
शिशु बगुला दो दिन से भूखा प्यासा अपनी मां के शव के इर्द गिर्द घूम रहा है
विदिशा. मंगलवार को पशु पालन उपसंचालक कार्यालय परिसर में काटे गए पेड़ोे पर हजारो बगुलों का आशियाना था। अंडे थे, नवजात बच्चे थे, उनकी मांए थीं। लेकिन अचानक से चले आरे से अंजान बगुलों में खलबली मच गई। अधिकांश बगुले अपना घरौंदा छोड़कर जाने का मन नहीं बना पाए थे, ऐसे में अपने बच्चों और अंडो को सहेजते कई बगुले पेडों की कटती शाखाओं के साथ ही घौंसलों सहित जमीन पर आ गिरे। अंडे फूट गए, कई शिशु मर गए और शाखाओं के नीचे दबने से कई बगुलोें की मौके पर मौत हो गई। करीब 50 से ज्यादा बगुलों ने दम तोड दिया। घटना के दो दिन बाद भी सैंकडों बगुले जैसे सदमे में हैं, कई बच्चे जो अभी उड़ना भी नहीं जानते, जिनके शरीर पर रोम तक नहीं आया, वे कहां जाएं? शायद इसी चिंता और अपने मरे हुए साथियों के मातम मेें बगुलों का पूरा समाज जैसे अभी भी कटे हुए पेड़ों की शाखाओे पर ही डेरा डाले गुमसुम से बैठा हैें। ऐसे में ही कई अत्यंत मार्मिक दृश्य सामने हैें। अंडों और बच्चोें को सहेजती मां ने घौंसला नहीं छोड़़ा तो उसके ऊपर पेड़ की शाखा आ गिरी होगी। अंडे और बच्चे को बचाने में मां ने अपने प्राण दे दिए। उसकी दबकर मौत हो गई। लेकिन इससे अंजान सा शिशु बगुला दो दिन से भूखा प्यासा अपनी मां के शव के इर्द गिर्द घूम रहा है। यह दृश्य काफी भावुक कर देने वाला था। करणी सेना ने पशु पालन विभाग परिसर में पेड़ों के कटने और उन पर रह रहे हजारों बगुलों के बेघर होने और मरने के विरोध में परिसर के सामने ही मरे हुए परिंदो, उनके लाचार से शिशुओं और अंडों को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया।
कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने पत्रिका में इस पूरे मामले के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने एडीएम अनिल डामोर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उधर वन विभाग के प्रभारी रेंजर सागर श्रीवास्तव ने मौके पर पहुंचकर बताया कि इस मामले को वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने भी संज्ञान में लिया है और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत इसमें कार्रवाई होगी।
Published on:
10 Aug 2023 09:09 pm
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