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मासूम अधिकारियों को नहीं पता कि आंगनबाड़ी में भोजन तक नसीब नहीं

कहीं एक माह से भोजन नहीं, कहीं वजन मशीन खराब, फिर भी आंकड़ों में सब ओके

विदिशा

Updated: September 12, 2022 09:41:58 pm

विदिशा. कुपोषण से पीडि़त विदिशा जिले में सब कुछ ठीक है बताने की परंपरा का ही नतीजा है कि समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं लेतीं। आंकड़ों में सब कुछ ओके बताकर अपनी वाहवाही लूटने वाले अधिकारी ग्रामीण अंचल में जाकर आंगनबाडिय़ों का रुख तक नहीं करते। उन्हें यह तक नहीं मालूम कि उनके क्षेत्र की आंगनबाडिय़ों में एक-दो दिन नहीं बल्कि एक-एक माह से बच्चों को भोजन तक नहीं बंट रहा है। वजन कब लिया जा रहा है कब नहीं, इसकी भी कोई फिक्र नहीं। वजन तौलने की मशीन खराब पड़ी है लेकिन मनमाफिक वजन रिकार्ड में दिखाया जा रहा है, यही कारण है कि कागजों में सब कुछ ठीकठाक दिखने वाले जिले में सब ठीक है नहीं।
मासूम अधिकारियों को नहीं पता कि आंगनबाड़ी में भोजन तक नसीब नहीं
मासूम अधिकारियों को नहीं पता कि आंगनबाड़ी में भोजन तक नसीब नहीं
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केस:1, आंगनबाड़ी केंद्र कोलुआ

नटेरन ब्लॉक का ग्राम कोलुआ, यहां की आंगनबाड़ी में पदस्थ सहायिका पिश्ताबाई बताती हैं कि यहां 40 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन भोजन एक माह से नहीं बंटा। कार्यकर्ता की गैरहाजिरी के कारण वे ज्यादा नहीं बता सकीं। कहती हैं कि नाश्ता आता है वही देकर बच्चों को वापस कर देते हैं।
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केस:2 आंगनबाड़ी केंद्र मुस्करा

लटेरी ब्लॉक के ग्राम मुस्करा में आंगनबाड़ी केंद्र का नया भवन बन चुका है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण भवन का विवाद उच्च न्यायालय में है। ग्रामीण बताते हैं कि प्रायवेट जमीन को सरकारी बताकर अधिकारियों ने यहां आंगनबाड़ी केंद्र बनवा दिया, इसके बाद से ही मामला न्यायालय में है। यहां का आंगनबाड़ी केंद्र कार्यकर्ता सुनीता यादव के घर में संचालित है। यहां 85 बच्चे दर्ज बताए गए, हालांकि दोपहर 12 बजे यहां एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। केंद्र पर बच्चों का वजन होता है? इस सवाल पर कार्यकर्ता के परिजन बोले-हां, नियमित होता है। उन्होंने वजन का रजिस्टर बताया जिसमें फरवरी 2021 के बाद से कोई एंट्री नहीं थी। वजन कैसे नापते हो? परिजनों ने कहा कि मशीन है। कहां है? जवाब मिलता है खराब पड़ी है। खराब है तो वजन कैसे तौला? जवाब मिला, नरसिंहपुर से मशीन ले आए थे उससे ही वजन तौला है।(जबकि नरसिंहपुर की कार्यकर्ता का कहना है कि हमारे यहां से न किसी को वजन मशीन दी गई और न ही कोई मांगने आया)। मुस्करा में बताया गया कि फरवरी से स्व सहायता समूह का पैसा नहीं आया है।
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केस:3 आंगनबाड़ी केंद्र नरसिंहपुर

ग्राम नरसिंहपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रानी यादव हैं। यहां भी कामकाज उनके परिजन ही संभालते हैं। यहां 40 बच्चे दर्ज बताए गए, इनमें से अतिकम वजन का एक बच्चा है। यहां घर पर ही भोजन बनता है, लेकिन जब पत्रिका टीम यहां पहुंची तो बताया गया कि आज यहां भोजन-नाश्ता कुछ नहीं बंटा था। बताया गया कि मई से राशन नहीं मिला, कब तक घर से खिलाएं।
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क्या कर रहे हैं पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारी...

नटेरन ब्लॉक के कोलुआ आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका पिश्ताबाई कहती हैं कि यहां एक माह से आंगनबाडी के बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा। वहीं परियोजना अधिकारी कहते हैं कि उन्हें किसी ने नहीं बताया कि यहां एक माह से खाना नहीं बंट रहा। ऐसे में सवाल यह है कि पर्यवेक्षक और सीडीपीओ कर क्या रहे हैं, जब एक-एक माह से भोजन न बंटने की जानकारी उनके पास नहीं है तो इसके लिए क्या वे जिम्मेदार नहीं हैं? लटेरी ब्लॉक के मुस्करा में बच्चों का वजन करने की मशीन लंबे समय से खराब है, वहां वजन नहीं हो रहा है, लेकिन यह लटेरी सीडीपीओ को भी नहीं पता। वे कहती हैं कि वजन तो लिखा जा रहा है, हां मैंने रिकार्ड मंगाया था, वह जरूर नहीं मिला है। यहां सवाल यह है कि मुस्करा की आंगनबाड़ी के वजन के रिकार्ड में फरवरी 2021 से एंट्री नहीं है, क्या यहां डेढ़ साल से दौरे पर कोई पर्यवेक्षक या सीडीपीओ नहीं गए। मशीन खराब है तो वजन कैसे हो रहा है। मशीन क्यों नहीं बदली गई। यहां के कार्यकर्ता परिवार के पुरुष कहते हैं कि वजन मशीन मुस्करा से लाए थे, लेकिन मुस्करा की कार्यकर्ता का कहना है कि हमारी मशीन हम किसी को हनीं देते, न कोई मांगने आता। सवाल यह है कि कितने झूठों पर टिके हैं ये आंगनबाड़ी केंद्र?
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अधिकारियों के मासूम जवाब...

नरसिंहपुर में तो राशन मिला हुआ है। वे टोंकरा से राशन उठा रहे हैं, फिर भोजन क्यों नहीं बंटा पता करती हूं। मुस्करा के वजन का रिकार्ड मैंने मंगाया था, लेकिन आया नहीं है, लेकिन वहां वजन करना बताया गया है। मैं पूरे मामले की जांच कराती हूं।
-रचना कलावत, प्रभारी सीडीपीओ लटेरी--

कोलुआ में एक माह से भोजन नहीं मिल रहा, यह मुझे नहीं पता। मुझे यहां के बारे में किसी ने नहीं बताया। दिखवा लेते हैं कि समूह द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को भोजन क्यों नहीं दिया जा रहा।
-राजेश जैन, सीडीपीओ नटेरन

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क्या आप दोषी नहीं...?

ऐसे मामलों में अधिकारियों के जवाब भी बड़े मासूमियत भरे होते हैं, वही रटेरटाए। हमें अब पता चला है, दिखवाते हैं, कहां, क्या गड़बड़ है। जांच कराएंगे दोषी होगा तो कार्रवाई होगी। अरे भाई, आपको अब पता क्यों चला है? महीने भर से भोजन नहीं, साल भर से वजन नहीं, मशीन खराब और आपको पता नहीं? ये क्या आपकी लापरवाही नहीं? क्या आप दोषी नहीं? आप पर कार्रवाई कौन करेगा?

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