पार्थिव शरीर को मुश्किल से मिल रहे चार कंधे, अंतिम संस्कार की सामग्री मिलना भी दूभर

समाजसेवी विकास पचौरी खुद के वाहन और खुद की सामग्री से करा रहे अंतिम संस्कार

By: govind saxena

Updated: 18 Apr 2020, 08:08 PM IST

विदिशा. कोरोना की त्रासदी घर में बंद लोगों के लिए ही नहीं बल्कि लॉक डाउन के दौरान दुनियां को अलविदा कह जाने वाले लोगों के लिए भी कम नहीं है। लोगों के पार्थिव शरीर को चार कदम तक ले जाने के लिए चार कंधे भी मिलना मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं जब पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम पहुंच जाता है तो वहां भी चिता के लिए लकड़ी-कंडे ढोने के लिए लोग नहीं मिलते। ऐसे में कई शवों के अंतिम संस्कार में भी औपचारिकता करना पड़ रही है और मृतक के साथ आने वाले 1-2 परिजन मुश्किलों से जूझते रहते हैं।


अंतिम सेवा वाहन चलाने वाले समाजसेवी विकास पचौरी ने बताया कि शवों के साथ आने वाले लोग भी इन दिनों नाममात्र के मिल रहे हैं। हाल ही में राजीवनगर में मनकोबाई लोधी की मृत्यु हुई। उनके साथ मात्र 4-5 लोग ही थे। किसी तरह मृतका के शव को पचौरी अपने वाहन से मुक्तिधाम तक लेकर आए, लेकिन वहां भी अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री का इंतजाम नहीं हो पाया। चिता के लिए करीब 3 क्विंटल लकड़ी और 200 कंडों को ढोकर लाना भी एक बड़ी चुनौती थी। शोक में डूबे परिवार के चारों सदस्य मिलकर भी यह काम बमुश्किल कर पा रहे थे। ऐसे में मुक्तिधाम के दो कर्मचारियों ने थोड़ी मदद की, खुद पचौरी भी जुटे, लेकिन यह सभी साधन अपर्याप्त थे। किसी तरह मृतक शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। पचौरी बताते हैं कि लॉक डाउन के दौरान अंतिम संस्कार में अक्सर ये ही हालात बन रहे हैं। यहां तक कि लॉक डाउन में बाजार बंद है और अंतिम संस्कार की सामग्री मिलना भी दूभर हो रहा है। ऐसे में विकास पचौरी पार्थिव शरीरों के अंतिम संस्कार में भी अपनी सहभागिता निभाते हैं और निशुल्क रूप से अपने साधनों से न सिर्फ शव को मुक्तिधाम पहुंचाते हैं बल्कि चिता भी खुद ही सजाकर अंतिम संस्कार की सारी सामग्री भी निशुल्क मुहैया कराते हैं।

govind saxena Bureau Incharge
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