परमारकालीन देवनगरी की तरह है कागपुर का खेड़ापति परिसर

परमारकालीन ब्रम्हा, शिव-पार्वती, विष्णु्र और चंवरधारिणी सहित अनेक प्रतिमाएं भी मौजूद हैं

By: govind saxena

Updated: 23 May 2021, 10:09 PM IST

विदिशा. विदिशा और नटेरन तहसील की सीमारेखा पर स्थित कागपुर ग्राम परमारकालीन विरासत के कारण भी मशहूर है। यहां के मंगलादेवी मंदिर, अठखंबी और खेड़ापति माता मंदिर के स्मारक दर्शनीय होने के साथ-साथ शिल्प के अद्भुद नमूने भी हैं। खेड़ापति मंदिर तो कागपुर के आसपास की कई प्रतिमाओं को एकत्रित कर दिए जाने से एक परमारकालीन देवालय के रूप में नजर आता है।
मंगला देवी मंदिर ऊंचा और खंडित है, लेकिन इसके मुख्य द्वार के दोनों ओर अत्यंत कलात्मक प्रतिमाओं को उत्कीर्ण किया गया है। मंदिर के दोनों ओर नाग कन्याओं की प्रतिमाएं हैं। पास ही बारहखंबों पर टिकी छत वाला एक मंडप है, संभवत: मंदिर में होने वाले अनुष्ठानों के समय इस बारहखंबी मंडप का उपयोग होता होगा। गांव के बीचों बीच खेड़ापति माता का मंदिर अभी भी ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि 10-11 वीं सदी का यह परमारकालीन मंदिर देवी का था, जो ध्वस्त होने के बाद क्षेत्र के लोगों द्वारा एक बार फिर बनवाया गया होगा। यह मंदिर अभी भी शिखर विहीन है। गर्भग्रह में अभी भी खेड़ापति माता की प्रतिमा है, जो अब सिंदूर पूजित है। यहां अब भी ग्रामीण उत्सव, त्यौहारों पर पूजा करने आते हैं। खेड़ापति की मूल प्रतिमा के ठीक पीछे वाले हिस्से में एक पाषाण की छोटी लेकिन सुंदर प्रतिमा मौजूद है, देवी की यह प्रतिमा दुर्गा और पार्वती के रूप को दर्शाती है। प्रतिमा के एक ओर सिंह तो दूसरी ओर बैल दिखाई देता है, देवी के एक हाथ में कमंडल भी मौजूद है। मंदिर परिसर काफी बड़ा है और इसमें परमारकालीन ब्रम्हा, शिव-पार्वती, विष्णु्र और चंवरधारिणी सहित अनेक प्रतिमाएं मौजूद हैं। कुछ जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं भी यहां दिखाई देती हैं।

govind saxena Bureau Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned