नाममात्र के लिए चल रहीं कई आंगनबाडिय़ां

केन्द्र पर 60 से अधिक बच्चे है दर्ज, लेकिन मौके पर मिले मात्र 4 बच्चे...

By: दीपेश तिवारी

Published: 24 Jul 2018, 10:45 AM IST

विदिशा/सिरोंज. कुपोषण के दंश से पूरा जिला पीडि़त है। नीति आयोग की रिपोर्ट भी महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने को काफी है, लेकिन फिर भी हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे। कुपोषण मिटाने के प्रयास मात्र बैठकों और कागजों तक सिमट कर रह गए नजर आते हैं। गांव-गांव में बच्चों की फजीहत हो रही है। बच्चों के पोषण के लिए आंगनबाडिय़ां संचालित हैं, लेकिन वहां सिर्फ खानापूर्ति के कुछ नहीं हो पा रहा है।

तिलियाहार के आंगनबाडी केन्द्र पर 60 से अधिक बच्चे दर्ज है, लेकिन मौके पर मात्र 4 बच्चे ही मिले। ये ही चार बच्चे भोजन कर रहे थे। इन बच्चों को भी अपने भोजन के लिए घर से बर्तन लाना पड़ते हैं। केन्द्र पर जो पोषण आहार के पैकेट (टीएचआर) भेजे गए हैं उनकी बोरियां पैक रखी हैं।

बच्चों और उनके पालकों ने बताया कि केन्द्र पर बच्चों और गर्भवती माताओं को कोई पोषण आहार नहीं दिया जाता। बच्चों को कुछ सिखाया भी नहीं जाता। यही कारण है कि अधिकांश लोग अपने बच्चों को केन्द्र पर भेजते भी नहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का कहना है कि मैं अकेली हूं, सहायिका नहीं है। बर्तन घर पर रखे हैं, पानी की समस्या के कारण केन्द्र पर बर्तन नहीं लाते। हमारा भवन भी नहीं है, स्कूल के अतिरिक्त कक्ष में केन्द्र लगाते हैं।

कई ग्रामों में है यही हाल
यह स्थिति नेकान, बरखेडी आदि ग्रामो में भी देखने को मिली। दीपनाखेड़ा के कई ग्रामीणों ने गांव की आंगनबाडी केन्द्र नियमित नही खुलने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी की है। रवि रघुवंशी ने बताया कि हमारे यहां की आंगनबाडी केवल खानापूर्ति के लिए संचालित हो रही हैं, वह न तो नियमित खुलती हैं और न ही उनमें बच्चों को पोषण आहार मिलता है।

उपस्थिति बताकर निकाल लेते हैं राशि
सूत्रों के मुताबिक आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन माह की जगह एक माह का टीएचआर ठेकेदार द्वारा दिया जाता है। इसका फायदा कई कार्यकर्ता भी उठा रही है और वह उसका वितरण नही करतीं। जब भी ग्रामीण इसकी बात करते है तो ऊपर से पोषण आहार नही आने का बोल दिया जाता है। कई जगह इस पोषण आहार का उपयोग संबंधितों के मवेशियों के लिए हो रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की मौजूदगी बहुत कम होती है, जबकि इनकी उपस्थिति 70-80 फीसदी बताकर राशि निकाली जाती है।

ठेकेदार ने नोटिस का नही दिया जबाब
पूर्व में पत्रिका की खबर के बाद परियोजना अधिकारी अनिल चौधरी ने टीएचआर वितरण को लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था, लेकिन ठेकेदार ने नोटिस का जबाब देना भी जरूरी नही समझा। इससे ऐसा लगता है कि जिले के अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह गोरखधंधा चल रहा है। जिला स्तर पर टीएचआर का जिसे ठेका दिया गया है, उसी व्यक्ति ने ब्लॉक स्तर पर पेटी ठेका दे रखा है और हर माह की जगह तीन माह में एक बार पोषण आहार भेजकर गोलमाल किया जा रहा है।

हमने ठेकेदार को नोटिस दिया है जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है। यदि केन्द्रों के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है तो जांच करके संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- अनिल चौधरी, परियोजना अधिकारी सिरोंज

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दीपेश तिवारी
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