकी हफ्ते में एक दिन ग्यारसपुर में ड्यूटी रहती है। बाकी दिनों में वे मोहम्मदगढ़ नहीं हैं तो गलत है, मैं दिखवाता हूं। मोहम्मदगढ़ पीएचसी होने के बाद भी डिलेवरी नहीं हो रही है। नर्स लंबे अवकाश हैं। नर्स के लिए मांग भेजी है। हैदरगढ़ पीएचसी में पोस्टमार्टम कक्ष की मांग भेज चुके हैं, अभी खुले में ही पीएम होता है। -डॉ अब्बास जैदी, बीएमओ ग्यारसपुर


मोहम्मदगढ़ में चिकित्सक पदस्थ हैं, उनकी ग्यारसपुर में भी 1-2 दिन ड्यूटी है। बाकी दिनों में उन्हें मोहम्मदगढ़ रहना चाहिए।वहां पीएचसी को क्रियान्वित करना है, डिलेवरी न होना वहां की समस्या है। ऐसे 40 सबसेंटर हैं जहां नर्स नहीं हैं, वैकल्पिक व्यवस्था करते हैं। जल्द ही बैठक में इन सब बिन्दुओं पर चर्चा कर व्यवस्था कराएंगे। -डॉ एपी सिंह, सीएमएचओ, विदिशा

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