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Ayurvedic six tastes : जानिए आयुर्वेद के वो 6 रस जो शरीर को बनाते हैं मजबूत


Manoj Vashisth

19 September 2024

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खाने में छह रसों को शामिल करना आवश्यक होता है। ये रस न केवल शरीर के पोषण के लिए आवश्यक होते हैं, बल्कि शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं।

मधुर रस यानी मीठे खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक ऊर्जा और ताकत प्रदान करते हैं। इसका सेवन शरीर के लिए लाभदायक होता है, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से मोटापा और मधुमेह जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका संतुलित उपयोग शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।

तिक्त रस यानी कड़वे खाद्य पदार्थ शरीर को डिटॉक्सिफाई करने का काम करते हैं। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन तंत्र को साफ रखने में मदद करता है। इसके साथ ही यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है, जिससे बीमारियों से बचाव होता है।

कटु रस, जिसे तीखा या मसालेदार भी कहते हैं, पाचन शक्ति को बढ़ाता है। यह रस शरीर को ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है। हालांकि, इसका अत्यधिक सेवन पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लेना चाहिए।

लवण रस यानी नमकीन खाद्य पदार्थ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। यह पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। हालांकि, अधिक नमक का सेवन करने से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

आंवला रस, जिसे खट्टा रस भी कहते हैं, पाचन तंत्र को मजबूत करता है और भूख बढ़ाता है। इसके साथ ही यह शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करता है। आंवला रस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करता है, जिससे बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।

आयुर्वेद में साफ-सफाई को बहुत महत्व दिया गया है। खाना खाने से पहले हाथ धोने की प्रक्रिया शरीर में संक्रमण और बीमारियों से बचाव करती है। इसलिए खाना खाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धोना या सैनिटाइज करना बहुत जरूरी है।