संघ प्रमुख ने व्यक्तिगत भेंट की तो अभिभूत रह गए स्वयंसेवक

संघ प्रमुख ने व्यक्तिगत भेंट की तो अभिभूत रह गए स्वयंसेवक

Deepesh Tiwari | Publish: Jan, 14 2018 12:41:56 PM (IST) Vidisha, Madhya Pradesh, India

आरएसएस की बैठकों का समापन, व्यवस्था में थे करीब ढाई सौ स्वयंसेवक, भागवत की सहजता ने कर दिया भावुक

विदिशा। आमतौर पर किसी भी संस्था या संगठन के सर्वोच्च अधिकारी से वहां के निचले स्तर के व्यक्ति का मिलना आसान नहीं माना जाता, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत विदिशा में अनूठी मिसाल पेश कर गए। संघ की तीन दिनी बैठकों के समापन के बाद शनिवार की देर शाम विदिशा से रवाना होने से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस आयोजन की व्यवस्था में जुटे प्रत्येक स्वयंसेवक से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनका परिचय और कार्य पूछा।

इससे स्वयंसेवक भी अभिभूत रह गए। वे अपने इस अनूठे अंदाज में करीब ढाई सौ स्वयंसेवकों से मिले। शनिवार को संघ की क्षेत्र और विभाग स्तर की बैठकें थीं। जिनमें बाहर से आए पदाधिकारी शामिल हुए थे। बैठकों में साधारण स्वयंसेवक शामिल नहीं थे। इसलिए रवानगी से पहले भागवत इन स्वयंसेवकों से सहज तौर पर रूबरू हुए। उनसे इस आयोजन में निभाए गए दायित्व पूछे और जीवन में आगे बढऩे के गुर भी बताए।

स्वयं कार्य करके दे गए स्वयंसेवा की सीख
संघ के बारे में कहा जाता है कि इसके स्वयंसेवक अपने सारे दैनिक कार्य स्वयं करते हैं। यह बात संघ प्रमुख भागवत विदिशा में चरितार्थ कर गए। जानकारी के अनुसार इस तीन दिनी प्रवास में भागवत अपने सारे दैनिक कार्य स्वयं करते थे। वे किसी का सहयोग नहीं लेते थे। यहां तक कि विदिशा से रवानगी से पहले उन्होंने अपना बैग तक स्वयं जमाया। वे इतनी आसानी से सारे कार्य करते थे कि उन्हें देखकर एकबारगी नहीं लगता था कि वे कोई संगठन के प्रमुख हैं। उनसे सीख लेकर कई स्वयंसेवकों ने भी ठाना कि वे भी इसी तरह अपने सारे कार्य स्वयं करेंगे।

अगले दिन पता न चले कि कोई आयोजन हुआ
संघ प्रमुख भागवत ने शाम को स्वयंसेवकों से चर्चा के बाद कुछ अच्छी नसीहतें दीं। उन्होंने स्वयंसेवकों से पूछा कि इस कार्यक्रम के बाद आगे कई दिनों तक लोगों को पता चलना चाहिए क्या कि यहां कुछ हुआ? इस सवाल पर स्वयंसेवकों ने अपने अपने उत्तर दिए। जिस पर भागवत ने कहा कि नहीं पता चलना चाहिए। जैसे यह एक विद्यालय है तो आयोजन के बाद एक ही दिन में यहां की पूरी व्यवस्थाएं पूर्ववत कर दी जाएं, ताकि यहां आने वाले विद्यार्थियों को ऐसा अहसास नहीं होना चाहिए कि यहां कोई बड़ा आयोजन हुआ और व्यवस्थाओं में कोई बदलाव हुआ हो।

परमपूज्यनीय मैं नहीं डॉ. हेडगेवार हैं
संघ के स्वयंसेवक सरसंघचालक को परमपूज्यनीय बोलते हैं। चर्चा के दौरान संघ प्रमुख भागवत ने एक स्वयंसेवक के मुख से अपने लिए यह शब्द सुना तो पूछा कि भाई कौन परमपूज्यनीय है? जिस पर जवाब मिला कि आप हैं। इस पर भागवत ने कहा कि नहीं मैं परमपूज्यनीय नहीं हूं। हम सबके लिए परमपूज्यनीय डॉ. हेडगेवार हैं, जिन्होंने संघ की नींव रखी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक के चरित्र से प्रकट होना चाहिए कि वह स्वयंसेवक है। शाखा और दिनचर्या पर ध्यान दें। अन्य किसी मुद्दे में न पड़ें। शाखा की बातों पर अमल करेंगे तो आगे बढ़ेंगे।

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