दीर्घायु होते हैं अध्यात्म में आस्था रखने वाले

दीर्घायु होते हैं अध्यात्म में आस्था रखने वाले

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Jul, 11 2018 04:38:41 AM (IST) वेट लॉस

शास्त्रों में कहा गया है, जो लोग नियमित पूजा-पाठ करते हैं वे दीर्घायु होते हैं। यह बात अब वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो चुकी है। हैल्थ जर्नल...

शास्त्रों में कहा गया है, जो लोग नियमित पूजा-पाठ करते हैं वे दीर्घायु होते हैं। यह बात अब वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो चुकी है। हैल्थ जर्नल जेएएमए इंटरनल मेडिसिन, अमरीका के मुताबिक जो महिलाएं नियमित धार्मिक स्थानों पर जाती हैं उनकी आयु अन्य की तुलना में अधिक होती है।

तर्क : आशावादी होती हैं महिलाएं

अध्यात्म से जुड़ी महिलाएं आशावादी होती हैं। इन पर अवसाद या तनाव का असर कम पड़ता है। धूम्रपान और शराब से दूर रहने के कारण इन्हें कार्डियोवस्कुलर डिजीज व कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा २७ फीसदी तक घट जाता है। यह शोध १६ साल तक ७५ हजार महिलाओं (मध्यम व अधिक उम्र की) पर हुआ है।

परिणाम : खुश रहने से दूर होते रोग

शोध के मुताबिक, धार्मिक जगहों पर जाने से इनकी सहभागिता बढ़ती है। ऐसी में वे ज्यादा खुश रहती हैं। इस कारण बीमारियां होने का खतरा काफी कम हो जाता है।

मंत्रोच्चारण से बढ़ती एकाग्रता

वातावरण का सीधा असर मन पर पड़ता है। मन का सीधा संबंध शरीर व बीमारियों से होता है। मंदिर, मस्जिद और चर्च में सकारात्मक माहौल में एकाग्रता के साथ शब्दों (मंत्र) को जपने से मन नियंत्रित रहता है। नियंत्रित मन बीमारी से बचाकर लंबी आयु देता है।


माइंड-बॉडी का सीधा कनेक्शन

दिमाग की हर गतिविधि का असर शरीर पर पड़ता है। अगर खुश हैं तो एंडॉर्फिन हार्मोन स्त्रावित होता है। यह कैंसर रोग से बचाव के साथ खुश रखता है। इस कारण अध्यात्मिक लोगों में दीघायु होने के साथ हार्ट रोगों का खतरा कम होता है।


सही दिनचर्या रखती है फिट

नियमित रूप से धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोगों को ताजा हवा मिलने से पूरे दिन एक्टिव रहते हैं। उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित प्रार्थना से मन शांत रहता है और दूसरे के प्रति विश्वास की भावना जागृत होती है। इससे तनाव कम होता है। धार्मिक लोग कई व्यसनों से दूर रहते हैं जो हार्ट और कैंसर जैसी बीमारियों के मुख्य कारण हैं।

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