राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने सुनी बच्चों की समस्याएं

विदिशा-रायसेन जिले के कुल सवा दो हजार से अधिक आवेदन आए...

विदिशा। जिला पंचायत में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की खंडपीठ आयोजित की गई। जिसमें आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो और राज्य बाल संरक्षण आयोग सदस्य बृजेश चौहान और द्रविंद्र मोरे ने विदिशा और रायसेन जिले के बच्चों की समस्याएं सुनीं और उनका निराकरण करवाया। इस दौरान विदिशा-रायसेन जिले के कुल सवा दो हजार से अधिक आवेदन आए। जो अब तक आयोग द्वारा लगाई गई कुल 42 बेंचों का देशभर का सर्वाधिक बड़ा आंकड़ा।

सुबह नौ बजे से आवेदकों के पंजीयन शुरु हो गए थे। नौ बजे के पहले ही जिला पंचायत में दोनों जिलों के आवेदक विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए पहुंचने लगे थे। दोनों जिलों के आवेदकों के पंजीयन के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे। वहीं मेडिकल बोर्ड में लगाया गया था। जहां निशक्तों निशक्तता प्रमाणपत्र इस दौरान बनाए गए। वहीं जिला विधिक सहायता शिविर का आयोजन भी किया गया।

विदिशा। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की बेंच के दौरान मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारी और फरियादी।
IMAGE CREDIT: Anil Soni

जाति प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर हॉस्टल से निकाला
आयोग के समझ अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं मढ़ीचौबीसा निवासी राजकुमारी आदिवासी ने बताया कि उनके बच्चे को उदयपुर छात्रावास में एक साल तक तो पढऩे दिया, लेकिन फिर इस साल यह कहकर बाहर निकाल दिया कि उसका जाति प्रमाणपत्र नहीं है।

इसी तरह एक बच्चे को बरेठ से निकाल दिया गया। तब से ही वह जाति प्रमाणपत्र के लिए भी भटक रहीं हैं, लेकिन नहीं बन सका। आयोग अध्यक्ष कानूनगो ने महिला की बात सुनकर आदिम जाति कल्याण विभाग अधिकारी को तलब किया।

पता चला कि एक-दो नहीं, ऐसे करीब 20 बच्चों को छात्रावास से निकाल दिया गया है, जिनके जाति प्रमाणपत्र नहीं बन सके थे। इस पर आयोग अध्यक्ष ने खासी नाराजगी जताई और एक माह के भीतर जाति प्रमाणपत्र बनवाकर बच्चे का प्रवेश उसी हॉस्टल में करवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

स्टेशन के पास बच्चे करते हैं सिलोचन का नशा...
रोटरी क्लब अध्यक्ष सुजीत देवलिया ने आयोग अध्यक्ष से शिकायत की कि रेलवे स्टेशन के पास दर्जनों बच्चे सिलोचन (सूंघने वाला नशा) आदि का नशा करते हैं। इसलिए सिलोचन को बच्चों को सीधे बेचना बंद करवाया जाए। वहीं जिले में थैलेसीमिया के 40 बच्चे मरीज हैं।

जिन्हें दी जाने वाली आयरन चिलेशन दवा से लाभ नहीं मिलने के कारण इसे बदला जाए। ऐसे बच्चों की पूर्ण शिक्षा निशुल्क की जाए, ऐसे बच्चों के माता-पिता यदि सरकारी नौकरी में हैं, तो उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा वाली जगह पर पदस्थ किया जाए।

इन परिवारों को गरीबी रेखा की पात्रता दी जाए। वहीं आदिम जाति छात्रावास में जली रोटियां बच्चों को खिलाने की शिकायत जनसुनवाई में भी कई गई थी, इस मामले में उचित कार्रवाई संबंधितों के खिलाफ की जाए।

स्कूलों की खस्ताहाल पर डाला प्रकाश
मां सरस्वती छात्र संघ के युवाओं ने आयोग के समक्ष अलग-अलग करीब ३० से अधिक आवेदन दिए। जिसमें गंजबासौदा और शमशाबाद क्षेत्र के करीब 30 से अधिक ऐसे सरकारी स्कूलों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। शिकायत में कहा गया कि इन स्कूल में बाउंड्रीवॉल नहीं है, पीने के पानी इंतजाम नहीं हैं, फर्नीचर नहीं है, परिसर में गंदगी व्याप्त है, स्कूल तक पहुंच मार्ग ही नहीं है। जिससे बच्चे परेशान होते हैं।

Anil kumar soni Desk
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