तीन बीघा में फैला केवल एक बूढ़े बरगद का कुनबा

पांच बीघा में था पहले एक पेड़, गांव में है लक्ष्मण जी का चबूतरा

By: govind saxena

Published: 26 Nov 2020, 08:10 PM IST

विदिशा. देखने और सुनने में बड़ा अचरज होता है कि एक ही पेड़ 3-5 बीघा क्षेत्र में फैला है। लेकिन गांव के बुजुर्ग यही बताते हैं कि कुछ वर्षों पहले तक यह बरगद का पेड़ पूरे 5 बीघा में फैला था। इसकी जड़ें शाखाओं से निकलकर जमीन में समातीं गईं और जड़ों का हर समूह एक नए पेड़ की शक््रल में बढ़कर बूढ़़े बरगद का कुनबा फैलाती गईं। लेकिन जिस बरगद के कारण पूरे गांव की पहचान है, वही अब सिमटता जा रहा है। यह अब सिमटकर 3 बीघा तक रह गया है। गांव के ही नहीं बल्कि जिले के पर्यावरण और पर्यटन के लिए भी आमखेड़ा कालू का यह अनूठा वृक्ष एक बेहतर विकल्प है, लेकिन वह तब हो पाएगा जब प्रशासन इसके रखरखाव और संरक्षण की ओर ध्यान दे। इसी बरगद श्रंखला के नीचे एक चबूतरा भी है, जिस पर लक्ष्मण जी की प्रतिमा विराजित है।
जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर नटेरन तहसील का गांव आमखेड़ा कालू की पहचान भले ही यहां का विशाल बरगद पेड़ हो, लेकिन इसका नाम आमखेड़ा आम के घने बगीचों के कारण पड़ा था। गांव के बुजुर्ग हिम् मत सिंह बताते हैं कि पहले यहां आम के खूब बगीचे थे और इतने आम गिरते थे कि बटोरे नहीं जाते थे। इसी से नाम आमखेड़ा पड़ गया। लेकिन अब आम के बगीचे बहुत कम बचे हैं। इस गांव का नाम बरगद के नाम पर क्यों नहीं, यह किसी को नहीं मालूम। वटवृक्ष परिसर में लक्ष्मण चबूतरा, राधा कृष्ण, राम जानकी और हनुमान मंदिर मौजूद है। यहां 85 वर्षीय संत मुंशीदास का भी निवास है। वे कहते हैं कि विशाल बरगद के पूरे परिसर में कभी घना अंधेरा रहता था, यहां आना आसान नहीं था, लेकिन रखरखाव के कारण यह काफी खत्म हो गया। अब भी लोग पिकनिक मनाने आते हैं, लेकिन गंदगी छोड़ जाते हैं, रखरखाव की ओर किसी का ध्यान नहीं है। हमसे जितना हो सकता है उतना साफ रखने की कोशिश करते हैं। प्रशासन ध्यान दे तो यहां का कायाकल्प हो सकता है।

govind saxena Bureau Incharge
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