मां काली को श्मशान की देवी माना गया है। इसीलिए उनकी पूजा भी नहीं की जाती। इनकी पूजा अधिकतर तांत्रिक और अघोरी लोग करते हैं।
ये मंदिर जागृत काली मां का मंदिर है। मंदिर के प्रांगण में साईं बाबा, हनुमान जी, शनि देव और शिव जी के छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं।
लगभग 60 वर्षों से मंदिर के सामने एक कांच के बक्से के अंदर एक कपाल रखा हुआ है, जिसके शीर्ष पर एक अखंड ज्योति जल रही है।
इस ज्योति की देखरेख मंदिर के पंडित और यहां काम करने वाले भक्त कर रहे हैं, जिसे देखने और पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है।