पत्रिका से साक्षात्कार -सन्यास नहीं लिया, ब्रेक लिया है, फिर लौटूंगा-सूर्यप्रकाश

पूर्व मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा ने भरी हुंकार

By: govind saxena

Published: 11 Oct 2021, 08:48 AM IST

विदिशा. मंत्री रहते हुए शमशाबाद विधायक सूर्यप्रकाश मीणा को 2018 में भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था। लेकिन इसका दोष भी मीणा ने कभी भाजपा के मत्थे नहीं मढ़ा। हमेशा विष का घूंट पी जाने के अंदाज में वे खामोशी ही ओढ़े रहे। टिकट कटने के बाद से वे राजनीति से दूर-दूर हैं। लेकिन जब पत्रिका ने उनसे सवाल किए तो वे हुंकार भरते नजर आए और बोले कि-मैंने राजनीति से सन्यास नहीं, केवल ब्रेक लिया है, जनता और पार्टी चाहेगी तो फिर वापस लौटूंगा। प्रस्तुत हैं पूर्व मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा से साक्षात्कार के कुछ अंश-

सवाल- आपका राजनैतिक सफर कब कैसे शुरू हुआ?ï
जवाब- यह बात 1992 की है, जब शिवराज जी सांसद थे और वे पदयात्रा के लिए निकले थे। उन्होंने मेरे गांव बोरिया में रात्रि विश्राम किया था, तब उन्होंने पूछा था कि-आगे क्या करना चाहते हो। मैंने जवाब दिया था कि- प्रशासनिक सेवा में जाकर जनता की सेवा करने की इच्छा है। इस पर शिवराज जी ने कहा था कि जनता की सेवा तो राजनीति में भी की जा सकती है। आ जाओ, साथ में काम करो। बस वहीं से उनके साथ हो लिया और सफर जारी है।

सवाल- राजनीति में कब क्या मौका मिलाïï?
जवाब- शिवराज जी के साथ जुडïऩे के बाद लगातार कार्यकर्ता के रूप में कार्य करता रहा। संगठन में कई पदों पर भी कार्य किया। 2008 में शमशाबाद से चुनाव लडऩे का मौका मिला, लड़े और जीते। फिर 2013 में भी टिकट मिला और फिर जीते। भाजपा जिलाध्यक्ष भी बनाया गया। 2016 में शिवराज जी के मंत्रीमंडल में मंत्री बनाया गया।

सवाल- मंत्री होने के बावजूद 2018 में आपका टिकट काट दिया गया। क्यों?
्रजवाब- भाजपा ने मेरा टिकट नहीं काटा। मैं पहला व्यक्ति था, जो शमशाबाद से लगातार 10 साल विधायक रहा। लगातार काम के बाद ब्रेक लेना चाह रहा था। इसलिए टिकट के पहले ही घोषणा कर दी थी कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा और पांचों विधानसभा चुनाव जिताने का काम करूंगा।

सवाल- आपने कहा खुद ने चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा की। क्या हारने की आशंका थी?
जवाब- बिल्कुल नहीं, हारने की कोई आशंका नहीं थी।


सवाल- आरोप लगता है कि आपने राजश्री सिंह को हराने के लिए काम किया?
जवाब- मैं संगठन लाइन का व्यक्ति हूं। किसी भी कीमत पर हराने का काम न किया न कभी अपनी ही पार्टी के किसी आदमी को हराने का सोचा।

सवाल- तो ये मानें कि राजश्री सिंह को जिताने का प्रयास किया?
जवाब- बिल्कुल। शमशाबाद, बासौदा और सिरोंज में मीणा समाज के मतदाता अधिक हैं, इसलिए संगठन ने मुझे इन तीनों क्षेत्रों को संभालने का दायित्व सौंपा था। मैंने इन तीनों क्षेत्रों में भरपूर काम किया।

सवाल- मुश्किल के समय में शिवराज के संकट मोचक बने हैं आप। कितना सही है?
्रजवाब- ऐसा कुछ नहीं है। शिवराज जी से शुरू से पारिवारिक संबंध हैं, इसलिए कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा। हमारे संबंध पहले जैसे थे, वैसे ही आज भी हैं।

सवाल- जब आपका टिकट कटा तो आपको कोई और लाभ देने की बात आई थी। लाभ आज तक नहीं दिखा?
जवाब- पहली बात तो मेरा टिकट नहीं कटा, मैं खुद दावेदारी से हटा था। फिर किसी को उम्मीद नहीं थी कि प्रदेश में चुनाव का रिजल्ट ऐसा रहेगा। ऐसे में लाभ-हानि का सवाल ही नहीं। फिर उस चुनाव में कई मंत्रियों को चुनाव नहीं लड़ाया गया, उन्हें भी जब एडजस्ट नहीं किया गया तो मैं अपनी उम्मीद कैसे करूं।


्रसवाल- शमशाबाद से भाजपा का उम्मीदवार बदला, इसके बाद से आप राजनीति से गायब हैं। क्यों?
जवाब- कोशिश है कि जिसे मौका मिला है, वह पूरी स्वतंत्रता से काम करे। यही कारण है कि राजश्री सिंह के अब तक के कार्यकाल में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। वे विधायक हैं, उन्हें ही हर काम में मौका मिलना चाहिए। जहां बुलाया जाता है वहां आज भी जाता हूं।

सवाल-आपका इस तरह सियासत से गायब हो जाना कहीं राजनीति से सन्यास का संकेत तो नहीं?
जवाब- बिल्कुल नहीं। मैंने राजनीति से सन्यास नहीं लिया, ब्रेक लिया है। पार्टी और जनता चाहेगी तो फिर लौटूंंगा। पार्टी कहेगी तो चुनाव लडूंगा।

सवाल-तो अगला चुनाव लडऩे की तैयारी मानें?
जवाब- यह निर्णय संगठन को लेना है। भाजपा में व्यक्तिवादी सोच नहीं चलती। संगठन ही तय करता है, वही चुनाव लड़ता है और जिताता है।क्षेत्र के लोग तो अब भी कहते हैं कि एक बार फिर आओ आप। अब संगठन चाहेगा तो संभव भी है।

सवाल- राजनीति में अपने पुत्र देवेश को बढ़ाना चाहते हैं?ï
जवाब- मेरे बढ़ाने से कुछ नहीं होता। मैंने उसका कहीं नाम तक नहीं लिया। उसे खुद तय करना है कि वह राजनीति में आए या न आए। फिर राजनीति में तो जो मेहनत करेगा, जो जनता से जुड़ा रहेगा, वही आगे आएगा।

सवाल- मंत्री रहते हुए आपने क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए पहल की थी। क्या हुआ?
जवाब- हां, ये सही है। मन में था कि जिले में फूड प्रोसेसिंग के लिए कुछ काम करूं। यह काम पीपीपी मोड पर होना था, लेकिन इस काम में किसानों का साथ नहीं मिला।

govind saxena Bureau Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned