प्रशासन बोला नहीं दे सकते अनुमति, लोग बोले— पूजन तो होकर रहेगा

मंदिर मामले को लेकर बुलाई गई बैठक रही बेनतीजा, कलेक्टर ने कहा हम नहीं दे सकते मंदिर में पूजन की अनुमति। समाजसेवी बोले मंदिर में पूजन तो होकर रहेगी।

विदिशा। विजय मंदिर (बीजा मंडल) में मकर सक्रांति पर ताले खोल कर पूजा-अर्चना किए जाने के मामले को लेकर कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक बेनतीजा रही। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कह दिया कि इस मामले में वह कुछ नहीं कर सकते और मंदिर में पूजन नहीं होना चाहिए। जिसमें सभी सहयोग करें। वहीं समाज सेवियों का कहना था कि प्रशासन सहयोग करें या न करें लेकिन मकर सक्रांति से विजय मंदिर में नियमित पूजा अर्चना शुरू कर दी जाएगी। इस तरह यह मुद्दा अभी भी अधर में ही लटका हुआ है।

हो रही है मंदिर खोलने की मांग
मालूम हो कि विजय मंदिर में नियमित पूजा अर्चना करने और यहां के ताले खोले जाने तथा मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग को लेकर पुजारी महासंघ पंडित सहित कई संगठनों के लोग लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। इसी को लेकर 1 दिन पूर्व भी माधवगंज पर धर्म संसद का आयोजन भी किया गया था। मालूम हो कि विजय मंदिर आर्केलोजिकल विभाग विभाग के अंतर्गत आता है। नागरिकों का कहना है कि जिस तरह धार में नियमित पूजा अर्चना होती है सांची के बौद्ध स्तूप मंदिर में नियमित पूजा अर्चना होती है उदयपुर के संकर मंदिर में पूजा होती है यह मंदिर भी आर्केलोजिकल डिपार्टमेंट के अंतर्गत हैं तो फिर विदिशा में विजय मंदिर में क्यों नियमित पूजा अर्चना नहीं हो सकती। पहले बैठक एडीएम एचपी वर्मा ने अपने कक्ष में ली, लेकिन बात नहीं बनने पर वे कलेक्टर कक्ष में गए और कलेक्टर अनिल सुचारी के कहने पर सभी को वहां बुलाकर बैठक ली।

आर्केलोजिकल विभाग से बैठक करो
बैठक के दौरान सभी ने अपने अपने तर्क रखें लेकिन कलेक्टर नहीं माने कलेक्टर का कहना था कि वह इस मामले में नागरिकों का ज्ञापन प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे तथा आर्केलोजिकल विभाग के लोगों से चर्चा करेंगे उसके बाद ही कुछ निर्णय लेंगे। फिलहाल की स्थिति में उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अनुमति नहीं दे सकते। एडीएम ने आर्केलोजिकल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करने की सलाह दी। इस दौरान देवेंद्र राठोर ने कहा कि हमें सिर्फ पूजा अर्चना करने की अनुमति चाहिए इसके अलावा हम कुछ नहीं चाहते। जबकि इस मामले में दूसरा पक्ष या अन्य किसी का विरोध भी नहीं है तो पूजा अर्चना क्यों नहीं करने दी जाए।

आसिफ सिद्दीकी
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