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छाया गंजबासौदा के शरद की आवाज का जादू, सारेगामापा के सेकंड रनरअप बने

अपनी आवाज और गायकी के जादू से पूरी दुनियां को चमत्कृत कर देने वाले गंजबासौदा के शरद शर्मा ने जीटीवी के रियलिटी शो सारेगामापा के फायनल में सेकंड रनरअप का खिताब जीता

विदिशा

Published: March 07, 2022 09:47:28 pm

विदिशा. अपनी आवाज और गायकी के जादू से पूरी दुनियां को चमत्कृत कर देने वाले गंजबासौदा के शरद शर्मा ने जीटीवी के रियलिटी शो सारेगामापा के फायनल में सेकंड रनरअप का खिताब जीता है। इस ग्रांड फिनाले में नीलांजना प्रथम, राजश्री द्वितीय और गंजबासौदा के शरद शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। वे मंगलवार को सुबह पंजाबमेल से अपने घर लौट रहे हैं। उनके स्वागत के लिए विदिशा और गंजबासौदा स्टेशन पर तैयारियां की गई हैं।
शरद के बड़े भाई और ग्रांड फिनाले के साक्षी रहे पं. अभिषेक कृष्ण शास्त्री शरद के प्रदर्शन से प्रफुल्लित हैं। उन्होंने बताया कि ग्रांड फिनाले में बहुत कड़े मुकाबले में केवल शरद ही पुरुष प्रतिभागी के रूप में चयनित हुआ। प्रथम नीलांजना, द्वितीय राजश्री और तृतीय शरद रहे। यानी शरद इस मुकाबले में टॉप थ्री में शामिल रहा। जबकि इस रियलिटी शो की शुरुआत 8 पुरुष और 8 महिला प्रतिभागियों यानी 16 प्रतिभागियों के साथ हुई थी। फायनल मुकाबले में शरद को पांच लाख रुपए नकद दिए जाएंगे, जबकि अन्य प्रायोजकों ने भी उन्हें नकद पुरस्कार की घोषणा की है।
छाया गंजबासौदा के शरद की आवाज का जादू, सारेगामापा के सेकंड रनरअप बने
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मोहक गायन और चंचल स्वभाव के साथ जयश्री राम के उद्घोष
पं. अभिषेक कृष्ण अपने भाई शरद के बारे में बताते हैं कि मोहक तथा गंभीर गायन के साथ ही शरद का चंचल स्वभाव, खाने-पीने में भारी रूचि के अलावा मंच पर जय श्रीराम के उद्घोष से उनकी उपस्थिति ही उनकी पहचान बनी। वे मंच पर जयश्री राम के उद्घोष के साथ ही आते थे, हर शो में उनके माथे पर तिलक और सिर पर शिखा यानी चोटी अवश्य रहती थी। यह शरद और हमारे सनातन धर्म की पहचान है। शरद के जयश्री राम के उद्घोष का असर इतना था कि उनके मंच पर पहुंचते ही जज खुद ही जयश्री राम कहने लगते थे। जब फायनल मुकाबले के बाद शरद शर्मा मुंबई के एक मॉल में पहुंचे तो वहां सैंकड़़ों लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली और वहां भी जयश्री राम गूंज उठा।

दुनिया में अपनी आवाज पहुंचा सका-शरद
परिणाम घोषित होने के बाद शरद के बड़े भाई पं. अभिषेक कृष्ण के अनुसार शरद का यही कहना है कि प्रथम या द्वितीय मायने नहीं रखता। मुझे इस बात से ही अत्यंत खुशी है कि इतने बड़े मंच पर मुझे गायन का मौका मिला और मैं अपनी आवाज दुनियां तक पहुंचा पाया। वहीं स्वयं अभिषेक कृष्ण कहते हैं कि शरद ने 7 वर्ष की उम्र से ढोलक, फिर तबला और बैंजो सीखा और बाद में गायकी शुरू की। मैं उसकी संगीत यात्रा का शुरू से निरीक्षक और परीक्षक रहा हूं। गंजबासौदा जैसे छोटे से शहर से दुनियां के इस मंच पर जगह बनाना आसान नहीं है। शरद कहता है कि संगीत ही मेरा जीवन है। शरद और संगीत दो नहीं एक ही हैं।

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