scriptMahabharat broke out for the throne in Ramlila | रामलीला में सिंहासन के लिए छिड़ गई महाभारत | Patrika News

रामलीला में सिंहासन के लिए छिड़ गई महाभारत

एक वर्ष बाद भी नई समिति की अधिसूचना जारी न होने से सदस्य नाराज

विदिशा

Updated: December 27, 2021 09:19:26 pm

विदिशा. विदिशा की रामलीला अपने 121 वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह रामलीला अपने अनूठे इतिहास, परंपराओं, संविधान और गजट नोटीफिकेशन के साथ ही लीला दर्शन में भी प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में भी सबसे अलग है। लेकिन अब इस रामलीला मेला समिति में भी सिंहासन के लिए महाभारत छिडऩे लगी है। अति महत्वाकांक्षाओं और राजनीति के समावेश के कारण रामलीला समिति की गरिमा प्रभावित हो रही है और इसका असर आने वाले वर्षों में रामलीला दर्शन तथा मेले पर भी पडऩा तय माना जा रहा है। हाल ही में हुई रजिस्टर्ड सभा की बैठक में इस बात का अंदाज लग गया कि करीब एक साल बाद भी जब रजिस्टर्ड सभा द्वारा तय नए सदस्यों का गजट नोटीफिकेशन नहीं हुआ तो उनका गुस्सा किस तरह फूटने लगा हैै। इस बैठक में कुछ सदस्यों ने प्रशासन की कार्यशैली को आड़े हाथों भी लिया और एक ही सवाल किया कि एक साल बाद भी गजट नोटीफिकेशन क्यों नहीं हो पा रहा है?
रामलीला में सिंहासन के लिए छिड़ गई महाभारत
रामलीला में सिंहासन के लिए छिड़ गई महाभारत

रामलीला सभा की सालाना बैठक अयोध्या भवन में सभा के अध्यक्ष जगदीश नारायण श्रीधर की मौजूदगी में शुरू हुई तो सबसे पहले उन सदस्यों ने ही सवाल उठाया जिनके नाम रामलीला मेला समिति के लिए रजिस्टर्ड सभा ने 16 जनवरी 2021 को ही प्रशासन के पास भेज दिए थे। ऐसे सदस्यों ने सवाल किया कि करीब एक साल पहले नाम शासन के पास भेजे जाने के बाद भी उनके नामों का गजट नोटीफिकेशन क्यों नहीं हो पा रहा हैï? यदि रजिस्टर्ड सभा के द्वारा चयनित और शासन को भेजे गए नाम ही अधिसूचित नहीं हो पा रहे हैं तो रजिस्टर्ड सभा और उसके महत्व पर ही सवालिया निशान लगता है। इस पर समिति के सचिव सुरेश शर्मा शास्त्री ने बताया कि रामलीला मेला समिति का कार्यकाल 31 जनवरी 2021 को पूरा हो गया है, इसके पहले 16 जनवरी 2021 को रामलीला सभा द्वारा नए सदस्यों के नाम चयनित कर प्रशासन को भेजे थे, लेकिन उन पर शासन-प्रशासन की मुहर अब तक नहीं लग सकी है। सभा में यह निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधि मंडल इस विषय में शीघ्र ही कलेक्टर से मिलकर वस्तुस्थिति का पता लगाए, जिससे रामलीला के विधान 1956 की धारा 21 के तहत नियमानुसान नई समिति कार्य शुरू कर सके।
बैठक में समिति के उपाध्यक्ष कीर्तिप्रकाश शर्मा, श्यामसुंदर शर्मा, नर्बदाप्रसाद शर्मा, नारायण प्रसाद शर्मा, कैलाश नारायण शर्मा, प्रेमनारायण शर्मा, हरिशंकर अग्रवाल, रवि चतुर्वेदी, सतीश व्यास, डॉ. सुधांशु मिश्र, डॉ अनिल शर्मा, संतोष जाट, मनोज शर्मा, मदनकिशोर शर्मा, शिवराम शर्मा सहित 80 से ज्यादा सदस्य शामिल थे।
सचिव पद पर भी चल रही रार
रामलीला मेला समिति के मानसेवी सचिव का पद भी शासन स्तर पर ही तय होता है, लेकिन डॉ सुधांशु मिश्र को हटाकर राजीव शर्मा को मानसेवी बनाए जाने के बाद से ही इस पद पर रार लगातार जारी है। अपने राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर 6-7 लोग इस पद पर आसीन होने के लिए जोर लगा रहे हैं। हालांकि इस मसले पर सरकार अभी खामोश है। लेकिन रामलीला मेला समिति में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और रामलीला से जुड़े लोग अंदर ही अंदर दो स्पष्ट धड़ों में बंटे हुए हैं। रामलीला और मेले पर इस सबका क्या असर पड़ेगा, यह समय बताएगा।

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