हत्यारिन पत्नी को आजीवन कारावास

2010 में वन विकास निगम के लेेखापाल गोपाल गोयल की हत्या पत्नी ने ही कराई थी

By: Ram kailash napit

Published: 30 Nov 2016, 11:14 PM IST


विदिशा.
वन विकास निगम के लेखापाल गोपाल गोयल की हत्या करने वाली उनकी पत्नी नीलम और उसके तीन साथियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2010 में हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड में नीलम की मां और भाई को भी साक्ष्य छुपाने का दोषी मानते हुए तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश वंदना जैन ने बुधवार को जब ये फैसला सुनाया तो नीलम की आंखों में आंसू आ गए।

शासकीय अधिवक्ता केएल किरार ने बताया कि पीतलमिल क्षेत्र निवासी नीलम गोयल ने 27 जून 2010 की रात अपने पति गोपाल गोयल को खाना खिलाने के बाद आम के जूस में नींद की गोलियां मिलाकर पिला दीं थी। इसके बाद गोपाल की गहरी नींद लगने पर अपने साथी वीरेंद्र ठाकुर, शुभम पंडित और रामस्वरूप को घर पर बुला लिया था। फिर चारों ने मिलकर गोपाल गोयल की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उसी की कार से लाश को रायसेन जिले के देहगांव के पास एक कुए में फेंक दिया था। वहीं कार को सुल्तानपुर के पास लावारिस हालत में छोड़ दिया था। बाद में खुलासा हुआ कि गोपाल की पत्नी नीलम ने ही अपने साथियों की मदद से गोपाल की हत्या की थी। आरोपियों ने गमछे से उसका गला घोंटा और चाकू से वार किया था।

यह था कारण
अभियोजन के मुताबिक गोपाल को पता चल गया था कि नीलम के संबंध शहर के कई रईसों से हैं। वह काफी रुपया चुराकर होशंगाबाद के सेमरी हरचंद स्थित मायके में अपनी मां को भेजती रहती थी। जिस पर पति-पत्नी में विवाद होते थे। इसी कारण नीलम पति से छुटकारा पाना चाहती थी। नीलम और गोपाल दोनों का ही यह दूसरा विवाह था।

गोपाल हत्याकांड का घटनाक्रम
एडवोकेट किरार ने बताया कि पीतलमिल क्षेत्र निवासी गोपाल गोयल को 27 जून 2010 को भोपाल से होते हुए बहन उमा की जमीन की नपती करवाने हंडिया जाना था। जब वे हंडिया नहीं पहुंचे तो 28 जून को बहन उमा ने दूसरे भाई विष्णु गोयल  सहित अन्य परिजनों को गोपाल के नहीं पहुंचने की सूचना दी। जिस पर विष्णु ने नपती करने के लिए साथ जाने वाले रिटायर्ड आरआई मधुसूदन तिवारी से संपर्क किया। मधुसूदन ने बताया कि गोपाल उनके पास आए ही नहीं हैं। जिस पर विष्णु ने गोपाल के सभी दोस्तों और रिश्तेदारों से भी जानकारी जुटाई पर कुछ पता नहीं पडऩे पर 30 जून को  सिविल लाइंस थाने में उनकी गुमशुदगी की सूचना दी।

बेटी के बयान से उजागर हुआ सच
गोपाल की गुमशुदगी के बाद गोपाल की पुत्री महक ने चाचा विष्णु और अन्य परिजनों को बताया कि उसकी मां नीलम ने उससे कहा है कि वह पुलिस और सबसे कहे कि उसके पापा गोपाल घर से ढाई लाख रुपए लेकर थे। जिससे यह लूट का मामला लगेगा और उस पर किसी को शक नहीं होगा। नहीं तो पुलिस बेवजह परेशान करेगी। विष्णु ने महक का कथन पुलिस को बताया। जिस पर पुलिस ने नीलम की घटना वाले दिन और उसके कुछ दिन पहले की कॉल डिटेल्स नीलम की निकाली। जिसमें नीलम की बात होशंगाबाद के बाबई निवासी वीरेंद्र ठाकुर, शुभम पंडित और रामस्वरूप से बार-बार होना सामने आया। ये लोग नीलम के दोस्त हैं। घटना वाले दिन और रात में लगातार कई घंटों तक उनके बीच बात हुई थी। इसके पहले भी यह चारों लगातार मोबाइल पर संपर्क में रहे थे। कॉट डिटेल्स के आधार पर नीलम और उसके तीनों साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उन्होंने अपराध स्वीकार किया। तब पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया। करीब छह साल तक चले मामले में साक्ष्यों के आधार पर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश वंदना जैन ने नीलम गोयल, वीरेंद्र ठाकुर, शुभम पंडित और रामस्वरूप को उम्र कैद की सजा सुनाई। वहीं नीलम की मां श्यामाबाई और भाई अजय उर्फ अक्कू को हत्या के षडय़ंत्र में शामिल होने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में तीन-तीन साल की कारावास की सजा सुनाई।
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Ram kailash napit Desk
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