अनोखा गांव : पंचायत बासौदा विधानसभा में, गांव कुरवाई विधानसभा में

गांव के पांव...

By: govind saxena

Published: 22 Oct 2020, 08:32 PM IST

गांव-सुनारी
पंचायत-डिढौली
तहसील-गंजबासौदा(जिला विदिशा)
आबादी- 1200


बेजोड़ शिल्प के प्रतीक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर उदयपुर से मात्र 4 किमी और विदिशा से 55 किमी दूर बसा गांव सुनारी अतीत में पत्थरों की शिल्प कार्यशाला रहा है। विष्णु के चौबीस रूपों की प्रतिमाएं यहां होने का अनुमान है। इसमें से करीब 14 प्रतिमाएं अभी तक मिल भी चुकी हैं। शिल्प भी ऐसा कि नजरें जमी रह जाएं। प्रतिमाओं के साथ ही ग्रामीणों को कुछ औजार भी मिले हैं, जिनसे प्रतिमाएं गढ़ी जाती थीं। यहां के ग्रामीण अपने गांव की विरासत को सहेजने में भी बहुत चौकस है। पहले कुछ प्रतिमाओं की तस्करी हुई तब से वे अलर्ट रहने लगे हैं। करीब 25 वर्ष पहले गरूढ़ासीन विष्णु की अनूठी प्रतिमा को ग्रामीणों के सहयोग से ही तस्करों के हाथों चोरी जाने से बचाया था। प्रशासकीय और सियासी तौर पर भी यह गांव अनूठा है। सुनारी एक ऐसा गांव है, जिसकी पंचायत गंजबासौदा विधानसभा में शामिल है, जबकि सुनारी गांव कुरवाई विधानसभा में आता है। बहरहाल रघुवंशी बाहुल्य यह गांव अपनी पुरासंपदा के प्रति बहुत जागरुक और खुशहाल है।

सरपंच से काम तो बासौदा, विधायक से काम तो कुरवाई
पत्रिका से चौपाल चर्चा में गांव के बुजुर्ग सौदानसिंह रघुवंशी, चंदनसिंह, घनश्याम सिंह, रामकरण सिंह और युवा से मुलाकात होती है। सामने ही भव्य रामजानकी मंदिर है। ग्रामीण बताते हैं कि कभी यह गांव जमीदारों का गांव था। ग्रामीण बताते हैं कि इस गांव का नसीब दो क्षेत्रों से बंधा है। पंचायत मुख्यालय डिढौली है, जिसमें डिढौली, बेंहटा और सुनारी गांव शामिल हैें। इनमें से डिढौली और बेंहटा पूरी तरह गंजबासौदा विधानसभा में हैं। जबकि सुनारी गांव कुरवाई विधानसभा में है। यानी सरपंच, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील से कोई काम हो तो बासौदा विधानसभा का रुख करना पड़ता है और यदि विधायक से काम हो तो कुरवाई जाना पड़ता है।

खेती, पशु पालन और मजदूरी ही रोजगार
ग्रामीण बताते हैं कि गांव में खेती, पशु पालन और मजदूरी का ही काम होता है। सिंचाई के लिए लोगों के या तो खुद के साधन हैं या फिर असिंचित खेती है। केवटन नदी है, लेकिन उसका पानी सूख जाता है। गेंहू-चना और सोयाबीन ही ज्यादातर बोया जाता है। यहां के लोग बासौदा-उदयपुर और बरेठ आदि मजदूरी के लिए जाते हैं। नल जल योजना नहीं है, हैंडपंप और खुद के बोर से पानी का इंतजाम होता है। गांव का मुख्य खासकर मंदिर के सामने वाला पूरा हिस्सा सीमेंट कांक्रीट का है। रामजानकी का यह मंदिर पूरी तरह ग्रामीणों के सहयोग से बना है और आस्था का केन्द्र भी है।

तस्करों से बचाने घरों में रखी है पुरासंपदा
यह ग्रामीणों की जागरुकता का ही प्रमाण है कि नदी से मिली बहुमूल्य प्रतिमाओं को उन्होंने तस्करों से बचाने के लिए अपने घर-दहलान में सहेज रखा है। घर और दहलान में 3 से 6 फीट तक की विष्णु प्रतिमाएं प्रमुख हैं। यज्ञ वराह की एक अनुपम प्रतिमा जिला संग्रहालय पहुंच चुकी है, जबकि दूसरी प्रतिमा यहां मंदिर में रखी है। दसभुजी गणेश भगवान की दुर्लभ और भव्य प्रतिमा मास्टरपीस है। विशाल शिवलिंग सहित राजाओं की प्रतिमा भी यहां मौजूद हैं। नदी में पानी कम होने पर दिखाई दीं इन प्रतिमाओं को ग्रामीणों ने ट्रेक्टर ट्रालियों और अपने कंधों पर रखकर सुरक्षित निकाला है। तस्कर दो-तीन प्रतिमाएंं ले जा चुके हैं, जबकि दो प्रतिमाओं को रस्सियों से बंधा हुआ ग्रामीणों ने ही खोदा था।

जमीन देने को तैयार ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव की पुरासंपदा को जिला प्रशासन विदिशा ले जाना चाहता है, कुछ प्रतिमाएं जबरन ले भी गया। लेकिन अब ऐसा नहीं होने देंगे। हमारे गांव में ही पुरास्मारक बने, हम जमीन देने को तैयार हैं। लेकिन गांव की संपदा गांव में ही रहेगी, जिससे हमारे गांव की पहचान होगी और लोग सुनारी देखने आएंगे।

गांव की ताकत...
1. पुरासंपदा से खूब समृद्ध है गांव।
2. ग्रामीण जागरुक हैं, पर्यटन का महत्व समझते हैं।
3. पानी की कमी के बावजूद खेती और पशुपालन पर जोर।
4. उपचार और हायरसेकंडरी के लिए उदयपुर नजदीक।


गांव की कमजोरी...
1. उदयपुर-बेंंहटा के बीच बायपास नहीं है।
2. एक ही संकरे रास्ते के कारण हार्वेस्टर, बोरिंग मशीन नहीं आ पाती।
3. पुरा प्रतिमाओं को प्रदर्शन के लिए कोई स्थान नहीं।
4. पर्यटन स्थल के रूप में सुनारी को महत्व नहीं मिला।

govind saxena Bureau Incharge
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