सार्इं के दरबार में लगी श्रद्धालुओं की भीड़, ग्रहण किया प्रसाद

सार्इं के दरबार में लगी श्रद्धालुओं की भीड़, ग्रहण किया प्रसाद

brajesh tiwari | Publish: Feb, 15 2018 09:28:07 AM (IST) Vidisha, Madhya Pradesh, India

8 क्विंटल पूड़ी व डेढ़ क्विंटल बनी थी बूंदी-सेव

विदिशा। अहमदपुर मार्ग स्थित साईं मंदिर में प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा के दूसरे दिन बुधवार को प्रसादी वितरण भंडारे का आयोजन हुआ। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भंडारे में शामिल हुए। बच्चे, महिलाएं, वृद्ध, युवा बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। मंदिर समिति के मुताबिक विदिशा जिले के अलावा नासिक, इंदौर, भोपाल, रायसेन जिले से भी श्रद्धालु साईंबाबा के दर्शन और प्रसादी ग्रहण करने आए।

सुबह मंदिर परिसर में पांच दिन से चल रहे हवन की पूर्णाहुति हुई। दोपहर 12 बजे बाबा की आरती और फिर भंडारा शुरू हुआ। दोपहर से शुरू भंडारा शाम छह बजे तक चला। इस दौरान शहर के समाजसेवी, उद्योगपति, व्यापारी आदि भंडारे में परोसनी कर रहे थे। बच्चे, महिलाएं, वृद्ध, युवा बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। मंदिर समिति के मुताबिक विदिशा जिले के अलावा नासिक, इंदौर, भोपाल, रायसेन जिले से भी श्रद्धालु साईंबाबा के दर्शन और प्रसादी ग्रहण करने आए।

इस दौरान पूरा परिसर बाबा के गीतों एवं साईंनाथ महाराज के जयकारों से गूंजता रहा। जहां प्रसादी से पूर्व श्रद्धालुजन फूलों से सजे भव्य मंदिर में बाबा की प्रतिमा के दर्शन कर रहे थे। महोत्सव के दौरान शिरडी से आए विद्वान शंकरबाबा का समिति पदाधिकारियों व वरिष्ठ नागरिकों ने सम्मान किया।

मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य रिटायर्ड पीएचई एसडीओ एसके ठाकुर ने बताया कि इस महाप्रसादी भंडारे के आयोजन में 8 क्विंटल गेहूं की पूड़ी बनवाई। इसके अलावा डेड़ क्ंिवटल बेसन से बूंदी व सेव बनवाए गए हैं। प्रसादी तैयार करने का कार्य 21 लोगों की टीम ने किया। उन्होंने बताया कि 10 से 15 हजार के बीच श्रद्धालुओं ने यहां प्रसादी ग्रहण की।

 

इधर, रथ पर सवार होकर निकले भगवान श्रीजी

मंडीबामोरा में संयम स्वर्ण महामहोत्सव पर आयोजित पंचकल्याण एवं गजरथ महोत्सव पर मुनिश्री प्रशांत सागर और मुनिश्री अजितसागर महाराज के सानिध्य में घटयात्रा निकाली गई। यह यात्रा चंद्रप्रभु मंदिर से शुरू होकर समर्पण परिसर पहुंची। घटयात्रा में विभिन्न संगठनों के वाद्ययंत्रों, गायकों और नृत्य मंडली ने समां बांध दिया। नगर को सजाया गया था। घटयात्रा में शामिल हाथी आकर्षण का केन्द्र रहे। श्रीजी की प्रतिमा रथ पर विराजित थी। पंचकल्याणक के मुख्य पात्र और इंद्र-इंद्राणी अपने सिर पर कलश लिए चल रहे थे। भगवान के माता पिता, सौधर्म इंद्र, महायज्ञ नायक और मुख्य पात्र बग्गियों पर सवार थे।

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