Union Budget of india : जनता की उम्मीदें और ये आशाएं होंगी पूरी!

01 फरवरी को 2020-21 का बजट Union Budget of india ...

विदिशा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी को 2020-21 का बजट Union Budget of india पेश करेंगी। वहीं माना जा रहा है कि इस बार आर्थिक सुस्ती, उच्च बेरोजगारी दर, निवेश का नहीं आना और राजकोषीय खजाने पर बढ़ता बोझ वित्त मंत्री के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। इसके साथ ही महंगाई और मंदी भी इस बजट को प्रभावित करती दिख रही हैं।

ऐसे में जानकारों की मानें तो आशा है कि इस बजट Union Budget of india में लोक लुभावने एलान किए जा सकते हैं। सुस्ती को दूर करने के लिए जनता को तमाम रियायतें भी दी जा सकती हैं।

ऐसे में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों सहित देश के विभिन्न राज्यों के नागरिकों को मोदी सरकार के इस बजट Union Budget of india से कई तरह की आशाएं बनी हुई हैं। माना जा रहा है ऐसे में जहां कुछ लोगों की हसरतें इस बजट में पूर्ण हो सकती हैं,वहीं कई लोगों की उम्मीद इस बार भी पूरी होती नहीं दिख रही हैं।

जहां एक ओर आम जनता महंगाई से निजाद चाहता है, वहीं हर किसी वर्ग की अपनी अपनी आशाएं होने से सबकी सभी आशाएं इस बजट Union Budget of india से पूरी हो, ऐसे में संभव नहीं दिख रहा है।

इनके लिए है अच्छी खबर Union Budget of india: बढ़ सकती है EPFO की पेंशन स्कीम में न्यूनतम राशि...
माना जा रहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन(EPFO) की पेंशन योजना ‘ईपीएस’ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को इस बजट Union Budget of india में अच्छी खबर मिल सकती है।

योजना के तहत न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाने की घोषणा की जा सकती है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का ऐसा मानना है। मौजूदा EPF नियमों के मुताबिक, एंप्लॉयर एंप्लॉयी के पीएफ अकाउंट में जो योगदान करता है उसमें से 8.33% हिस्सा पेंशन स्कीम में जाता है। यानी एंप्लॉयर के कुल 12% योगदान में से सिर्फ 3.87% हिस्सा ही पीएफ में जाता है।

वहीं बजट Union Budget of india में ईपीएस के अलावा अटल पेंशन योजना (एपीवाई) का दायरा बढ़ाने और एनपीएस में अतिरिक्त कर छूट की घोषणा भी की जा सकती है।

वहीं दूसरी ओर श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार जब असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और व्यापारियों तक के लिए 3,000 रुपए की पेंशन देने का प्रावधान कर सकती है तो फिर संगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को इससे कम पेंशन देने का कोई मतलब नहीं है।

सीनियर सिटिज़न्स के लिए ये है खास...
1 फरवरी 2020 को सरकार के यूनियन बजट Union Budget of india पर सारे देश की आंखें रहेंगी। वहीं सीनियर सिटिज़न्स भी बड़ी बेसब्री से इस बजट घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके बटुए में और ज्यादा पैसे आएंगे या नहीं।

बीते सालों में, जॉइंट इंडियन फैमिली ने न्यूक्लियर फैमिली का रास्ता खोल दिया है। इसका मतलब है कि आज अधिक से अधिक सीनियर सिटिज़न्स आत्मनिर्भर तरीके से अपनी सेविंग्स और इनकम के भरोसे अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।

ये चाहते हैं सीनियर सिटिजन्स?
सीनियर सिटिज़न्स के साथ बजट Union Budget of india संबंधी उम्मीदों के बारे में चर्चा करते समय, एक मुद्दा बाकी सभी मुद्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण था और वह था - टैक्स ब्रेक का मुद्दा।

वे सब यही चाहते हैं कि उनका टैक्स ब्रेक, नॉन-रिटायर्ड कामकाजी लोगों से अलग हो। टैक्स ब्रेक की इस बढ़ती मांग का कारण, उनके और दूसरों की इनकम Union Budget of india में मौजूदा अंतर है। एक सीनियर सिटिज़न जिसे पेंशन नहीं मिलती है वह बैंक सेविंग्स और डेट इन्वेस्टमेंट्स जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट्स से होने वाले इंटरेस्ट इनकम पर निर्भर रहता है।

इस मामले में उनकी चिंता का विषय, इंटरेस्ट रेट में होने वाला उतार-चढ़ाव है जिससे उनकी इनकम कम हो सकती है। दूसरी तरफ, पेंशन इनकम पर निर्भर रहने वाले सीनियर सिटिज़न्स को सेहत और सामाजिक सुरक्षा Union Budget of india जैसी अन्य असुरक्षा की भी चिंता सताती रहती है।

अभी सीनियर सिटिज़न्स यानी 60 से 80 साल की उम्र के लोगों के लिए 3 लाख रुपये की इनकम तक टैक्स माफ़ है। सुपर सीनियर सिटिज़न्स यानी 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपए की इनकम Union Budget of india तक टैक्स माफ़ है।

ऐसे में रिटायर्ड लोग चाहते हैं कि यह अंतर ख़त्म हो जाए क्योंकि कई लोगों के पास, पेंशन और इन्वेस्टमेंट को छोड़कर इनकम का कोई अन्य साधन Union Budget of india नहीं है। उनका मानना है कि सबके लिए 5 लाख रुपए की छूट सीमा तय की जानी चाहिए ताकि सभी सीनियर सिटिज़न्स पर टैक्स का बोझ कम हो सके।

ऐसे में जानकारों के अनुसार सरकार सीनियर सिटिज़न्स को महंगाई को मात देने वाले सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस देने के बारे में सोच सकती है।


क्या कहते हैं विदिशा के लोग....
मध्यप्रदेश के विदिशा के लोगों को भी इस बार के बजट Union Budget of india से बहुत आशा है। यहां रहने वाली गृहणियों के अनुसार सरकार को गैस सिलैंडर सहित किचन का इस बजट में खास ख्याल रखना चाहिए। वहीं कामकाजी महिलाएं भी सबसे पहले किचन को प्रमुख मानती हैं, उनका कहना है घर का बजट ही मुख्य रूप से लोगों को प्रभावित करता है।

वहीं बेरोजगार युवाओं को सरकार के इस बजट Union Budget of india में नौकरियों की उम्मीद है, उनका कहना है कि सरकार को नए रोजगारों के सृजन के लिए इस बजट में नए प्रावधान लाने होंगे। ताकि बेरोजगारी में कमी आए।

वहीं आम आदमी Union Budget of india महंगाई व पेट्रोल डीजल के रेटों में वृद्धि से त्रस्त है, वह मुख्य रूप से महंगाई में कमी व पेट्रोल डीजल के दामों में गिरावट चाहता है।

वहीं छोटे दुकानदार कुछ राहत की उम्मीद सरकार से बांधे हुए है, उनका कहना है सरकार कुछ रियायत दे। तो वे भी कुछ अच्छी सेविंग कर सकें।

वित्त वर्ष 2019-20 की आर्थिक समीक्षा : Economic review ...
वहीं दूसरी ओर संसद में शु्क्रवार को पेश की गई वित्त वर्ष 2019-20 की आर्थिक समीक्षा Union Budget of india में कहा गया कि देश की आर्थिक वृद्धि दर में जितनी नरमी आनी थी, वह आ चुकी है और अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 6 से 6.5% के बीच रहेगी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तुत सर्वे में चालू वित्त वर्ष Union Budget of indiaमें आर्थिक वृद्धि दर 5 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। समीक्षा में कहा गया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर कमजोर होने और देश के वित्तीय क्षेत्र की समस्याओं के चलते निवेश धीमा होने से भारत पर असर पड़ रहा है। इसके चलते चालू वित्त वर्ष में घरेलू आर्थिक वृद्धि दर Union Budget of india एक दशक के निचले स्तर पर आ गई है।

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दीपेश तिवारी
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