एससीएसटी एक्ट के विरोध में बनाई रणनीति

एससीएसटी एक्ट के विरोध में बनाई रणनीति

Veerendra Shilpi | Publish: Sep, 03 2018 11:08:28 AM (IST) Vidisha, Madhya Pradesh, India

एससीएसटी एक्ट के विरोध में बनाई रणनीति

विदिशा/सिरोंज. केन्द्र सरकार द्वारा जब से एससी एसटी संशोधन बिल लोकसभा में पास करवाकर लागू किया है, तभी से सामान्य वर्ग और पिछड़ा वर्ग एवं मुस्लिम वर्ग इस एक्ट से परेशान होने लगे हैं। जिसके चलते तभी से विरोध के स्वर उठ रहे थे। लेकिन अब पुरजोर तरीके से इस काले कानून के विरोध में खुलकर लोग सामने आ गए हैं। इसी को लकर रविवार को सपाक्स की तोमर गार्डन में बैठक हुई और इसका सभी ने विरोध किया।

बैठक के दौरान सर्व सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग एवे मुस्लिम वर्ग के लोग शामिल हुए। इस दौरान एससी एसटी एक्ट को लेकर विचार-विमर्श किया गया और इस कानून का अपने लिए कानून मानते हुए इसका पुरजोर तरीके से विरोध करने पर सहमति बनी। साथ ही आगामी छह सितम्बर को होने वाले भारत बंद का समर्थन करने पर समिति बनी। इसको लेकर तैयारियां शुरु की गईं। इसी क्रम में पांच सितम्बर को पुन: बैठक आयोजित की जाएगी। इस दौरान विभिन्न समाजजनों के अध्यक्ष, विभिन्न व्यपारिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा और भारत बंद में अपनी भागीदारी निभाने का आग्रह किया जाएगा।

कानून वापस नहीं होने तक रहेगा विरोध
बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार इस काले कानून को वापिस लेकर संशोधन करके पूर्व की तरह लागू नहीं करेगी तब तक विरोध जारी रहेगा। सपाक्स सदस्यों ने कहा कि आवश्यकता पडऩे पर सड़कों पर उग्र आंदोलन करने पर भी मजबूर होंगे और प्रदर्शन करेंगे। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सपाक्स सदस्यों का कहना था कि यदि अभी इस काले कानून का विरोध नहीं हुआ तो आने वाली पीढि़ के लिए यह कानून खतरा बन जाएगा।

सामाजिक स्तर पर करेंगे विरोध
वक्ताओं का कहना था कि पार्टी स्तर पर नहीं यह सामाजिक स्तर पर अभियान चलाकर इस कानून का विरोध किया जाएगा। जिसमें सभी पार्टी के जनप्रतिनिधियों को नींद से जगाने के लिए उनके समक्ष भी प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन के माध्यम से इस काम को वापस करने की मांग करेंगे। वक्ताओं का कहना था कि यदि सरकार हमारी बात नही मानेगी, तो सभी समाजजनों ने संगठित होकर इस एक्ट का विरोध करने का संकल्प लिया। इस दौरान रवि सिंह राजपूत, अनिल सिंह राजपूत, गगन सिंह राजपूत, रविन्द्र राजपूत, रवि लोधी, भूपत सिंह रघुवंशी, आदेश राजपूत, अनिल राजपूत, विक्रम सिंह, दीपेश राजपूत, किशन सोनी, जंग सिह चौहान, मनीष राजपूत, हेमेन्द्र तोमर, गोविंद चौहान, अभिषेक राजपूत, अंकित राजपूत, निखिल प्रजापति, रोहित राजपूत, हटे सिंह और हीरालाल जैन आदि मौजूद रहे।

पार्टियों के नेता भी दबी जुबान में कर रहे विरोध
वहीं पक्ष-विपक्ष के नेता, जनप्रतिनिधि भी इस एक्ट का विरोध खुलकर तो नहीं कर पा रहे हंै, लेकिन दबी जुबान में वह भी इस निर्णय को काला कानून मान रहे हैं। जिसका असर आने वाले विधान सभा चुनाव में देखने को मिलेगा। वह भी चाहते हैं कि यह निर्णय वापस हो परंतु वह पार्टीयों से नाता रखने के कारण अपनी पार्टी में किरकिरी न हो इसलिए खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

खाई बढ़ाने का किया काम
जानकारों का कहना है कि सरकार एक तरफ समान्यता और समरस्ता का भाव लाने का बोलकर वोट इक_ा करती है। वहीं दूसरी और संवर्ण, पिछडा वर्ग को दबाने के लिऐ एससी एसटी एक्ट को परिवर्तन करके कड़े नियम लागू कर दिए। इस कारण अब तीनों वर्ग के लोग जिनके पक्ष में एक्ट में लागू किया है। उनसे दूरियां बनाने लगे हैं। क्योकि कड़ा कानून होने के कारण कभी भी एक्ट लगने का डर उनको परेशान करने लगा है। ऐसा लगता है कि सरकार एक बार फिर छूआछूत को कम करने की जगह पर बढ़ाने का काम कर रही है। जिसके चलते आने वाले समय में इसके भी घातक परिणाम सामने आएंगे।

 

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