कहीं सफेद साड़ी में करते हैं बेटी की विदाई, तो कहीं मवेशियों के साथ जंगल में रखते है मौन व्रत। जानिए आदिवासी संस्कृति की अनोखी धरोहर...
गोड़ और बैगा समुदाय में दीपावली के बाद मौनी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन युवाओं का जोड़ा बनाया जाता है जो मवेशियों के साथ जंगल में दिनभर मौन व्रत रखते हैं। शाम को पूरा समुदाय एकत्रित होता है और मवेशियों के नीचे से सात बार निकलते हैं।
भीमडोंगरी, रामनगर चौगान क्षेत्र के आदिवासियों की अलग परंपरा है। शांती का प्रतीक मानते हुए इस गांव में शादी के बाद लडक़ी को सफेद कपड़ों में विदा करने की परंपरा है। इतना ही नहीं शादी में शामिल होने वाले सभी लोग सफेद लिबास में नजर आते है।
बैगा समाज में इस दिन धान फसल का पहला अनाज चढ़ाने की परंपरा है, जिसे ग्रामीण नवाखाई भी कहते हैं। पूर्वजों की पूजा अर्चना के बाद बैगा परिवार सबसे पहला दीप अनाज रखने वाले स्थान पर जलाते हैं।
इसके अलावा बैगा समुदाय में गौर पूजा की परंपरा दशकों से चली आ रही है। इस पूजा में सात जानवरों की सात साल तक पूजा की जाती है। पूरा गांव प्रकृति और जानवरों की रक्षा का वचन लेता है।
वहीं आदिवासी समाज की एक और महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें होली के समय पेड़-पौधों की पूजा कर उनके संरक्षण का वचन लिया जाता है। इसके साथ ही नारीशक्ति को सम्मान देने के उद्देश्य से विशेष रस्में निभाई जाती हैं।