मवेशियों के नुकसान से जमीन तक बेचने को मजबूर किसान

मवेशियों के नुकसान से जमीन तक बेचने को मजबूर किसान
vidisha

veerendra singh | Updated: 22 Dec 2016, 11:29:00 PM (IST) Vidisha, Madhya Pradesh, India

सैकड़ों की संख्या में मवेशी एक गांव से दूसरे गांव पलायन करते हुए फसलों को चौपट कर रहे हैं


गंजबासौदा.
पिछले कुछ सालों से किसान लगातार अपनी कृषि से नुकसान झेल रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं के साथ साथ अब आवारा मवेशी किसानों की बड़ी आफत बन गए हैं। आवारा मवेशियों से किसान इतने परेशान हो चुके हैं कि अपनी रोजी रोटी को बेचने को मजबूर हो रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में मवेशी एक गांव से दूसरे गांव पलायन करते हुए फसलों को चौपट कर रहे हैं।
शहर से दस किमी दूर बसे अंबानगर के एक दर्जन से ज्यादा कृषक जमीन बेचने का मन बना चुके हैं। कुछ किसान जिनके पास पांच से सात बीघा ही जमीन है उनकी आधे से ज्यादा फसल आवारा पशुओं ने चट कर दी है। अब पैदावार आधे से भी कम होने के आसार हैं। जिसके चलते किसान कृषि में लगी उनकी लागत भी निकलती दिखाई नहीं दे रही है। गांव और आसपास के किसान शासन और प्रशासन तक कई बार आवारा मवेशियों की परेशानी को लेकर गुहार लगा चुके हैं। लेकन प्रशासन इस समस्या का कोई हल निकालने में सक्षम नहीं दिखाई दे रहा है। अंबानगर के कृषक राहुल माथुर बताते हैं कि किसानों के सहयोग से एक निजी बाड़ा बनाया गया है जिसमें जो भी आवारा मवेशी फसल को नुकसान करते दिखाई देते हैं उनको पकड़कर इस बाड़े में बंद कर दिया जाता है। लेकिन मवेशियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इक_ा होने पर कई बार यह मवेशी इस बाड़े की चौहद्दी को तोड़कर झुंड में खेतों में घुस जाते हैं और जिस नुकसान से कृषक बचना चाहते हैं यह मवेशी एक ही रात में कई एकड़ की फसल सफाचट कर देते हैं। कृषक हेमंत जैन ने बताया कि स्टेट हाईवे से लगकर ही उनका सात बीघा का खेत था। 50 से अधिक मवेशी एक ही रात में पूरे खेत की फसल चट कर गए। आगे इस जमीन से उन्हें कोई आमदनी के आसार नहीं हैं। अंबानगर ग्राम के नरेश सेन, सरदारसिंह, राजेश महाराज सहित ऐसे दर्जनों कृषक हैं जिनकी फसल आधे से ज्यादा आवारा मवेशी चौपट कर चुके हैं। लेकिन मवेशियों की समस्या के कोई स्थायी हल नही निकल पा रहा है।  अंबानगर गांव स्टेट हाईवे और बासौदा-सिरोंज मार्ग को जोडऩे वाले मुख्य चौराहे पर स्थित है। जब भी किसान आवारा मवेशियों को खेतों से खदेड़ देते हैं। तो यह मवेशी सड़क पर डेरा जमा लेते हैं। अंबानगर से लेकर मेहलुआ के बीच वाहनों की दुर्घटनाओं का कारण भी रोड पर आवारा मवेशियों का बैठना ही है। कई बार तेज गति से आ रहे भारी वाहन मवेशियों को नुकसान भी पहुंचा देते हैं। स्टेट हाईवे पर बसे गांव जोहद, गुरोद, सकरोली, किर्रोदा, पायरी, अंबानगर, रोजरू, बीलाढाना, बिलवाय, मसूदपुर, विशनपुर से लेकर मेहलुआ तक रोड से प्रतिदिन सैकड़ो वाहन भोपाल की ओर आते जाते हैं। आवारा मवेशियों से छोटे वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं वहीं बड़े वाहनों की चपेट में आने से कई मवेशियों को अपनी जान गवानी पड़ती है। ग्रामीण जनसुनवाई सहित कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन प्रशासन के पास आवारा मवेशियों पर कार्रवाई करने का कोई तरीका नहीं है। वहीं दबी जुबान में प्रशासन के अधिकारी मवेशियों के खिलाफ कार्रवाई करने की परेशानियां जाहिर करते हैं।  सैकड़ों बीघा चरनोई भूमि पर बाहुबलियों ने कब्जा जमा रखा है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों के पास पशुओं को चराने के लिए कोई जमीन उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते इन अनुपयोगी पशुओं को आवारा छोडऩा ही उनकी मजबूरी बन जाती है। किसानों ने मांग की है कि ग्राम की चरनोई भूमि पर ही मवेशियों को रखे जाने की व्यवस्था की जाए।

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