मारवाड़ी- जिसे मरूभाषा कहा गया है।पश्चिमी राजस्थान की प्रधान बोली है।
मेवाड़ी- उदयपुर एवं उसके आसपास के क्षेत्र को मेवाड़ कहा जाता है। इसलिए यहां की बोली मेवाड़ी कहलाती है।
जयपुर, किशनगढ़, टोंक, लावा तथा अजमेर-मेरवाड़ा के पूर्वी अंचलों में बोली जाने वाली भाषा ढूंढाड़ी कहलाती है।
तोरावटी- झुंझुनूं, सीकर जिले का पूर्वी एवं दक्षिणी-पूर्वी भाग तथा जयपुर जिले के कुछ उत्तरी भाग को तोरावाटी बोली जाती है।
हाड़ौती- कोटा, बूंदी, बांरां एवं झालावाड़ का क्षेत्र हाड़ौती कहलाता है और यहां की बोली हाड़ौती है।
मेवाती- अलवर एवं भतरपुर जिलों का क्षेत्र मेव जाति की बहुलता के कारण मेवात के नाम से जाना जाता है। अतः यहां की बोली मेवाती कहलाती है।