नल-जल योजनाएं बंद, 115 गांव प्यासे

पानी के लिए जूझ रही सवा लाख से अधिक आबादी

By: Jagdeesh Ransurma

Published: 15 Apr 2016, 11:53 PM IST

 
विदिशा. पेयजल व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी अब ग्रामीण क्षेत्रों में भारी पड़ रही है। गांव में जल व्यवस्था के लिए नल जल योजनाओं पर तो काम हुआ, लेकिन समय पूर्व इन्हें चालू कराने पर ध्यान नहीं दिया। अब हालत यह कि करीब 115 गांवों की योजनाएं बंद है। इस कारण इन गांवों की करीब 1 लाख 32 हजार की आबादी पानी के लिए भटक रही है।
मालूम हो कि  समय-समय हुई बैठकों में सांसद सुषमा स्वराज, लक्ष्मीनारायण यादव एवं कलेक्टर एमबी ओझा गर्मी से पूर्व इन योजनाओं को दुरुस्त करने के निर्देश देते आए, लेकिन उनके निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया गया।

 क्षतिग्रस्त पाइप लाइनें नहीं बदली जा सकी। जले ट्रांसफार्मर नहीं बदले गए। खराब या चोरी मोटरों के स्थान पर नई मोटरें नहीं लग पाई। बंद जलस्रोतों के विकल्प नहीं तलाशे गए और जनप्रतिनिधि भी इन योजनाओं के प्रति सजग नहीं रहे।

दूर से ढोते हैं पानी
समय पर ध्यान नहीं देने से इन गांवों के ग्रामीण अब दूर से पानी ढोने पर विवश हंै। कई गांवों के हैंडपंप भी बंद होने लगे हैं और कुए सूख गए हैं। जिससे पेयजल का संकट गहरा गया है। सर्वाधिक परेशानी महिलाओं और बालिकाओं को होती है, क्योंकि गंावों में वो ही पानी ढोती हैं।
Jagdeesh Ransurma
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