100 साल से ज्यादा पुराना इतिहास रखने वाले इन बटुओं को पहले नवाब परिवारों में बेगम इस्तेमाल करती थीं। बाद में सामान्य महिलाओं की शान बना और वे इसमें पान, लौंग, इत्र आदि रखने लगीं।
भोपाल से निकलकर ये Bhopali Batua or Potli bagपूरी दुनिया में छा गया है। अरब देशों के साथ अमरीका, ब्रिटेन, जापान, चीन और इंडोनेशिया में भी मांग बढ़ी है।
20 साल से बटुआ बना रही हुमा खान ने बताया, भोपाली बटुए का इतिहास कम रोचक नहीं है।
नवाबों के काल में विदेशों से आए कारीगरों ने शुरुआत की थी। तब बेगमों के लिए जरी जरदोजी के जूते, कपड़े और बटुए बनाए जाते थे।
बाद में इस शिल्प कला को भोपाल में और विकसित किया गया। अब इसकी लंबी रेंज लोगों को लुभा रही है।
राजधानी में 80 साल से भोपाली बटुए बनाने वाले असलम खान का कहना है, अब बॉलीवुड के सितारों की भी यह पसंद है।
कई बार उन्होंने सितारों को भोपाल से बटुए भेजे। रेखा, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट समेत कई अभिनेत्रियों की फिल्मों में भोपाल की यह कला दिखी।
इन Bhopali Batua or potli bag की खासियत है कि आजकल ये फैशन ट्रेंड बन गए हैं. बदलते वक्त के साथ इनका अंदाज भी बदला है।