उदयादित्य की नगरी बचाने का संकल्प

नगर के सुधिजनों ने बैठक कर लिया निर्णय

By: govind saxena

Published: 06 Jan 2021, 09:03 PM IST

विदिशा. हजार-ग्यारह सौ वर्ष पुरानी राजा उदयादित्य की नगरी उदयपुर में राजा के महल सहित नगरी के तमाम हिस्सों में फैले कब्जों और राजमहल के कुछ हिस्सों को निजी संपत्ति घोषित किए जाने की खबर से नगर के सुधिजनों में आक्रोश है। पत्रिका में खबर के प्रकाशन के बाद बुधवार की शाम चिंतामणि गणेश मंदिर में हुई एक बैठक में नगर के कुछ प्रबुद्धजनोंं ने राजा उदयादित्य की विरासत को बचाने का संकल्प लिया। बैठक में इस मुद्दे को लेकर 7 जनवरी को सुबह 11 बजे कलेक्टर को ज्ञापन देने का भी निर्णय हुआ।


उदयपुर की धरोहर को सहेजने और उस पर अनाधिकृत कब्जे रोकने के प्रयासों के लिए हुई इस बैठक में इतिहासकार गोविंद देवलिया ने पत्रिका में प्रकाशित इस खबर पर चिंता जताई कि राजा उदयादित्य के राजमहल का कुछ हिस्सा निजी संपत्ति घोषित कर दिया गया है। उन्होंने बैठक में कहा कि अगर दस्तावेजों में यह वैध कर दी गई है तो यह जानना अनिवार्य है कि ये कैसे संभव हुआ? दस्तावेजों में एक हजार साल पुराने महल को किसी की निजी संपत्ति कैसे घोषित कर दिया गया। इसके लिए राजस्व रिकार्ड दिखाया जाना जरूरी है। बैठक में तीरथ प्रताप सिंह दरबार ने उदयपुर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस विषय में गंभीर प्रयासों की जरूरत बताई। सनातनश्री हिउस के अध्यक्ष अतुल तिवारी ने प्रशासन सहित सरकार को भी इस बारे में अवगत कराने का सुुझाव दिया। सेवानिवृत्त व्याख्याता विजय चतुुर्वेदी ने विदिशा की विरासत को खत्म करने की साजिश बताते हुए सभी से एकजुट होकर सामने आने को कहा ताकि अपनी धरोहर को सहेजा जा सके। सनातनश्री हिउस के पूर्व अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि उदयपुर और गंजबासौदा के जागरुक लोगों को भी इस मुहिम में आगे आना होगा और तहसील रिकार्ड से यह पता लगाना होगा कि राजमहल को निजी संपत्ति में शुमार कैसे कर दिया गया। एड. अनुपम सारस्वत ने कहा कि अपनी विरासत को बचाने के लिए हर प्रयास करेंगे, उसे मिटने नहीं देंगे। प्रांतीय पंडित सभा के संयोजक संजय पुरोहित ने कहा कि यदि अभी भी हम अपनी धरोहर को नहीं संभाल पाए तो आने वाली पीढिय़ां और इतिहास हमें भी गूंगे-बहरों की श्रेणी में रखेगा। धरोहर को बचाने हर संभव प्रयास किए जाएंगे, इस मुहिम से हर वर्ग के लोगों को जोड़ेंगे। बैठक में शिवनारायण शर्मा, श्यामनारायण तिवारी, श्रीकांत दुबे, प्रीतेश अग्रवाल, रामस्वरूप आर्य, हर्ष दुबे आदि मौजूद थे।

आज प्रशासन को ज्ञापन
बैठक में हुए निर्णय के अनुसार उदयादित्य के महल और पूरे उदयपुर नगर को बचाने, अतिक्रमण से मुक्त कराने और उदयपुर को हैरीटेज टाउन बनाने की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा। इसी तरह का ज्ञापन केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मप्र की संस्कृति मंत्री और प्रमुख सचिव मप्र संस्कृति विभाग को भी भेजे जाने का निर्णय लिया गया।

कलेक्टर ने कहा-जांच कराएंगे
कलेक्टर डॉ पंकज जैन ने पत्रिका में प्रकाशित खबर राजा उदयादित्य का एक हजार साल पुराना महल अब किसी की निजी संपत्ति घोषित शीर्षक से प्रकाशित खबर पर कहा है कि वे इस मामले की जांच कराएंगे। उधर राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी ने भी इस स्थिति से राज्य और केंद्र के नेताओं और अधिकारियों को अवगत कराया है।

क्या है मामला...
इतिहासकार डॉ सुरेश मिश्र और राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी ने उदयपुर भ्रमण के दौरान मंदिर के बाद गलियों का रुख किया था। वहां उन्होंने विभिन्न स्मारकों के साथ ही राजमहल की चहारदिवारी और बुर्जों को भी देखा था। उन्होंने पाया था कि महल के काफी हिस्सों पर कब्जा हो गया है। उनमें मवेशी बांधे जा रहे हैं। जबकि महल के एक हिस्से पर तो बाकायदा निजी संपत्ति का बोर्ड लगाकर कुछ लोगों के नाम लिखे हुए थे। डॉ मिश्र और तिवारी ने इस पर चिंता जताते हुए हर हाल में इसके संरक्षण की आवश्यकता बताई थी। इसी खबर को पत्रिका ने 6 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

govind saxena Bureau Incharge
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