पेट के लिए बढिय़ा औषधि है हरड़, ऐसे करें इस्तेमाल

पेट के लिए बढिय़ा औषधि है हरड़, ऐसे करें इस्तेमाल
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Vikas Gupta | Publish: Jun, 01 2017 11:09:00 PM (IST) वेट लॉस

हरड़ की उपयोगिता के बारे में शास्त्रों मे कहा गया है कि जिसके घर में माता नहीं है, उसकी माता हरीतकी है। माता फिर भी कभी कुपित (गुस्सा) हो सकती है लेकिन हरड़ पेट में जाने पर कोई अहित नहीं करती बल्कि हमेशा फायदा ही करती है। 

हरड़ को आयुर्वेद में गुणकारी औषधि माना गया है। आयुर्वेद की चरक संहिता में जिस प्रथम औषधि के बारे में बताया गया है वह हरड़, हर्रे या हरीतकी है। हरड़ की उपयोगिता के बारे में शास्त्रों मे कहा गया है कि जिसके घर में माता नहीं है, उसकी माता हरीतकी है। माता फिर भी कभी कुपित (गुस्सा) हो सकती है लेकिन हरड़ पेट में जाने पर कोई अहित नहीं करती बल्कि हमेशा फायदा ही करती है। घरेलू रूप में छोटी हरड़ का ही अधिकतर उपयोग किया जाता है। हरीतकी संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद है विशेष रूप से कब्ज, बवासीर, पेट के कीड़ों को दूर करने, नेत्र ज्योति व भूख बढ़ाने, पाचन तथा अलग-अलग मौसम में होने वाले रोगों में भी ये प्रभावी होती है। 

प्रमुख प्रयोग
बवासीर और कब्ज के लिए दो ग्राम हरड़ के चूर्ण में थोड़ा गुड़ मिलाकर गोली बना लें। छाछ में भुना जीरा मिलाकर ताजा छाछ के साथ सुबह-शाम खाने के बाद इसे लेने से बवासीर के मस्सों का दर्द और सूजन में आराम मिलता है। 2-3 हरड़ कच्ची ही पीस लें या तवे पर सेककर फुला लें और ठंडी होने पर पीस लें। इस चूर्ण को रात को गर्म पानी से लेने पर कब्ज, गैस, एसिडिटी और बवासीर में फायदा होता है।

खाने के बाद 1-2 छोटी हरड़ को चूसने से भूख न लगना, गैस और कब्ज की समस्या दूर होती है। हरड़ के बने हुए औषध योग जैसे हरीतकी चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, सोंधी हरड़, हरड़ का मुरब्बा आदि काफी फायदेमंद होते हैं। छोटी हरड़ सभी पंसारियों के यहां  आसानी से मिल जाती है। यह आयुर्वेद की सस्ती और सुलभ औषधि है।
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