एक गार्ड के भरोसे अस्पताल, डॉक्टर आती नहीं, स्टॉफ नर्स है नहीं

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सिर्फ भवन ही है, अस्पताल में नहीं मिलता कोई उपचार

By: govind saxena

Published: 07 Sep 2021, 08:54 PM IST

आनंदपुर. बड़ी आबादी के उपचार के लिए बनाया गया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही उपचार के लिए तरस रहा है। पूरे स्वास्थ्य केंद्र का भार सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड संभाले हुए है। कोई उपचार नहीं, कोई मरहम पट्टी तक नहीं। डॉक्टर हैं जो कभी कभार आती हैं, स्टॉफ नर्स तो है ही नहीं, बाकी स्टॉफ की बात करना ही बेमानी है। ऐसे में करीब एक करोड़ की लागत से बना यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल सीमेंट-कांक्रीट की इमारत बनकर रह गया है।


पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के प्रयासों से यहां करीब एक करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण हुआ था। इसके बाद 15 नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विदिशा मेें आयोजित समारोह से इसका लोकार्पण किया था। उम्मीद यही थी कि दूरस्थ अंचल के इस स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्र के हजारों लोगों की समस्याएं दूर होंगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में उपचार मिल सकेगा। लेकिन दिखावे के भवन के अलावा यहां के लोगों को दर्द में राहत जरा भी नहीं मिली।


ग्राम के कुलदीप बघेल, हेमंत सेन, रामावतार शर्मा, गोविंद बघेल, शैलेन्द्र जैन, संतोष शर्मा आदि ने बताया कि कोरोना वैक्सीन के समय तो स्टाफ दिखता है लेकिन बाकी दिनों में यहां रोज ओपीडी तक नहीं खुलती। पहले कुछ दिन तो मरीज आने लगे थे पर डॉक्टर के रोज न आने से अब मरीज यहां इंतजार करने के बाद दूसरे अस्पतालों में उपचार के लिए भटकते हैं।


स्वस्थ्य विभाग के अनुसार प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर, एक गार्ड और स्वीपर की ही नियुक्ति है। दो एएनएम यहां अटैच हैं, लेकिन कौन कब आता है यह किसी को नहीं पता। प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र में डॉक्टर के साथ दो स्टाफ नर्स, ड्रेसर, लैब टेक्नीशियन, अकाउंटेंट आदि होना चाहिये पर स्टाफ की कमी है। जबकि आनंदपुर क्षेत्र में अनेक गांव आते हैं और यह प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र डिलेवरी पॉइंट है। सदगुरु अस्पताल का पुल टूटने से मुख्य रास्ता बंद है इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग को कोई चिंता नहीं है। प्रसव के लिए यहां कई गर्भवतियां आती हैं लेकिन किसी के न मिलने पर उन्हें लटेरी या अन्य अस्पताल जाना पड़ता है।

पदस्थ डॉक्टर को रोज आना चाहिए, मैं पता करता हूं, आज किसकी ड्यूटी है। रोज ओपीडी होती है पर संख्या पता नहीं।
-डॉ. सुरेंद्र धाकड़, बीएमओ लटेरी

govind saxena Bureau Incharge
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