खण्डर में रह रही खाकी

खण्डर में रह रही खाकी

दो दर्जन परिवार खण्डरनुमा मकानों में जिंदगी बसर कर रहे



गंजबासौदा. शहर के दोनों थानों में तैनात पुलिस कर्मियों को रहने के लिए सरकारी क्वार्टर तो नहीं हैं और जो सरकारी क्वार्टर बने हंै। उनकी हालत बद से बदतर हो चली है।
हालात यह हैं कि करीब 30 साल पुराने इन सरकारी क्वार्टरों को पीडब्ल्युडी ने न रहने लायक घोषित कर दिए हैं लेकिन मजबूरी है कि इन खण्डरनुमा सरकारी मकानों में पुलिसकर्मी रहने के लिए मजबूर हैं।

 इन मकानों को खाली करने के लिए भी कहा जा चुका है लेकिन शहर में कोई और दूसरी व्यवस्था इन पुलिस कर्मियों के पास नहीं है जिसके चलते वे खतरा जानने के बावजूद इन मकानों में अपने बच्चों और परिवार के साथ रहने के लिए मजबूर बने हुए हैं और परेशानी झेल रहे हैं।

हो चुके हैं कई हादसे
तकरीबन तीन दशक पुराने इन सरकारी मकानों की स्थिति का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन क्वार्टरों में दो छोटे-छोटे कमरें हैं और जिसके में एक परिवार भी ढंग से रह नहीं पाता है इसी तरह छत का प्लास्टर गिर रहा है, पीने के लिए पानी नहीं है और भी कमियां हैं।  

हादसे का हो रहा इंतजार
खास बात है कि जो क्वार्टर बने हुए हैं वे इतने छोटे हैं और जगह की इतनी कमी है कई बार इन मकानों का छज्जा और प्लास्टर गिर चुका है, दीवारे दरक रहीं है इसे खाली करवाने के निर्देश हो चुके हैं। लेकिन खाली नहीं हो रहे हैं।  आला अधिकारी गौर नहीं करते।े

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