बेहाला में दक्षिणंदरी युवा सर्बोजनिन पंडाल कोलकाता की लंबे समय से खोई हुई संस्कृति को खूबसूरती से दर्शाता है।
दक्षिण कोलकाता में त्रिधारा सम्मिलनी ने पारंपरिक भारतीय प्रांगण का प्रतिनिधित्व करते हुए "आंगन" थीम को अपनाया है।
कोलकाता के लालबागान में 8,000 पौधों से बना यह अद्भुत दुर्गा पूजा पंडाल पर्यावरण के महत्व और पर्यावरण के अनुकूल होने का संदेश देता है।
बागुईहाटी में अर्जुनपुर अमरा सबाई क्लब ने एक शानदार लाइव पंडाल पेश किया है, जो कोलकाता की दुर्गा पूजा की सच्ची भावना को दर्शाता है।
यह पंडाल आदमकद ट्रेन मॉडल और डिटेल्स से भरा हुआ है, जो कोलकाता की मेट्रो रेल सिस्टम की नकल करता है।
साल्ट लेक में वर्षा जल संरक्षण पंडाल न केवल शानदार है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है. एक सुंदर झरने और हरे-भरे सजावट के साथ, पंडाल एक शांत वातावरण बनाता है।
इस पंडाल का थीम बंगाल द्वारा सती प्रथा को समाप्त करने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है। यह भारत के कुछ हिस्सों में अभी भी प्रचलित बाल विवाह की प्रथा को भी क्रिटिसाइज करता है।